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पुलिसिंग के सुधार के लिए आईआईएम इंदौर से समझौता, ‘ऐसी बिल्डिंग विदेशों में भी देखने को नहीं मिलेगी’
Wed, 22 Jan 2020 10:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 22 Jan 2020 10:31 AM IST
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यूपी डीजीपी ओपी सिंह
- फोटो : amar ujala
प्रदेश में पुलिसिंग में सुधार के लिए आईआईएम इंदौर के साथ समझौता किया गया है। डीजीपी ओम प्रकाश सिंह और आईआईएम इंदौर के निदेशक हिमांशु राय ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पांच वर्षों के लिए किया गया है। इस दौरान आईआईएम के फैकल्टी यूपी के पुलिस अधिकारियों को पुलिसिंग के गुर सिखाएंगे।
इस मौके पर डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि हमें बदलाव के लिए काम करने की जरूरत है। आबादी के लिहाज से यूपी को दुनिया का पांचवा देश कह सकते हैं। 22 करोड़ आबादी वाले इस प्रदेश में तीन लाख पुलिस बल, 1500 थाने हैं। प्रबंधन को बेहतर करने के लिए आईआईएम इंदौर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से करार हो रहा है। इससे निश्चित रूप से आने वाले समय में बदलाव दिखेगा और पुलिसिंग और प्रोफशनल तरीके से हो सकेगी।
हिमांशु राय ने कहा कि बाकी सभी सेवाओं में लगता है कि कठिन काम है, बड़ा कष्ट होता है। लेकिन सबसे अधिक तनाव पुलिस में होता है। सभी सेवाओं में काम करने वालों को जब त्यौहारों पर छुट्टियां मिलती है तब पुलिस कर्मी अपना परिवार और त्यौहार छोड़कर अपनी सेवाएं दे रहा होता है। जितनी दुर्घटनाएं पुलिस में होती हैं उतनी किसी और विभाग या सेवा में नहीं होती।
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प्रदेश में पुलिस के मुकाबले जनता के पास पांच गुना अधिक हथियार
हिमांशु ने कहा कि यूपी पुलिस अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। यूपी में प्राइवेट लोगों वह पुलिस के मुकाबले पांच गुना अधिक हथियार हैं। पुलिस के पास लगभग ढाई लाख हथियार हैं जबकि आम लोगों के पास 11 लाख से अधिक लाइसेंसी हथियार हैं। यहां अवैध असलहों को कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसे कैसे काबू में किया जाए इस पर भी काम करने की जरूरत है।
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इस मौके पर डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि हमें बदलाव के लिए काम करने की जरूरत है। आबादी के लिहाज से यूपी को दुनिया का पांचवा देश कह सकते हैं। 22 करोड़ आबादी वाले इस प्रदेश में तीन लाख पुलिस बल, 1500 थाने हैं। प्रबंधन को बेहतर करने के लिए आईआईएम इंदौर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से करार हो रहा है। इससे निश्चित रूप से आने वाले समय में बदलाव दिखेगा और पुलिसिंग और प्रोफशनल तरीके से हो सकेगी।
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हिमांशु राय ने कहा कि बाकी सभी सेवाओं में लगता है कि कठिन काम है, बड़ा कष्ट होता है। लेकिन सबसे अधिक तनाव पुलिस में होता है। सभी सेवाओं में काम करने वालों को जब त्यौहारों पर छुट्टियां मिलती है तब पुलिस कर्मी अपना परिवार और त्यौहार छोड़कर अपनी सेवाएं दे रहा होता है। जितनी दुर्घटनाएं पुलिस में होती हैं उतनी किसी और विभाग या सेवा में नहीं होती।
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प्रदेश में पुलिस के मुकाबले जनता के पास पांच गुना अधिक हथियार
हिमांशु ने कहा कि यूपी पुलिस अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। यूपी में प्राइवेट लोगों वह पुलिस के मुकाबले पांच गुना अधिक हथियार हैं। पुलिस के पास लगभग ढाई लाख हथियार हैं जबकि आम लोगों के पास 11 लाख से अधिक लाइसेंसी हथियार हैं। यहां अवैध असलहों को कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसे कैसे काबू में किया जाए इस पर भी काम करने की जरूरत है।
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‘ऐसी बिल्डिंग विदेशों में भी देखने को नहीं मिलेगी’
हिमांशु ने कहा कि यूपी पुलिस के पास जो बिल्डिंग है वैसी बिल्डिंग विदेशों में भी नहीं मिलेगी। हमें पुलिसिंग में भी विश्वस्तरीय बनना है। बीट सिस्टम को और बेहतर कैसे बनाया जा सके उस पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास तकनीक है, वीडियो का विश्लेषण किया जाता है, कई सारे टूल हैं जिनका प्रयोग पुलिस के लिए सहायक साबित होगी। भीड़ मैनेजमेंट, पेट्रोलिंग और बीट मैनेजमेंट कैसे किया जाए, इन सब पर हम पुलिस की मदद करेंगे।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बातचीत जरूरी
हिमांशु ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हमें बात-चीत के रास्ते को हमेशा खुला रखना होगा। कैसे निगोशिएट (मोल-भाव) करना चाहिए, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इन सब पर आने वाले दिनों में काम होगा। हमेशा फोर्स के जरिए या वेट एंड वाच पॉलिसी काम नहीं करती। इसके लिए मोलभाव सबसे बेहतर रास्ता होता है।
यूपी 112 के एडीजी असीम अरुण ने कहा कि नागरिकों को बेहतर सेवा के लिए विश्वविद्यालयों व अकादमिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेंगे तो बेहतर नतीजे हासिल होंगे। आने वाले समय में पुलिस मैनेजमेंट के गुर सीखेगी।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बातचीत जरूरी
हिमांशु ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हमें बात-चीत के रास्ते को हमेशा खुला रखना होगा। कैसे निगोशिएट (मोल-भाव) करना चाहिए, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इन सब पर आने वाले दिनों में काम होगा। हमेशा फोर्स के जरिए या वेट एंड वाच पॉलिसी काम नहीं करती। इसके लिए मोलभाव सबसे बेहतर रास्ता होता है।
यूपी 112 के एडीजी असीम अरुण ने कहा कि नागरिकों को बेहतर सेवा के लिए विश्वविद्यालयों व अकादमिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेंगे तो बेहतर नतीजे हासिल होंगे। आने वाले समय में पुलिस मैनेजमेंट के गुर सीखेगी।