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Lucknow News: डॉक्टरों की मनमानी और सिस्टम की सुस्ती में फंसा सस्ता इलाज, फाइलों में कैद सॉफ्टवेयर आधारित आपीडी

Mon, 12 Jan 2026 02:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:36 AM IST
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Affordable treatment is hampered by the arbitrariness of doctors and the slowness of the system, and software-based OPDs are confined to files.
केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का दावा फिलहाल कागजों तक ही सीमित है। संस्थान के हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) में अधिकांश दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद कई डॉक्टर कमीशन के खेल में मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। इस मनमानी को रोकने के लिए प्रस्तावित सॉफ्टवेयर आधारित ओपीडी योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
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पूर्व कुलपति के कार्यकाल में डॉक्टरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए ऑनलाइन ओपीडी का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस सिस्टम के तहत डॉक्टरों को कंप्यूटर पर ही डिजिटल परचा (ई-प्रिस्क्रिप्शन) तैयार करना था। सॉफ्टवेयर में केवल उन्हीं दवाओं का विकल्प होता जो एचआरएफ स्टोर में उपलब्ध हैं। इससे डॉक्टरों को स्टॉक की रियल-टाइम जानकारी रहती और वे बाहर की दवाएं नहीं लिख पाते।
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मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा गठजोड़
केजीएमयू प्रशासन ने दवाओं के प्रिसक्रिप्शन ऑडिट की शुरुआत भी की थी, ताकि फार्मा कंपनियों और डॉक्टरों के गठजोड़ का पर्दाफाश हो सके। हालांकि, ऑडिट का नतीजा अब तक शून्य रहा है। स्थिति यह है कि कई डॉक्टर खुलेआम बाहर की दवाएं लिख रहे हैं और मरीजों को चुनिंदा मेडिकल स्टोर का नाम भी बता रहे हैं।
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खत्म हो सकती थीं लंबी लाइनें

सॉफ्टवेयर आधारित ओपीडी का एक बड़ा फायदा मरीजों को समय की बचत के रूप में मिलता। परचा ऑनलाइन होने से मरीज के एचआरएफ काउंटर पर पहुंचने से पहले ही दवाएं और बिल तैयार करना आसान होता, जिससे घंटों लंबी लगने वाली लाइनों से मुक्ति मिल सकती थी।




Iसॉफ्टवेयर आधारित ओपीडी संचालन में व्यावहारिक दिक्कतें हैं। ओपीडी में काफी भीड़ होती है, इसलिए सभी दवाएं कंप्यूटर पर लिखने में काफी समय लगेगा। एचआरएफ से सभी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए केजीएमयू प्रशासन जल्द ही सख्त कदम उठाएगा। I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयूI
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