सदन से सड़क तक घेराबंदी, कहां भागेंगे अखिलेश
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मानसून की पहली बरसात ने मौसम की गर्मी भले ही कम कर दी हो लेकिन सूबे में सियासी तपिश बढ़ गई है। सोमवार को इसका असर सदन से सड़क तक दिखाई पड़ सकता है।
सदन में कांठ (मुरादाबाद) की घटना और एसएसपी का बयान माहौल में गरमी पैदा कर सकता है। सड़क पर बसपा और भाजपा महिला मोर्चा के प्रदर्शनों की गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।
दरअसल, विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद मुरादाबाद के कांठ की घटना में बड़ा मोड़ आ चुका है। कांठ की आंच मुरादाबाद, मेरठ व मुजफ्फरनगर तक पहुंच चुकी है।
मुरादाबाद प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित लोग सड़कों पर हैं। सियासी दलों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
सदन में उठेगा मुद्दा
मुरादाबाद के एसएसपी धर्मवीर ने इस घटना के लिए भाजपा पर आरोप लगाकर पूरे मामले को न सिर्फ तूल बल्कि सियासी रंग भी दे दिया है। स्वाभाविक रूप से सोमवार को जब सदन की कार्यवाही शुरू होगी तो भाजपा इस मुद्दे को उठाएगी।
भाजपा न सिर्फ लोगों पर लाठीचार्ज, फायरिंग व सिर्फ एक पक्ष के लोगों पर मुकदमों को मुद्दा बनाएगी बल्कि एसएसपी के बयान को लेकर भी सरकार को घेरेगी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पहले ही कह चुके हैं कि वोट के लालच में सपा सरकार और मुरादाबाद का प्रशासन कांठ की घटना को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दे रहा है। एक वर्ग को खुश करने की नीति से यह विवाद बढ़ा।
पर, प्रशासन और सरकार ने इससे कोई सबक नहीं लिया। एसएसपी राजनीतिक बयान दे रहे हैं। भाजपा इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। अधिकारियों को अपनी हदों में रहकर ही काम करना होगा।
भाजपा-बसपा में मोर्चाबंदी
भाजपा के सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों की कड़ी में सोमवार को पार्टी के महिला मोर्चा का विधान भवन घेराव तय है। महिला मोर्चा ने यह घेराव प्रदेश में महिला उत्पीड़न की घटनाओं में बढ़ोतरी के विरुद्ध तय किया है।
उधर, बसपा ने भी सोमवार को ही विधानभवन के सामने प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित कर रखा है। बसपा ने कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर इस आंदोलन की घोषणा की है।
स्वाभाविक है कि दोनों तरफ से सरकार के खिलाफ ताकत दिखाने की होड़ रहेगी। खासतौर से बसपा हर वह कोशिश करेगी जिससे वह सपा से मोर्चा लेने का संदेश दे सके।
इसकी वजह भी है। एक तो बसपा सत्ता से हटने के बाद पहली बार ढाई साल में प्रदेश सरकार के खिलाफ संघर्ष के लिए उतर रही है।
भाजपा से बढ़त लेने का प्रयास
जैसी जानकारी है कि प्रदेश सरकार पर भाजपा के लगातार हमलावर रुख ने बसपा के रणनीतिकारों को परेशान करके रख दिया है।
उन्हें लग रहा है कि सपा से सीधे लड़ाई में बसपा भाजपा से पिछड़ती जा रही है।
ऐसे में वह सोमवार को भाजपा पर बढ़त लेने की कोशिश जरूर करेंगे। इस होड़ की गरमी आम लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।