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हर थाने में एक हल्का प्रभारी होगी महिला एसआई
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लखनऊ। कमिश्नरेट में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने केलिए बीट सिस्टम में बदलाव किया जा रहा है। बीटों की संख्या वही रहेगी लेकिन नई व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों को अधिक जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इसका ट्रायल भी कुछ थानों में किया जा रहा है। जल्द ही इसे पूरे कमिश्नरेट में लागू कर दिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि नई व्यवस्था से पुलिसिंग बेहतर होगी। पुलिस ज्यादातर लोगों के दरवाजे तक कम समय में पहुंच जाएगी। इसके लिए वेलफेयर सोसाइटी व मोहल्ला समिति को भी जोड़ा जा रहा है। ताकि सभी को संभव मदद मिल सके।
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था पीयूष मोर्डिया ने बताया, नई व्यवस्था में बीटों की संख्या व नाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हर थाने में तीन-चार बीट का एक हल्का होगा। एक हल्के की प्रभारी महिला एसआई को बनाया जाएगा। उसके साथ कम से कम दो महिला सिपाही तैनात होंगी। जो एक बीट पर काम करेंगी। हर थाने व चौकी स्तर पर पहले एक बीट सिपाही होता था लेकिन बड़े चौकी क्षेत्र में संख्या बढ़ाकर तीन से चार की जाएगी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के ट्रायल के लिए गोमतीनगर विस्तार थाने का चयन किया गया। इस थाने में बीट सिस्टम के तहत कई वेलफेयर सोसाइटी, मोहल्ला समिति व आरडब्ल्यूए को जोड़ा गया और शिकायतों की मॉनिटरिंग की गई। उसमें सुधार किया गया। पुलिस अधिकारी का दावा है कि यह नई व्यवस्था पूरे कमिश्नरेट में जल्द लागू कर दिया जाएगा।
पब्लिक-पुलिस का बनेगा सोशल मीडिया ग्रुप
कमिश्नरेट में समितियों, मोहल्ला समिति व आरडब्ल्यूए को सीधे पुलिस से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा। सभी बीट इलाके में ऐसी समितियों के पदाधिकारियों का ग्रुप बनाने की व्यवस्था की जा रही है।
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थानों से मांगी गई रिपोर्ट
संयुक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, सभी थानों से बीट सिस्टम के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। कई बीट प्रभारी कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल के ट्रांसफर हो गए जिनकी जगह पर दूसरे पुलिस कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बीट प्रभारी, एरिया में वेलफेयर सोसाइटी और मोहल्ला सीमित के साथ जुड़ेंगे और सीमित के सदस्यों के नाम, पता व मोबाइल नंबर भी रखेंगे। इसके अलावा एक वाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा जिसमें बीट प्रभारी व सीमित के लोग जुड़ेंगे।
क्या है बीट सिस्टम
- बीट प्रणाली सिस्टम में हर थाने में चौकी प्रभारी उसका इंचार्ज होता है। चौकी में तैनात हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल अपने-अपने क्षेत्र की बीट के जिम्मेदार होते हैं।
- अपने क्षेत्र के संभ्रात व्यक्तियों व उनके नंबर के अलावा अपराधियों की पूरी जानकारी रजिस्टर में दर्ज करते हैं। साथ ही उन पर निगरानी भी करते हैं।
- सुरागकसी के लिए बीट प्रभारी क्षेत्र के लोगों से संपर्क रखते हैं। उनके साथ समय-समय पर मीटिंग करने की जिम्मेदारी होती है।
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संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था पीयूष मोर्डिया ने बताया, नई व्यवस्था में बीटों की संख्या व नाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हर थाने में तीन-चार बीट का एक हल्का होगा। एक हल्के की प्रभारी महिला एसआई को बनाया जाएगा। उसके साथ कम से कम दो महिला सिपाही तैनात होंगी। जो एक बीट पर काम करेंगी। हर थाने व चौकी स्तर पर पहले एक बीट सिपाही होता था लेकिन बड़े चौकी क्षेत्र में संख्या बढ़ाकर तीन से चार की जाएगी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के ट्रायल के लिए गोमतीनगर विस्तार थाने का चयन किया गया। इस थाने में बीट सिस्टम के तहत कई वेलफेयर सोसाइटी, मोहल्ला समिति व आरडब्ल्यूए को जोड़ा गया और शिकायतों की मॉनिटरिंग की गई। उसमें सुधार किया गया। पुलिस अधिकारी का दावा है कि यह नई व्यवस्था पूरे कमिश्नरेट में जल्द लागू कर दिया जाएगा।
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पब्लिक-पुलिस का बनेगा सोशल मीडिया ग्रुप
कमिश्नरेट में समितियों, मोहल्ला समिति व आरडब्ल्यूए को सीधे पुलिस से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा। सभी बीट इलाके में ऐसी समितियों के पदाधिकारियों का ग्रुप बनाने की व्यवस्था की जा रही है।
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थानों से मांगी गई रिपोर्ट
संयुक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, सभी थानों से बीट सिस्टम के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। कई बीट प्रभारी कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल के ट्रांसफर हो गए जिनकी जगह पर दूसरे पुलिस कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बीट प्रभारी, एरिया में वेलफेयर सोसाइटी और मोहल्ला सीमित के साथ जुड़ेंगे और सीमित के सदस्यों के नाम, पता व मोबाइल नंबर भी रखेंगे। इसके अलावा एक वाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा जिसमें बीट प्रभारी व सीमित के लोग जुड़ेंगे।
क्या है बीट सिस्टम
- बीट प्रणाली सिस्टम में हर थाने में चौकी प्रभारी उसका इंचार्ज होता है। चौकी में तैनात हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल अपने-अपने क्षेत्र की बीट के जिम्मेदार होते हैं।
- अपने क्षेत्र के संभ्रात व्यक्तियों व उनके नंबर के अलावा अपराधियों की पूरी जानकारी रजिस्टर में दर्ज करते हैं। साथ ही उन पर निगरानी भी करते हैं।
- सुरागकसी के लिए बीट प्रभारी क्षेत्र के लोगों से संपर्क रखते हैं। उनके साथ समय-समय पर मीटिंग करने की जिम्मेदारी होती है।