बंगला मोह पर विपक्ष को घेरने की तैयारी में भाजपा, जनता के सामने खोलेंगे सपा-बसपा की पोल
भाजपा ने सरकारी बंगला मामले पर विपक्ष को घेरने का मन बनाया है। मोदी सरकार के चार साल पूरा होने पर उपलब्धियों को गांव-गांव पहुंचाने की तैयारी में जुटी भाजपा ने इसे भी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
बंगलों से दिल लगाए बैठे मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और मायावती की दास्तान गांव-गांव सुनाने की रणनीति बन रही है। साथ ही अतीत के पन्नों में इन नेताओं से संबंधित इबारत के सहारे भी घेरने की तैयारी है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह ने तो बंगला खाली करना शुरू कर दिया है, लेकिन मुलायम, अखिलेश और मायावती टालमटोल कर रहे हैं।
सपा नेताओं का तर्क खुद को उच्च सुरक्षा प्राप्त होने के कारण सुरक्षित जोन और लखनऊ में कोई आवास न होने का है तो मायावती ने अपने बंगले पर ‘श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल’ का बोर्ड लगाकर यह बताने का प्रयास किया है कि उनका बंगला कांशीराम के अनुयाइयों की स्मृतियों से जुड़ा है।
एक तरह से उन्होंने बंगले को दलित भावनाओं से जुड़ा होने का संदेश देने की कोशिश की है। जाहिर है, भगवा टोली को इस मामले में बढ़त मिल गई है। साथ ही यह कहने का मौका भी कि भाजपा के लोग ही वास्तव में संवैधानिक संस्थाओं और राजनीतिक शुचिता में आस्था रखते हैं।
जनता के सामने खोलेंगे पोल
सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा कहते हैं- सपा और बसपा सियासी स्वार्थ तथा मौके के आधार पर संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के निर्देशों व नियमों को परिभाषित करती हैं। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मनमाफिक हो तो स्वागत वर्ना तरह-तरह की बहानेबाजी।
पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला खाली करने के निर्देश पर सपा और बसपा का रवैया यही साबित करता है। भाजपा जनता को पूरी सच्चाई बताएगी। उधर, पार्टी के वरिष्ठ नेता व प्रदेश कार्यसमिति के पूर्व सदस्य अमित पुरी अलग-अलग चुनाव में दाखिल शपथ पत्रों का हवाला देते हुए कहते हैं कि अखिलेश और मायावती, सभी के पास लखनऊ में उच्च सुरक्षित जोन में निजी संपत्तियां हैं।
मुलायम के पास भी ऐसी जगह मकान है जो सुरक्षित कहा जाएगा। इनमें से कोई छोटा भी नहीं है। इसलिए सुरक्षा और राजधानी में आवास न होने का तर्क पूरी तरह बहाना है। असली मामला सरकारी संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने का है। भाजपा जनता के बीच यह पोल खोलेगी।
यह आंखों में धूल झोंकने जैसा
भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक का कहना है कि यह अजीब मजाक है। अपने पास कोई व्यवस्था न होने का बहाना वे कर रहे हैं जो आय से अधिक संपत्ति मामले में घिरे हैं। यह आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर हीलाहवाली न तो नैतिक है और न राजनीतिक शुचिता पर जनता का भरोसा बढ़ाने वाली। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे की इनकी चाह की कोशिश जनता को बताई जाएगी।
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि इतने महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके लोग कोर्ट के फैसले के बावजूद जिस तरह सरकारी बंगलों को अपने पास बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं उससे यही साबित होता है कि पद पर रहते हुए भी इनका एकमात्र लक्ष्य सिर्फ संपत्ति बनाना रहा।