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ऑटोमोबाइल सेक्टर: इलेक्ट्रिक और सेल्फ ड्राइविंग कारों का प्रदेश में बढ़ा कारोबार, पर्यावरण संरक्षण को महत्व

Sun, 12 Jan 2025 12:56 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 12 Jan 2025 12:56 PM IST
सार

Automobile Sector: ऑटोमोबाइल उद्योग अब केवल वाहनों के निर्माण तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह पर्यावरण, स्मार्ट तकनीक सस्टेनेबिलिटी से जुड़े विषयों पर भी काम कर रहा है।

 

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Automobile Sector: Business of electric and self-driving cars increased in the state, importance given to envi
इलेक्ट्रिक कार का बाजार बढ़ रह है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ऑटोमोबाइल उद्योग एक ऐसा क्षेत्र है, जो समय के साथ अपने स्वरूप में लगातार बदलाव करता रहा है। यह उद्योग अब केवल वाहनों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप्स के बढ़ते प्रभाव ने इसे एक नई दिशा दी है। आज ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री केवल यातायात के साधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, स्मार्ट तकनीक, और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े बड़े सवालों का समाधान भी प्रस्तुत कर रही है।

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नवाचार और तकनीकी बदलाव

पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), स्वचालित (सेल्फ- ड्राइविंग) कारों, और कनेक्टेड वाहनों ने इस उद्योग को नई पहचान दी है। नवाचार और नई तकनीकों का योगदान इस बदलाव में सबसे अहम है। स्टार्टअप्स ने ऐसी तकनीकें विकसित की हैं, जो वाहनों को ज्यादा स्मार्ट, सुरक्षित और किफायती बना रही हैं।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के उपयोग से अब ऐसे वाहन बनाए जा रहे हैं, जो ट्रैफिक, मौसम और सड़क की स्थिति के अनुसार खुद को अनुकूलित कर सकते हैं। ये तकनीकें न केवल वाहन मालिकों को बेहतर अनुभव प्रदान करती हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को भी कम करती हैं। साथ ही, एडवांस बैटरी टेक्नोलॉजी और फास्ट चार्जिंग सॉल्यूशंस ने इलेक्ट्रिक वाहनों को और अधिक व्यवहारिक और उपयोग में आसान बना दिया है। इससे ग्रीन मोबिलिटी का सपना साकार होता दिख रहा है।

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ग्रीन मोबिलिटी और पर्यावरण संरक्षण

ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ते प्रदूषण के कारण इस उद्योग ने ग्रीन मोबिलिटी को प्राथमिकता दी है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन के साथ-साथ, ऐसी तकनीकों का विकास किया जा रहा है, जो वाहनों के उत्पादन और उपयोग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम कर सके। सौर ऊर्जा और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित चार्जिंग स्टेशनों का विकास भी इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, हाइब्रिड वाहनों और स्वचालित परिवहन प्रणालियों ने यह सुनिश्चित किया है कि ईंधन की खपत और उत्सर्जन को संतुलित किया जा सके। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में भी पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। 

रोजगार और स्टार्टअप्स का योगदान

स्टार्टअप्स ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। पारंपरिक इंजीनियरिंग नौकरियों के अलावा, अब डिजाइन, डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं बढ़ी हैं।

उपभोक्ता-केंद्रित समाधान

वाहन अब मनोरंजन, सुरक्षा, और कनेक्टिविटी का मिश्रण बन चुके हैं। स्मार्टफोन ऐप्स के माध्यम से वाहन को नियंत्रित करना, ट्रैफिक अपडेट्स प्राप्त करना, और स्वचालित पार्किंग जैसे फीचर्स अब आम होते जा रहे हैं। इसके अलावा, वाहन शेयरिंग और किराए पर वाहन उपलब्ध कराने वाली सेवाओं ने भी लोगों की जिंदगी को सरल बनाया है।

ईवी के अनुकूल सरकार की नीतियां

सरकार सब्सिडी, कर लाभ और बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से ईवी अपनाने को प्रोत्साहित कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ईवी को अपनाने से न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि 2070 तक भारत के जीरो एमिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में सुचारू विकास को सुविधाजनक बनाने और 2030 तक 30 प्रतिशत निजी कारों, 70 प्रतिशत वाणिज्यिक कारों, 40 प्रतिशत बसों और 80 प्रतिशत दो और तीन पहिया वाहनों की बिक्री में ईवी की पैठ बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है।

एफएएमई भारत योजना की शुरुआत

ऑटो विशेषज्ञ राहुल किशोर के अनुसार, भारत में फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने और व्हीकल से होने वाले एमिशन को कम करने के लिए हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनकी मैनूफैक्चरिंग की योजना (एफएएमई भारत) वर्ष 2015 में शुरू की गई थी। योजना के दूसरे चरण को 1 अप्रैल, 2019 से लागू किया गया। इससे देश में ईवी की मांग पैदा करने की कोशिश की गई है। ऑटोमोटिव क्षेत्र के उत्पादन से जुड़ी पीएलआई योजना 25,938 करोड़ रुपये के बजट के साथ सितंबर 2021 में शुरू की गई।

ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के उपाय

केंद्रीय बजट 2023-24 ने इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के लिए लिथियम आयन सेल के निर्माण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं और मशीनरी के आयात पर सीमा शुल्क छूट बढ़ा दी है। साथ ही जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जर/चार्जिंग स्टेशनों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। ईवी परमिट साइट प्लान पर ईवी चार्जर का स्थान दिखाता है। कमर्शियल और प्राइवेट दोनों प्रकार के बैटरी से चलने वाले व्हीकल को सरकार ने ग्रीन लाइसेंस प्लेट दी है। उन्हें परमिट रिक्वायरमेंट से छूट दी गई है।

रोड टैक्स में छूट

ईवी पर रोड टैक्स में भी छूट दी गई है, जो बदले में ईवी की शुरुआती लागत को कम करने में मदद करती है। देश भर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वीइकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और मजबूती देने के लिए पावर मिनिस्ट्री ने संशोधित और समेकित दिशानिर्देश और मानक जारी किए हैं। दिशानिर्देशों में निजी खिलाड़ियों को ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए शामिल किया गया है। इस दिशा में तेल विपणन कंपनियों ने देश भर के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजमागों पर 22,000 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की घोषणा की है।
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