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Lucknow News: जन्मजात विकृति की वजह से बच्चे को थी पूंछ, सर्जरी से मिली राहत
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बलरामपुर अस्पताल में हुई सर्जरी।
लखनऊ। जन्मजात विकृति की वजह से बच्चे में नजर आ रही 14 सेंटीमीटर की पूंछ को बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने सर्जरी से निकालने में सफलता हासिल की है। इस पूंछ की वजह से बच्चे को दर्द हो रहा था और उसे लिटाने और कपड़े पहनाने तक में काफी दिक्कत होती थी।
मऊ स्थित ग्राम टिक्कारवा चौराहा निवासी सुशील कुमार ने बताया कि जन्म के समय ही बच्चे की पीठ में कुछ उभार था। शुरुआत में इसे अनदेखा कर दिया गया। उम्र के साथ ही यह उभार बढ़ने लगा और डेढ़ साल में यह 14 सेंटीमीटर लंबा हो गया। स्थानीय स्तर पर दिखाने के बावजूद फायदा न होने पर वह बच्चे को बलरामपुर अस्पताल ले आए। यहां पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. अखिलेश कुमार ने बच्चे को देखा। जरूरी जांच के बाद सर्जरी करने का फैसला किया गया।
डेढ़ घंटे तक चली सर्जरी
डॉ. अखिलेश ने बताया कि बच्चे में पीठ के निचले हिस्से में विकसित छद्म पूंछ मौजूद थी। यह खिंचाव या हलचल पर दर्द पैदा करती थी। करीब डेढ़ घंटे की सर्जरी के बाद इसे निकाला गया। पूंछ का अंदरूनी हिस्सा रीढ़ में गहराई तक था, इसलिए बेहद सावधानी के साथ उसे अलग किया गया। अब बच्चा स्वस्थ है।
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ऑपरेशन करने वाली टीम
डॉ. अखिलेश कुमार, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसए मिर्जा, डॉ. एमपी सिंह, निर्मला मिश्रा, अंजना सिंह, डॉ. मनीष वर्मा (इंटर्न) और वार्ड बॉय राजू।
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मऊ स्थित ग्राम टिक्कारवा चौराहा निवासी सुशील कुमार ने बताया कि जन्म के समय ही बच्चे की पीठ में कुछ उभार था। शुरुआत में इसे अनदेखा कर दिया गया। उम्र के साथ ही यह उभार बढ़ने लगा और डेढ़ साल में यह 14 सेंटीमीटर लंबा हो गया। स्थानीय स्तर पर दिखाने के बावजूद फायदा न होने पर वह बच्चे को बलरामपुर अस्पताल ले आए। यहां पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. अखिलेश कुमार ने बच्चे को देखा। जरूरी जांच के बाद सर्जरी करने का फैसला किया गया।
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डेढ़ घंटे तक चली सर्जरी
डॉ. अखिलेश ने बताया कि बच्चे में पीठ के निचले हिस्से में विकसित छद्म पूंछ मौजूद थी। यह खिंचाव या हलचल पर दर्द पैदा करती थी। करीब डेढ़ घंटे की सर्जरी के बाद इसे निकाला गया। पूंछ का अंदरूनी हिस्सा रीढ़ में गहराई तक था, इसलिए बेहद सावधानी के साथ उसे अलग किया गया। अब बच्चा स्वस्थ है।
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ऑपरेशन करने वाली टीम
डॉ. अखिलेश कुमार, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसए मिर्जा, डॉ. एमपी सिंह, निर्मला मिश्रा, अंजना सिंह, डॉ. मनीष वर्मा (इंटर्न) और वार्ड बॉय राजू।