अयोध्या हादसा : नदी में डूबी एक किशोरी का मिला शव, दो की तलाश, बच्चे-पत्नी की मौत के सदमे में युवक ने दी जान देने की कोशिश
गुप्तारघाट के कच्चा घाट पर नदी में बहे 12 लोगों में से लापता तीन में से एक शव का शनिवार सुबह जमथरा घाट के पास मिला। शव की पहचान प्रियांशी (16) पुत्री सतीश के रूप में हुई।
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गुप्तारघाट के कच्चा घाट पर नदी में बहे 12 लोगों में से लापता तीन में से एक शव का शनिवार सुबह जमथरा घाट के पास मिला। शव की पहचान प्रियांशी (16) पुत्री सतीश के रूप में हुई। एनडीआरएफ की टीम को यह शव पानी के अंदर बालू में फंसा मिला। इसके साथ हादसे में मरने वालों की संख्या सात हो गई है। शेष दो लोगों की तलाश जारी है। जनपद पुलिस पड़ोसी जनपद गोंडा, बस्ती व अंबेडकरनगर प्रशासन की भी सहायता ले रही है।
कैंट थानाक्षेत्र के गुप्तारघाट पर सिकंदरा थानाक्षेत्र के शास्त्रीपुरम निवासी अशोक (65) पत्नी राजकुमारी (61), पुत्र ललित (40) व पंकज (25), पुत्री जूली (29) व गौरी (28) समेत शादीशुदा तीन बेटियों, पांच बच्चों व एक दामाद के साथ शुक्रवार सुबह ही अयोध्या आए थे। दर्शन-पूजन के बाद रामनगरी के नया घाट से एक स्टीमर पांच हजार में बुक करके करीब 12 किमी दूर गुप्तारघाट आए। घाट पर टहलते हुए करीब दो सौ मीटर दूर सुनसान इलाके के कच्चा घाट पर चले गए जहां पहले चार महिलाएं हाथ-पैर धोने नदी में गईं, देखते ही देखते बच्चे व पुरुष सदस्य भी पानी में आ गए।
इसी दौरान जूली का पैर फिसला और उफनाई सरयू की तेज धारा में बहने लगी, बचाने आई चार महिलाएं भी धारा में समाने लगीं। अफरातफरी में मासूम धैर्या (6) समेत एक-एक कर 12 लोग बह गए। अशोक समेत उनका दामाद सतीश (40) व उसका पुत्र नमन (12) बाहर निकले और शोर मचाना शुरू किया। दौड़कर गुप्तारघाट आकर मदद मांगी तो तत्काल नाविक व गोताखोर मौके पर पहुंचे और पुलिस व प्रशासन को खबर दी गई।
हादसे की सूचना पर आईजी डॉ. संजीव गुप्त, डीएम अनुज झा, एसएसपी शैलेश पांडेय, एसपी सिटी विजयपाल सिंह समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने स्वयं स्टीमर पर सवार होकर लापता लोगों की तलाश की। तत्काल रेस्क्यू टीम ने आरती पत्नी सतीश (35) और गौरी पुत्री अशोक (28) को नदी से जिंदा निकाला जबकि मासूम धैर्या जमथरा कच्चाघाट पर लहरों के थपेड़ों के बीच बचकर किनारे मिली।
इसके कुछ देर बाद आठ किमी दूर बाटी बाबा के आश्रम के पास नदी से अशोक के दो पुत्र ललित (40) व पंकज (25) समेत दामाद देवेंद्र की पुत्री श्रुति (20) का शव मिला, बाद में अशोक की पत्नी राजकुमारी (61), पुत्री सीता उर्फ दामिनी (35) व उसकी पुत्री दृष्टि (4) का शव मिला था जबकि प्रियांशी, जूली व सार्थक लापता हो गए थे।
वहीं, हादसे के कुछ ही घंटों के अंदर लखनऊ व बहराइच से एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम अपने संसाधनों के साथ अयोध्या पहुंची और रेस्क्यू प्रारंभ किया। यह रेस्क्यू रात 12 बजे तक चला, इसके बाद शनिवार भोर से ही रेस्क्यू शुरू किया गया। इस दौरान सुबह करीब 10 बजे एनडीआरएफ की टीम ने जमथरा घाट के पास से प्रियांशी (16) का शव बरामद किया। शव पानी के अंदर बालू में फंसा हुआ था। एसपी सिटी विजयपाल सिंह ने बताया कि लापता जूली (39) व सार्थक (16) की तलाश में रेस्क्यू किया जा रहा है। मिले शव का पोस्टमार्टम कराकर उनके परिवारीजनों को सौंप दिया गया है।
पत्नी व बेटी खो देने के गम में सैनेटाइजर पीकर जान देने की कोशिश
परिवारीजनों का आरोप, शव ले जाने के लिए पुलिस ने नहीं उपलब्ध कराई एंबुलेंस
शनिवार की शाम करीब पांच बजे तक सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। आगरा निवासी सचिन ने बताया कि उन्होंने मौजूद पुलिसकर्मियों से अपने परिवारीजनों के शव ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरी में महंगे किराए पर एंबुलेंस लेकर शव को लेकर जा रहे हैं। कुछ लोग अभी यहां रुके हुए हैं। वहीं, कल जिंदा बचाई गई दो महिला, एक बच्ची व तीन पुरुष अपने साथ लाई गई गाड़ी से वापस आगरा को रवाना हो गए।
एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के सौ जवान लगे रेस्क्यू में
थाना कैंट अंतर्गत गुप्तारघाट के कच्चा घाट पर नदी में लापता चार लोगों की तलाश में एनडीआरएफ के 60 व एसडीआरएफ के 40 जवान लगातार रेस्क्यू कर रहे हैं। उनके साथ जल पुलिस व 30वीं वाहिनी पीएसी के बाढ़ राहत दल के जवान भी अपना सहयोग दे रहे हैं।
एनडीआरएफ लखनऊ के डिप्टी कमांडेंट नीरज कुमार ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे हादसे की सूचना मिली। इसके 10 मिनट बाद 3.40 बजे रवाना हो गए। करीब साढ़े पांच बजे गुप्तारघाट पहुंच गए और तत्काल रेस्क्यू शुरू किया। इसके बाद बहराइच से भी एक टीम यहां पहुंची। बताया कि नदी का बहाव बहुत तेज है।, इसके चलते घटना के कुछ ही देर बाद कुछ शव घटनास्थल से करीब आठ किमी दूर मिले। शनिवार को एक लड़की प्रियांशी का शव बाटी बाबा के आश्रम के पास से मिला। अभी भी तीन लोग लापता हैं। बताया कि नदी का बहाव चुनौती बना हुआ है, फिर भी एक लाइन बनाकर नदी के करीब दो किमी चौड़ाई के साथ अयोध्या से आगे कई किमी तक सर्च कर रहे हैं। संभावना है कि लापता लोग बहाव के चलते काफी दूर चले गए हों। बताया कि देर रात तक सर्च किया गया, कुछ घंटे बाद भोर में फिर ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
जल पुलिस ने नाविकों की मदद से कुछ ही देर में दो को बचाया था जिंदा
सरयू तट पर स्नान के दौरान डूबकर होने वाले मौत को रोकने में अब जल पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। घाटों व नदी क्षेत्र में लगातार गश्त करने से जल क्षेत्र में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। शुक्रवार को हुए हादसे में ग़ुप्तारघाट पर तैनात जल पुलिस की बोट व उसमें तैनात तीन जवान, स्थानीय नाविकों व स्टीमर के साथ सबसे पहले मदद को पहुंचे। इन्हीं के प्रयास से कुछ ही देर में दो महिलाओं को जिंदा व छह मृतकों के शव बरामद किए गए थे।
सरयू में डूबकर होने वाली मौतों को रोकने के लिए 17 जून 2019 को तत्कालीन एसएसपी आशीष तिवारी ने अयोध्या सरयू घाट पर जल पुलिस चौकी की स्थापना की थी। वर्तमान में इसमें प्रभारी मुख्य आरक्षी बीके साहनी समेत 10 आरक्षी तैनात हैँ। इसके अलावा गोंडा की 30वीं वाहिनी पीएसी की बाढ़ राहत दल के करीब 20 जवान भी तैनात किए गए हैं। संसाधन के नाम पर इनके पास चार बोट, लाइफ जैकेट, थ्रो बॉल, रिंग व लाइफब्वाय रिंग मौजूद हैं। इन चार बोट में दो नदी में व दो अतिरिक्त के रूप में रहती हैं। दो बोटों में एक अयोध्या सरयू तट पर 6 जवानों के साथ, एक गुप्तारघाट फैजाबाद पर तीन जवानों के साथ तैनात रहती हैं। जल पुलिस के जवान घाटों पर डूबने से लोगों को बचाने के लिए दिनभर सीटियां बजाकर लोगों को गहरे पानी से जाने से रोकते हैं। जल पुलिस के प्रभारी बीके साहनी ने बताया कि चौबीस घंटे शिफ्टवार नदी में गश्त कर निगरानी रखी जाती है। किसी को डूबने की सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू किया जाता है। सबसे पहले बोट जहां व्यक्ति डूबा होता है, वहां बहाव की दिशा में आठ से दस मीटर की दूरी में ले जाया जाता है, डूब रहे लोगों को लाइफब्वॉय रिंग व थ्रो बॉल की मदद से बचाया जाता है। जरूरत पड़ने पर नदी में छलांग भी लगाई जाती है।
हादसे के बाद से लगातार टीम कर रही रेस्क्यू
शुक्रवार को गुप्तारघाट के कच्चा घाट पर 12 लोगों के डूबने की सूचना के बाद से जल पुलिस चारों बोट के साथ लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई है। साहनी ने बताया कि हादसे की सूचना पर गुप्तारघाट पर तैनात हमारी बोट व उसमें तैनात जवानों ने सबसे पहले पहुंचकर स्थानीय नाविकों की मदद से घटना के कुछ ही समय के अंदर दो महिलाओं को जिंदा बचा लिया। साथ ही छह लोगों के शव निकाले। उफनाई नदी व तेज बहाव के चलते विशेषकर रात में नदी में लापता लोगों को ढूंढने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। टीम के लोगों ने करीब 20 घंटे तक बिना कुछ खाए पिए रेस्क्यू जारी रखा। देर रात कुछ घंटे रेस्ट के बाद शनिवार भोर से फिर से राहत कार्य किया जा रहा है। बताया कि हादसे में घाट पर यात्रियों को घुमाने वाली बोट व नाविक के साथ स्थानीय गोताखोर बहुत मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि बचाव के दौरान काम में आने वाले कुछ महत्वपूर्ण संसाधन हमारे पास नहीं है, इसकी मांग अधिकारियों से की गई है।