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यूपी: कोर्ट में धमाका और फायरिंग

Thu, 10 Jul 2014 02:45 PM IST
Updated Thu, 10 Jul 2014 02:45 PM IST
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bomb blast and firing in faizabad court

यूपी में अपराध की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसकी तस्दीक बुधवार दोपहर फैजाबाद में हुई। यहां जिला अदालत में पेशी पर आए सुल्तानपुर के धनपतगंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और बाहुबली मोनू सिंह की हत्या करने के लिए जमकर गैंगवार हुई।

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पुलिस हिरासत में कोर्ट पहुंचे मोनू सिंह को मारने के लिए दो बदमाश न सिर्फ कोर्ट परिसर में दाखिल हो गए, बल्कि उन्होंने बम भी मार दिया। इतना ही नहीं, इसके बाद जमकर फायरिंग शुरू हो गई।
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दोनों तरफ से दिनदहाड़े गोलियां चलीं, जिसमें एक हमलावर और एक अन्य शख्स की जान चली गई।

फिर भिड़ गए पुलिस और वकील

bomb blast and firing in faizabad court

सीरियल बम विस्फोट की घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर अति संवेदनशील की श्रेणी में शामिल कचहरी परिसर में बुधवार को गैंगवार ने सुरक्षा को लेकर बरती जा रही गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है।

इससे आक्रोशित अधिवक्ताओं ने मौके पर पहुंचे नगर कोतवाल की जमकर पिटाई कर दी, बाकी सिपाही-दरोगा भी हमले से बचाव करते दिखे।

हालत यह थी कि कोतवाल शैलेंद्र सिंह और सिपाहियों पर पथराव करने के साथ ही दौड़ा-दौड़ाकर पिटाई की गई।

हमले के बाद चाकचौबंद थी सुरक्षा-व्यवस्‍था

bomb blast and firing in faizabad court

वर्ष 2007 के नवंबर माह में फैजाबाद समेत वाराणसी व लखनऊ के जिला कचहरियों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट की घटना के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर यहां कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक-चौबंद कर दी गई थी।

रोजाना सुबह शाम पूरे परिसर की बीडीडीएस व एंटी सेबोटाज चेक टीम से तलाशी होती है, साथ ही हर आने-जाने वालों को गेट पर डीएफएमडी से गुजरने व तलाशी के बाद ही अंदर जाने की इजाजत होती है। अधिवक्ता तक गाड़ी लेकर अंदर प्रवेश नहीं कर सकता।

इन सबके बावजूद बदमाश बम व असलहे लेकर अंदर कैसे दाखिल हुए और हमले के दौरान पुलिस पिकेट कहां थी, इसे लेकर अधिवक्ता समाज खासा आक्रोशित रहा।

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कोतवाल को लात-घूसों से पीटा

bomb blast and firing in faizabad court

घटना के समय कई अधिवक्ता बाल-बाल बचे। ऐसे में जैसे ही कोतवाल घटना स्थल पर पहुंच कर अधिवक्ताओं को हटाने के लिए तेवर में आए, वकीलों ने हमला कर दिया।

कालर पकड़ कर दौड़ा-दौड़कर लात-घूसे से सरेआम पिटाई की। बचाव में आए सिपाही-दरोगा भी अधिवक्ताओं के गुस्से का शिकार हुए।

इसी बीच एसएसपी केबी सिंह समेत पहुंचे अधिकारियों व बार के जिम्मेदार लोगों ने अधिवक्ताओं को समझाकर पुलिस को अपना काम करने में व्यवधान न उत्पन्न करने के लिए शांत कराया।

वकीलों का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर वादकारियों तथा वकीलों को परेशान करने वाली पुलिस यह क्यों नहीं बताती कि कचहरी परिसर में बम व असलहे कैसे पहुंच गये? आखिर गेट पर तैनात पुलिस किसकी जांच का नाटक करती है?

लापरवाही का लगा आरोप

bomb blast and firing in faizabad court

अधिवक्ता रामशंकर तिवारी व प्रदीप चौबे ने बताया कि लापरवाही पहले से ही बरती जा रही थी। कई बार यह मुद्दा प्रशासन के समक्ष उठाया भी गया।

पहुंचदार ही क्या अन्य भी वाहन समेत कचहरी परिसर पहुंच सकते हैं और अपने साथ असलहा व बम भी ले जा सकते हैं। घटना इसका ताजा उदाहरण है।

पकड़े गए युवक पर भी हमलावर थे अधिवक्ता

-पेशी पर मोनू सिंह पर बस से हमला के मामले में पकड़े गए एक हमलावर को कब्जे में लेकर सबक सिखाने के लिए भी अधिवक्ता अड़े हुए थे। पुलिस-प्रशासन के उसे किसी तरह पहले कचहरी के लॉकअप में ले जाकर अधिवक्ताओं को खदेड़ना पड़ा, बाद में कड़ी सुरक्षा के बीच आला अधिकारी उसे कोतवाली भेजने में सफल हुए।

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