Sitapur Murder: अनुराग को किसी प्रोफेशनल किलर ने गोली मारी, अजीत की पत्नी कैसे अनजान? अनसुलझे हैं आठ सवाल
Sitapur Murder News: जिस अजीत पर छह हत्या का आरोप है वह हृदयरोग से पीड़ित है। उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी। ऐसे में अकेले एक हृदयरोगी इतनी जघन्य वारदात कैसे अंजाम दे सकता है? ऐसे कई सवाल अभी अनसुलझे रह गए हैं।
विस्तार
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में हुए दिल दहलाने वाले सामूहिक हत्याकांड में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। अब तक की जांच में कई खुलासे हुए लेकिन कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। इस हत्याकांड में सबसे बड़ा सवाल अब ये उठ रहा है कि जिस अजीत पर छह हत्या का आरोप है वह हृदयरोग से पीड़ित है। उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी। ऐसे में अकेले एक हृदयरोगी इतनी जघन्य वारदात कैसे अंजाम दे सकता है? अजीत खुद को लंबे समय से अपमानित महसूस कर रहा था तो क्या अपनी पत्नी विभा को इस हत्याकांड की भनक नहीं लगने दी? ऐसे कई सवाल अभी अनसुलझे हैं।
रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र में पल्हापुर गांव में बीते शनिवार तड़के हुए सामूहिक हत्याकांड का गुरुवार को आईजी रेंज तरुण गाबा ने खुलासा कर दिया। आईजी तरुण गाबा ने बताया कि पल्हापुर गांव निवासी अजीत सिंह ने अपने भाई अनुराग (45), प्रियंका (40) व उनके तीन बच्चों अर्ना (12), आश्वी (10) और आद्विक (5) और अपनी मां सावित्री की नृशंस हत्या कर दी थी।
अजीत ने अनुराग को ही सबकी हत्याओं का दोषी बताया था। इसके बाद अनुराग द्वारा आत्महत्या करने की कहानी गढ़ दी थी। प्राथमिक जांच में पुलिस भी उसके बयान को सच मान बैठी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच की दिशा बदल दी। इसके बाद अजीत सिंह से सख्ती से पूछताछ शुरू हुई। जिसमें उसने हत्या की बात कबूल कर ली।
उसने बताया कि संपत्ति विवाद के चलते भाई अनुराग से मनमुटाव तो था ही लेकिन जब अनुराग ने पिता का कर्ज चुकाने से मना कर दिया तो वह गुस्से से आगबबूला हो गया और ये साजिश रच डाली। पुलिस ने मौके से हत्या में प्रयोग किया गया अवैध असलहा, आठ जिंदा कारतूस, 5 खोखे और एक हथौड़ा बरामद किया है। वहीं, अजीत सिंह पर हत्या व आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। मामले के खुलासे के लिए सीतापुर लाने से पहले सीएचसी महमूदाबाद में अजीत का मेडिकल कराया गया।
अनसुलझे रह गए ये आठ सवाल
1. अजीत हृदयरोग से पीड़ित है। उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी। ऐसे में अकेले एक हृदयरोगी इतनी जघन्य वारदात कैसे अंजाम दे सकता है?
2. अजीत खुद को लंबे समय से अपमानित महसूस कर रहा था तो क्या अपनी पत्नी विभा को इस हत्याकांड की भनक नहीं लगने दी?
3. अजीत के पिता वीरेंद्र सिंह के साथ ताऊ आरपी सिंह ने प्रॉपर्टी में धोखा किया था। अजीत की उनसे कोई अदावत कैसे नहीं थी, जबकि यह हत्याकांड प्रॉपर्टी और लोन की रकम के कारण हुआ।
4. जिस ढंग से अनुराग को गोली मारी गई, यह किसी प्रोफेशनल किलर का तरीका लगता है। एक शिक्षक इस तरीके से गोली कैसे चला सकता है।
5. पुलिस की थ्योरी के मुताबिक आला कत्ल अवैध तमंचा पिता वीरेंद्र सिंह का था। ऐसे में अजीत कारतूस कहां से लाया, इस दिशा में कोई जांच नहीं हुई।
6. कुल केसीसी लोन की रकम 24 लाख बताई जा रही है। ऐसे में पिता की मौत के बाद अजीत पर मात्र एक तिहाई ऋण अदा करने का दबाव होता। अगर अनुराग या मां सावित्री यह रकम नहीं जमा करते तो इसमें अजीत का क्या नुकसान होता। बैंक तो सावित्री और अनुराग से शेष रकम की वसूली करता।
7. जब यह साबित हो गया कि अजीत ने मेडिकल स्टोर संचालक से नशीली दवा खरीदी तो बिना किसी पर्चे के दवा बेचने के आरोप में उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
8. अजीत की पत्नी विभा घटना से ठीक पहले अपने बच्चों को मायके छोड़ आई थी। क्या उसे भनक लग गई थी कि कुछ बड़ा कांड होने वाला है?
जिस एसएचओ के बयान से किरकिरी, उसने खिंचवाई फोटो
रामपुर मथुरा के पल्हापुर हत्याकांड में एसएचओ महेश चंद्र पांडेय ने एसपी चक्रेश मिश्र को गलत ढंग से ब्रीफ किया था। इसी वजह से सीतापुर पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी। जब बृहस्पतिवार को आईजी रेंज तरुण गाबा मामले के खुलासे के लिए प्रेस वार्ता करने पहुंचे तो एसएचओ महेश चंद्र पांडेय ने सबसे पहले आरोपी अजीत व अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाई। पल्हापुर गांव में भी एसएचओ की लापरवाही चर्चा में रही।
पुलिस टीम का दावा- खंगाली सीडीआर मौके पर एक्टिव नहीं मिला बाहरी नंबर
सीतापुर। पल्हापुर हत्याकांड में पुलिस ने अजीत से कई बिंदुओं पर लगातार पूछताछ की। उसने पुलिस को बहुत गुमराह भी किया। एसपी चक्रेश मिश्र ने बताया कि फोरेंसिक और सर्विलांस टीम ने घर के अंदर मिले साक्ष्यों को परखा। घर के अंदर किसी बाहरी की आमद का साक्ष्य नहीं मिला। इससे यह साबित हुआ कि घटना अकेले अजीत सिंह ने की। इसके साथ सीडीआर खंगाली गई। इससे पता चला कि घटना के समय अजीत सिंह की पत्नी, साला, ससुर, बहन, बहनोई, ताई के दोनों लड़के व अन्य प्रमुख रिश्तेदार अपने-अपने घरों पर मौजूद थे। घटना में उनकी संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला। मौके पर भी ऐसा कोई बाहरी मोबाइल नंबर एक्टिव नहीं पाया गया, जो संदिग्ध हो। वहीं, केसीसी का लोन भी बाकी था। पुलिस टीमों ने क्राइम सीन का दोहराव भी किया। इसका मिलान अजीत सिंह के बयानों से किया गया। अजीत के बयान प्रथम दृष्टया सही पाये गए। उन्होंने बताया कि साक्ष्य संकलन के दौरान विभिन्न व्यक्तियों के खून का सैंपल, डीएनए, फिंगर प्रिंट, आला कत्ल अवैध तमंचा और हथौड़ा का परीक्षण किया गया। इसकी विस्तृत रिपोर्ट को आगे विवेचना में शामिल किया जाएगा।
इनकी रही अहम भूमिका
एसपी चक्रेश मिश्र ने बताया कि इस घटना के अनावरण में एसओजी प्रभारी सत्येन्द्र विक्रम सिंह, उपनिरीक्षक प्रदीप दुबे, राजबहादुर के साथ एसटीएफ निरीक्षक दिलीप तिवारी, उपनिरीक्षक विनोद सिंह, फोरेंसिक टीम के उपनिरीक्षक राकेश कुमार मय टीम शामिल रहे। वहीं, रामपुर मथुरा के एसएचओ महेश चंद्र पांडेय की ब्रीफिंग ने इस केस में सीतापुर पुलिस की खूब किरकिरी कराई।