अमेठी-रायबरेली में प्रचार नहीं करेंगी प्रियंका, कांग्रेस प्रत्याशी बेचैन
कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका वाड्रा के रुख ने रायबरेली और अमेठी में पार्टी के प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। प्रियंका का प्रस्तावित दौरा रद्द होने के बाद कांग्रेस के उम्मीदवारों की धुकधुकी बढ़ गई है।
सिर्फ कांग्रेस प्रत्याशी ही नहीं, बल्कि दूसरी पार्टियों के नेता और दोनों क्षेत्रों के मतदाता भी इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि इस बार प्रियंका आएंगी या नहीं। फिलहाल अभी उनके रायबरेली-अमेठी में प्रचार के लिए आने को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
गठबंधन की बंदिशों के चलते प्रियंका रायबरेली-अमेठी आने से परहेज कर रही हैं, जबकि स्थानीय कांग्रेसी नेता व पार्टी के प्रत्याशी हाईकमान पर उन्हें प्रचार मैदान में उतारने के लिए दबाव बनाने में जुटे हैं।
हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी का रायबरेली और अमेठी का दौरा तय है, लेकिन प्रत्याशियों को लग रहा है कि बगैर प्रियंका की मद्द के रायबरेली और अमेठी को फतह करने का मिशन कामयाब होने वाला नहीं है।
गठबंधन में रही है प्रियंका की भूमिका
इस बार विधानसभा चुनाव में प्रियंका वाड्रा के रायबरेली-अमेठी से दूरी बनाए रखने की चर्चाओं ने कांग्रेस उम्मीदवारों के माथे पर पसीना ला दिया है। चूंकि सपा के साथ कांग्रेस के चुनावी गठबंधन को परवान चढ़ाने में प्रियंका की ही अहम भूमिका रही है, इसलिए वह सपा उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने से बचना चाह रही हैं।
रायबरेली-अमेठी की चार सीटों पर सपा-कांग्रेस उम्मीदवार आमने-सामने हैं, इसलिए वह आने से कतरा रही हैं। हालांकि पहले वह रायबरेली-अमेठी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ इनडोर मीटिंग करने के लिए राजी हो गई थीं, लेकिन प्रत्याशियों की तरफ से जनसभाओं का दबाव पड़ा तो उन्होंने कदम पीछे खींच लिए।
उनके इस रुख के बाद कांग्रेस के उम्मीदवार एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं कि किसी तरह प्रियंका का एक दौरा हो जाए। भले ही वह कार्यकर्ताओं के साथ सिर्फ इनडोर मीटिंग ही करें।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार रायबरेली-अमेठी के कार्यकर्ता व प्रत्याशी सोनिया गांधी के प्रतिनिधि के.एल. शर्मा के जरिये कांग्रेस आलाकमान तक यह संदेश भिजवाकर प्रियंका पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन ने असमंजस में डाला
प्रियंका अभी तक हर चुनाव में अपनी मां सोनिया गांधी व भाई राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली व अमेठी आती रही हैं।
मां और भाई के सियासी गढ़ को महफूज रखने के लिए प्रियंका हर चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं, लेकिन इस बार सपा के गठबंधन के चलते वह असमंजस में हैं।
हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका का बहुत ज्यादा जादू नहीं चला था। उन्होंने जमकर प्रचार किया था, लेकिन कांग्रेस को महज दो ही सीटें मिली थीं।
प्रियंका 2019 के चुनाव में कांग्रेस का ट्रंप कार्ड हो सकती हैं, इस लिहाज से विधानसभा चुनाव में उनकी छवि को धक्का न पहुंचे, इसलिए भी कांग्रेस आलाकमान उन्हें चुनाव मैदान में उतारने को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
10 सीटों पर लगातार ले रही हैं फीडबैक
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक भले ही प्रियंका अभी रायबरेली-अमेठी न आ रही हों, लेकिन वह दोनों ही संसदीय क्षेत्रों में अपने भरोसेमंद लोगों और प्रशांत किशोर की टीम के जरिये सभी 10 सीटों के बारे में लगातार फीडबैक ले रही हैं। उन सीटों पर खास नजर है, जहां सपा-कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
सूत्रों का कहना है कि रायबरेली और अमेठी में चौथे और पांचवें चरण में 23 और 27 फरवरी को चुनाव होना है, इसलिए चुनाव का रुख भांपने के बाद वह मैदान में उतरने के बारे में अंतिम फैसला करेंगी। फिलहाल अभी उनके आने के कोई संकेत नहीं हैं।
सोनिया व राहुल का दौरा तय
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी का रायबरेली-अमेठी दौरा तय हो गया है, लेकिन कांग्रेसियों की नजरें प्रियंका पर टिकी हैं। सोनिया 20 फरवरी को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली, जबकि राहुल 18 फरवरी को रायबरेली और 24 फरवरी को अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में जनसभा करेंगे।