लखनऊ। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार शाम कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में सरोज वर्मा और उनके दल की ओर से लोक संगीत का आयोजन किया गया। क्षितिज शृंखला के तहत हर माह होने वाले इस कार्यक्रम में सावन गीतों के साथ ही दादरा, बनारसी कजरी, मिर्जापुरी कजरी और शिव भजनों की प्रस्तुति कलाकारों ने दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ भातखंडे विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने किया। स्व. बागेश्वरी देवी और पद्मविभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र की शिष्या सरोज वर्मा और उनके दल के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक संगीत की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। शिव भजन की प्रस्तुति से शुरुआत करते हुए कलाकारों ने डिम डिम डमरू बजावेला हमार जोगिया... सुनाया। इसके बाद सावन गीत तुमको आने में तुमको बुलाने में, कई सावन बरस गए ओ साजना... और दादरा निम्बिया पतड्या झरी जाला हो, कईसे अंगना बहारो रे... की प्रस्तुति दी। दादरा के बोल निम्बिया पतड्या झरी जाला हो, कईसे अंगना बहारो रे..., बनारसी कजरी कवन रंग मुंगवा, कवन रंग मोतिया, कवन रंग ननदी रे तोर बिरना..., गोदाईला गोदना हो गोदाईला गोदना, गलिया आइल गोदनहारिन, गोदाईला गोदना..., मिर्जापुरी कजरी एक दिन अईहो पिया ससुराल में, सावनी बहार में ना... और धुनमुनिया कजरी हमरी सुधिया जिन विसराया यार बलमू... सुनाकर समा बांध दिया। इस दौरान हारमोनियम पर सुधीर मौर्या, बांसुरी पर राज विभूति, तबला पर सत्यम शिवम सुंदरम सिंह और ऑक्टोपैड पर कुलदीप सैनी ने संगत की।