भाजपा में नैतिकता होती तो राज्यसभा चुनाव में नौंवा प्रत्याशी न उतारती: अखिलेश यादव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा विधायक दल की बैठक में बुधवार को राज्यसभा चुनाव की रणनीति बनाई गई। इस बैठक में पार्टी के 47 में से 40 विधायक ही पहुंचे। इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधानमंडल दल के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा में नैतिकता होती तो वह नौवां प्रत्याशी न उतारती।
सपा के प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक में अखिलेश के निशाने पर भाजपा रही। उन्होंने कहा कि भाजपा मनमानी पर उतारू है। पिछले एक साल में भाजपा सरकार ने जनहित में कोई काम नहीं किया है, सिर्फ जनता को धोखा दिया है। एक तरफ सरकार का यह दावा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी, वहीं किसानों की आत्महत्या एवं उनका उत्पीड़न रुक नहीं रहा है। चालू वर्ष में ही महोबा में कर्ज में डूबे 27 किसानों ने जान दे दी।
26,500 नौजवानों ने की आत्महत्या
अखिलेश ने कहा कि बेरोजगार नौजवान अवसाद में आत्महत्या कर रहे हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि 2014 से 2018 के बीच 26,500 बेरोजगार नौजवान आत्महत्या कर चुके हैं। भाजपा सरकारों के पास तो नौजवानों की बेकारी दूर करने का रोडमैप तक नहीं है।
ईवीएम पर जनता का विश्वास नहीं
अखिलेश ने फिर दोहराया कि ईवीएम पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है। इसलिए बैलेट पेपर से मतदान होना चाहिए। ईवीएम में चुनावों के दौरान गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रही हैं। गोरखपुर के उपचुनाव में तो 127 ईवीएम में खराबी मिली। तीन-तीन घंटा मतदान रुका रहा। अगर बैलेट से चुनाव होता तो भाजपा और ज्यादा वोट से हारती।
गोरखपुर, फूलपुर की हार जनाक्रोश का नतीजा
सपा अध्यक्ष ने कहा, राज्य की कानून-व्यवस्था चौपट है। रोजाना हत्या, लूट, अपहरण और बलात्कार की घटनाएं होती हैं। बच्चियों तक से दुष्कर्म की वारदातें शर्मनाक हैं। इससे जनता में भारी आक्रोश है। इसका परिणाम गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में भाजपा को पराजय के रूप में मिला है।