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Lucknow : बदलते यूपी के मंत्र से प्रदेश का सियासी तंत्र साधने की कोशिश, भाजपा पूरे चुनावी मोड में

Sat, 11 Feb 2023 10:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 11 Feb 2023 10:26 AM IST
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BJP Trying to use the mantra of changing UP to control the state political system
इंवेस्टर्स समिट में मौजूद उप मुख्यमत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्त - फोटो : amar ujala

यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का उद्घाटन करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस पूरी तरह यूपी में योगी सरकार बनने के बाद राज्य की बदल रही तस्वीर की खूबियां समझाने व निवेशकों का विश्वास बढ़ाने पर रहा। उन्होंने किसी राजनीतिक दल या नेता का नाम लेकर उस पर हमला तो नहीं किया, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री के साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व सीएम योगी आदित्यनाथ ने गैर भाजपा सरकारों के कुशासन से यूपी की बदहाली तथा वर्तमान सरकार के सुशासन से आई खुशहाली व बदलाव के मंत्र से सियासी तंत्र साधने की कोशिश की।

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मोदी ने योगी के नेतृत्व में प्रदेश के मजबूत हो रहे अर्थतंत्र तथा निरंतर बेहतर हो रही छवि के उल्लेख से उनकी नेतृत्व क्षमता पर फिर मुहर लगाई और अपने बढ़ते भरोसे का संदेश दिया। ऐसा करके उन्होंने उद्योगपतियों को शायद यह भरोसा देने की कोशिश की कि वे निश्चिंत होकर यूपी में निवेश करें। बतौर सीएम योगी न सिर्फ स्थिर हैं, बल्कि उनकी नीतियों को केंद्र का पूरा समर्थन भी है। उद्योगपतियों का निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। शायद इसीलिए पीएम ने योगी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य में सोशल, फिजिकल, डिजिटल अवस्थापना सुविधाओं के क्षेत्र से लेकर बिजली से लेकर कनेक्टविटी तक हुए कामों का उल्लेख किया।
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सरोकारों के साथ सियासी समीकरण पर नजर
मोदी ने भाषण की शुरुआत ही यूपी के सांस्कृतिक वैभव, गौरवशाली इतिहास, समृद्धशाली विरासत का जिक्रकरते हुए की। उन्होंने कहा कि इतना सब होने के बावजूद अतीत में यूपी की छवि खराब कानून-व्यवस्था और घोटाले वाली थी। लोग मान बैठे थे कि यूपी में विकास मुश्किल है। कानून-व्यवस्था सुधरना कठिन है। यूपी की छवि बीमारू राज्य की बन गई थी। उद्यमी निवेश से कतराने लगे थे। पर, बीते 6 वर्षों में यूपी की छवि बदली है। इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ ने भी कथित धर्मनिरपेक्षता तथा छद्म समाजवाद के जरिए यूपी की बदहाली का जिक्र कर बीते छह वर्षों में हुए बदलावों से आई समृद्धि के बारे में समझाने का प्रयास किया। कहा, पहले यूपी में निवेश वेस्ट माना जाता था, जो अब बेस्ट माना जा रहा है। 
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मोदी ने सिर्फ योगी की पीठ ही नहीं थपथपाई, बल्कि खुद को यूपी का सांसद और यूपी के लोगों के प्रति विशेष जिम्मेदारी का उल्लेख कर सियासी समीकरण भी साधे। अर्थशास्त्री प्रो. अंबिका प्रसाद तिवारी कहते हैं कि यूपी के सरोकारों से खुद को जोड़कर तथा प्रदेश को देश का आर्थिक ग्रोथ इंजन बताकर प्रधानमंत्री ने उद्योगपतियों को यह संदेश दिया है कि राज्य में उनके निवेश को केंद्र सरकार का भी पूरा प्रोत्साहन मिलेगा। मोदी की यह बात डबल इंजन सरकार की जरूरत बताने व समझाने का अचूक हथियार है जिसे उन्होंने रोजगार व आर्थिक समृद्धि के सरोकारों के साथ जोड़कर चला है। भविष्य में आर्थिक समृद्धि व सुरक्षित भविष्य का यह संदेश सियासी दांव के रूप में विपक्ष की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

युवाओं व किसानों को भी साधने का प्रयास
पीएम से लेकर सीएम ने निवेश महाकुंभ के जरिए 2014 से लेकर 2022 तक हुए लोकसभा और प्रदेश विधानसभा के चुनावों में वादों पर अमल का भरोसा देने तथा युवाओं व किसानों को लामबंद करने की भी कोशिश की। पूर्वांचल और बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने पर निरंतर हो रहे कामों को बताकर उन्होंने उद्योगपतियों को भरोसा देने का प्रयास किया। योगी ने  समिट के जरिए होने वाले निवेश से लगभग एक करोड़ को नौकरी व रोजगार मिलने की बात कहकर युवाओं को रोजगार व नौकरी मुहैया कराने के वादे पर ईमानदारी से काम करने का भरोसा देने की कोशिश की। 

खेती व किसानों की दुश्वारियों पर विपक्ष केंद्र व प्रदेश सरकार को अक्सर घेरता रहता है। शायद इसीलिए मोदी ने जब अपने भाषण में ग्रीन एनर्जी, प्राकृतिक खेती तथा मोटे अनाजों के प्रयोग को बढ़ावा देने की सरकार की नीति तथा इसके लिए बजट में की गई व्यवस्थाओं का उल्लेख किया तो साफ हो गया कि वे इस मंच से उद्योगपतियों को इन क्षेत्रों में भी निवेश का आमंत्रण दे रहे हैं। इस आमंत्रण के जरिए पीएम ने  किसानों को भी यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया है कि सरकार खेती पर उनकी लागत को कम करने, उपज की खपत बढ़ाने तथा आय बढ़ाने के प्रयासों पर ईमानदारी से काम कर रही है।

संतुलित विकास के संदेश से साधे समीकरण
प्रधानमंत्री ने संतुलित विकास के जरिए भी लोगों को साधने की कोशिश की। याद रखना होगा कि मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बदहाली को मुद्दा बनाकर लोगों से समर्थन मांगा था। फिर इसी काम को पूरा करने के लिए 2017 में डबल इंजन सरकार की जरूरत बताई थी। उसके संदर्भ में मोदी ने इस समिट के जरिए लोगों का राजनीतिक भरोसा हासिल करने का प्रयास किया। 


प्रदेश में 2017 में सरकार बनने के बाद शुरू हुए विकास के कार्यों में दो साल की कोविड महामारी से आई बाधाओं तथा चुनौतियों का संकेतों में हवाला देते हुए उन्होंने अर्थव्यवस्था की रफ्तार में आई तेजी के साथ बुंदेलखंड व पूर्वांचल के विकास के लिए हो रहे कामों का उल्लेख कर यह समझाने का प्रयास किया कि डबल इंजन सरकार न होने पर यूपी का समन्वित व संतुलित विकास रुक सकता है। शायद इसीलिए मुख्यमंत्री ने 32 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों में से पूर्वी यूपी में 9 लाख करोड़ से अधिक तथा बुंदेलखंड में 4 लाख करोड़ निवेश के प्रस्ताव का खासतौर से उल्लेख किया। उन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार पूर्वांचल व बुंदेलखंड के विकास व रोजगार के अवसर बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। डबल इंजन सरकार न होने पर इस काम में बाधा आ सकती है।

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