{"_id":"6aaa8687b057375ff005b34f","slug":"five-students-are-suspend-from-lucknow-university-lucknow-news-c-13-1-lko1020-1922477-2026-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: लखनऊ विश्वविद्यालय में पांच छात्र निलंबित, छात्रावास आवंटन भी निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: लखनऊ विश्वविद्यालय में पांच छात्र निलंबित, छात्रावास आवंटन भी निरस्त
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने गत नौ सितंबर को युवा संसद के आयोजन के दौरान छात्राओं से अभद्रता और छेड़खानी के मामले में पांच छात्रों को तत्काल प्रभाव से जांच पूरी होने तक विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्हें आवंटित कमरों का आवंटन निरस्त करते हुए विश्वविद्यालय की सभी सुविधाओं से वंचित कर दिया गया है। निलंबित छात्रों को विश्वविद्यालय के उमंग परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।
कुलानुशासक कार्यालय की ओर से 16 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, नौ सितंबर को मुख्य परिसर स्थित एपी सेन सभागार में छात्रोचित मर्यादाओं के प्रतिकूल आचरण का मामला सामने आया था। इस संबंध में चेयरपर्सन, आंतरिक शिकायत समिति की अंतरिम रिपोर्ट की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई की गई है।
कार्रवाई की जद में बीए (एनईपी) तृतीय वर्ष के दिव्यांश अवस्थी, अनुराग कुमार यादव (अनुराग चौधरी), नितिन पांडेय और अखिलेश प्रताप यादव तथा पीएचडी (राजनीतिशास्त्र) के शरद मिश्रा शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने सभी छात्रों को आदेश प्राप्त होने के तीन कार्य दिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने पर यह माना जाएगा कि छात्रों को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद उनके खिलाफ अग्रिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कुलानुशासक कार्यालय की ओर से 16 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, नौ सितंबर को मुख्य परिसर स्थित एपी सेन सभागार में छात्रोचित मर्यादाओं के प्रतिकूल आचरण का मामला सामने आया था। इस संबंध में चेयरपर्सन, आंतरिक शिकायत समिति की अंतरिम रिपोर्ट की संस्तुति के आधार पर कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन
कार्रवाई की जद में बीए (एनईपी) तृतीय वर्ष के दिव्यांश अवस्थी, अनुराग कुमार यादव (अनुराग चौधरी), नितिन पांडेय और अखिलेश प्रताप यादव तथा पीएचडी (राजनीतिशास्त्र) के शरद मिश्रा शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने सभी छात्रों को आदेश प्राप्त होने के तीन कार्य दिवस के भीतर कुलानुशासक कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने पर यह माना जाएगा कि छात्रों को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद उनके खिलाफ अग्रिम अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।