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मोदी के बयान पर शुरू हुआ वोट का इंतजाम
अखिलेश वाजपेई/लखनऊ
Updated Thu, 05 Sep 2013 02:11 AM IST
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सिर्फ सपा, बसपा और कांग्रेस के ही नहीं इस बार यूपी में भाजपा के एजेंडे में भी मुसलमान रहेगा।
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भगवा चेहरे और रीतिनीति के लिए पहचानी जाने वाली भाजपा के मंचों से इस लोकसभा चुनाव में मुसलमानों के दर्द और दुख की गूंज सुनाई देगी।
भगवा खेमे की पंचायतों में इनकी बदहाली पर चर्चा होगी लेकिन अंदाज कुछ अलग होगा।
दरअसल, भाजपा ने सपा, बसपा और कांग्रेस को जवाब देने के लिए इन्हीं के हथियार से इनको जवाब देने की रणनीति बनाई है। इसके तहत पार्टी ने इन दलों की मुस्लिम हितैषी छवि की पोल खोलने का फैसला किया है।
जिसके तहत लोगों को खासतौर से मुसलमानों के बीच इन दलों के कथनी व करनी के अंतर को उजागर किया जाएगा। इसके लिए सरकारी आंकड़ों का ही सहारा लिया जाएगा। यह आंकड़े सूचना के अधिकार के जरिये या अन्य तरीके से हासिल किए जाएंगे।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने यह रणनीति मोदी के उस बयान के मद्देनजर तैयार की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब गुजरात का मुसलमान भाजपा को वोट दे सकता है तो देश के दूसरे राज्यों में क्यों नहीं दे सकता।
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मुसलमानों को मांगना चाहिए इन सवालों का जवाब
पार्टी अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि भाजपा तो बहुत कम समय तक प्रदेश व देश में सत्ता में रही। केंद्र व राज्य में कांग्रेस सबसे ज्यादा वक्त तक सरकार में रही।
सपा और बसपा की सरकारों को भी खूब मौका मिला। तब भी मुसलमानों की बदहाली पूरी तरह दूर क्यों नहीं कर पाईं। भाजपा, मुस्लिम बंधुओं से आग्रह करेगी कि वे सपा, बसपा और कांग्रेस से इन सवालों का जवाब पूछें। तब इन दलों के बारे में अपनी धारणा बनाएं।
जल्द शुरू होगा अभियान
भाजपा अध्यक्ष के अनुसार, इस मुद्दे को जनता और खासतौर से मुसलमानों के बीच लेने जाने का कार्यक्रम तय करने के लिए बुधवार को वह पार्टी के सहयोगियों के साथ बैठक कर रहे हैं।
जिसमें इस पूरे अभियान को अंजाम तक पहुंचाने का खाका खींचा जाएगा। पार्टी प्रवक्ता विजय पाठक के अनुसार, राजधानी में ही कुल आबादी में मुसलमान 20 प्रतिशत हैं। पर, स्कूलों में सिर्फ 6 प्रतिशत ही बच्चे पढ़ने पहुंच रहे हैं।
कौशल विकास योजना के 20 करोड़ रुपये में महज एक फीसदी ही धन अभी तक खर्च हो पाया है। दशमोत्तर अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति का तमाम जिलों में अभी लक्ष्य तक नहीं तय हो पाया है।
सिर्फ इससे ही सपा व कांग्रेस के दिलों में मुसलमानों की तरक्की को लेकर चिंता की सच्चाई समझी जा सकती है।