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Barabanki: दरोगा पर डकैती का मुकदमा फिर भी करा लिया प्रमोशन, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
Fri, 28 Feb 2025 02:10 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकी
अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकी
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 28 Feb 2025 02:10 PM IST
सार
दरोगा के खिलाफ 1999 में कानपुर में मुकदमा दर्ज हुआ था। 2016 में वो इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। आईजी के निर्देश पर सीओ सदर ने जांच की।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
डकैती के आरोपी दरोगा ने अपने ही विभाग और अधिकारियों को गुमराह कर इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन पा लिया। मौजूदा समय में बाराबंकी के जिला अपराध कंट्रोल ब्यूरो के प्रभारी पद पर तैनात है। लेकिन आठ साल बाद हकीकत सामने आ गई। एसपी के निर्देश पर शहर कोतवाली में इंस्पेक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इससे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है।
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1999 में कानपुर के कर्नलगंज थाने में दरोगा अंगद प्रताप सिंह के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस केस में दो अक्तूबर 2002 में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आरोप पत्र भी दाखिल किया गया लेकिन प्रमोशन के लिए 2015-16 में अंगद प्रताप ने फतेहपुर जिले में तैनाती के दौरान विभाग को झूठा घोषणा पत्र दिया कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं है। इसी आधार पर उन्हें दरोगा से इंस्पेक्टर बना दिया गया।
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आईजी स्थापना ने 22 अगस्त 2024 में इस मामले की जांच के आदेश दिए। एसपी के निर्देश पर सीओ सदर हर्षित चौहान की जांच में यह सामने आया कि अंगद प्रताप सिंह ने झूठी जानकारी देकर प्रमोशन लिया। इस रिपोर्ट के आधार पर एसपी कार्यालय की प्रधान लिपिक मीना भाटिया ने बृहस्पतिवार शाम शहर कोतवाली में तहरीर दी। कोतवाल आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की जांच इंस्पेक्टर केके यादव को सौंपी गई है।
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मुकदमे के बाद अब विभागीय कार्रवाई भी
दरोगा से इंस्पेक्टर बनने वाले अंगद प्रताप सिंह पर अब विभागीय कार्रवाई का खतरा भी मंडरा रहा है। डकैती के आरोपी को प्रमोशन कैसे मिला, यह सिस्टम पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। फिलहाल, इंस्पेक्टर के फर्जीवाड़े की जांच इंस्पेक्टर को मिली है।