{"_id":"66fdec1f91379267d60ee546","slug":"allegation-of-deploying-tainted-employees-in-hrf-lucknow-news-c-13-1-lko1029-899344-2024-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: एचआरएफ में दागी कर्मचारी तैनात करने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: एचआरएफ में दागी कर्मचारी तैनात करने का आरोप
विज्ञापन
लखनऊ। केजीएमयू में सस्ती दवाओं के काउंटर पर दागी कर्मचारियों को तैनाती देने का आरोप लगाया गया है। ये कर्मचारी हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) की दवाएं बाहर बेचने के आरोप में हिरासत में लिए गए थे। इसे लेकर एक प्रोफेसर ने शिकायत की है। अपने पत्र में उन्होंने एचआरएफ काउंटर की दवाओं में से कुछ बाजार से महंगी दर पर उपलब्ध होने की बात भी कही है।
केजीएमयू ने वर्ष 2016 से पीजीआई की तर्ज पर एचआरएफ के माध्यम से सस्ती दवाएं देना शुरू किया। शुरुआत में पीजीआई के रेट कॉन्ट्रेक्ट पर कंपनी को ठेका दिया गया। दावा है कि इन काउंटरों पर दवाएं 60 फीसदी तक कम कीमत पर हैं। यहां तैनात कर्मचारियों ने इसका फायदा उठाते हुए महंगी दवाएं मरीजों के नाम से निकालकर खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया। एसटीएफ ने इसका भंडाफोड़ किया था। इसके बाद कई कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई थीं। हालांकि, एक बार फिर से उन्हीं कर्मचारियों को तैनाती दी जा रही है।
10,500 में मिल रही 1150 रुपये वाली दवा
प्रोफेसर ने पत्र में कहा कि लेनेवाटिनिब 4 एमजी नाम के 10 टैबलेट के पत्ते की 10,500 रुपये की एमआरपी वाली दवाई एचआरएफ में रखी गई है। बाजार में सभी नामी कंपनियों की यही दवाई अधिकतम 1150 रुपये में उपलब्ध है। इस तरह की कुछ अन्य दवाएं बाजार के मुकाबले महंगी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
कोई दोषी कर्मचारी एचआरएफ पर तैनात नहीं
एचआरएफ की दवाओं में सेंधमारी पर रोक लगा दी गई है। इसी वजह से कुछ लोग अनाप-शनाप शिकायत कर रहे हैं। काउंटर पर दागी कर्मचारी तैनात नहीं हैं। जिन महंगी दवाओं की बात कही जा रही है, वे पुराने रेट कांट्रेक्ट के आधार पर हैं और पिछले दो साल से उनकी खरीद नहीं की गई है। इसके स्थान पर लोकल पर्चेज के माध्यम से ये दवाएं खरीदी जा रही हैं।
डॉ. सुमित रुंगटा, डिप्टी एमएस, केजीएमयू
विज्ञापन
केजीएमयू ने वर्ष 2016 से पीजीआई की तर्ज पर एचआरएफ के माध्यम से सस्ती दवाएं देना शुरू किया। शुरुआत में पीजीआई के रेट कॉन्ट्रेक्ट पर कंपनी को ठेका दिया गया। दावा है कि इन काउंटरों पर दवाएं 60 फीसदी तक कम कीमत पर हैं। यहां तैनात कर्मचारियों ने इसका फायदा उठाते हुए महंगी दवाएं मरीजों के नाम से निकालकर खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया। एसटीएफ ने इसका भंडाफोड़ किया था। इसके बाद कई कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई थीं। हालांकि, एक बार फिर से उन्हीं कर्मचारियों को तैनाती दी जा रही है।
विज्ञापन
10,500 में मिल रही 1150 रुपये वाली दवा
प्रोफेसर ने पत्र में कहा कि लेनेवाटिनिब 4 एमजी नाम के 10 टैबलेट के पत्ते की 10,500 रुपये की एमआरपी वाली दवाई एचआरएफ में रखी गई है। बाजार में सभी नामी कंपनियों की यही दवाई अधिकतम 1150 रुपये में उपलब्ध है। इस तरह की कुछ अन्य दवाएं बाजार के मुकाबले महंगी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
कोई दोषी कर्मचारी एचआरएफ पर तैनात नहीं
एचआरएफ की दवाओं में सेंधमारी पर रोक लगा दी गई है। इसी वजह से कुछ लोग अनाप-शनाप शिकायत कर रहे हैं। काउंटर पर दागी कर्मचारी तैनात नहीं हैं। जिन महंगी दवाओं की बात कही जा रही है, वे पुराने रेट कांट्रेक्ट के आधार पर हैं और पिछले दो साल से उनकी खरीद नहीं की गई है। इसके स्थान पर लोकल पर्चेज के माध्यम से ये दवाएं खरीदी जा रही हैं।
डॉ. सुमित रुंगटा, डिप्टी एमएस, केजीएमयू