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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Balrampur News ›   A report from Gonda, Balrampur, Bahraich and Shravasti

यूपी का रण : जिसके कील-कांटे दुरुस्त... उसका रास्ता साफ

Fri, 07 Jan 2022 03:05 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 07 Jan 2022 03:05 PM IST
सार

चुनावी बिसात बिछ चुकी है। दांव पर सब कुछ है। कद भी...। प्रतिष्ठा भी...। सबका इम्तिहान है। जब बिसात बिछी हो, तो मोहरों से ज्यादा उनकी चालें अहमियत रखती हैं। एक गलत चाल... सारा खेल खत्म। बहरहाल, सियासतदां संभल-संभलकर अपनी चालें चल रहे हैं। तो मतदाता भी चौसर के हर खाने    पर पैनी नजर गड़ाए बैठा है। 

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A report from Gonda, Balrampur, Bahraich and Shravasti
वोट डालने के लिए लाइन में लगे मतदाता (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

चार में से तीन जिलों में मुसलमानों की आबादी 38 फीसदी के करीब, इनका वोट होगा निर्णायक

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अवध के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती जिले में विधानसभा की 20 सीटें हैं। 2017 के चुनाव में इनमें से 18 सीटें भाजपा, एक-एक सपा और बसपा ने जीती थीं। ठीक चुनाव के पहले की तस्वीर यह है कि बहराइच जिले से नानपारा की भाजपा विधायक माधुरी वर्मा और श्रावस्ती के भिनगा से बसपा विधायक मोहम्मद असलम राईनी साइकिल पर सवार हो गए हैं। गोंडा के भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के पिता और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे आनंद सिंह ने भाजपा के गौरा विधायक प्रभात वर्मा के खिलाफ ताल ठोकने का एलान कर दिया है। तो भाजपा के ही कैसरगंज सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने आनंद सिंह को खुली चुनौती देकर जिले का सियासी पारा गरमा दिया है। 

बढ़ती सियासी किलेबंदी के बीच मतदाता मुखर है। एक तरफ केंद्र की मोदी व राज्य की योगी सरकार के मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि व श्रमिकों के भत्ते का गुणगान है। ...तो दूसरी ओर ज्यादातर सीटों पर सत्ताधारी विधायकों के खिलाफ लोगों का गुस्सा भी उतना ही स्पष्ट और उभरकर नजर आता है। महंगाई, बेरोजगारी के साथ छुट्टा जानवरों से फसलों की बर्बादी बड़ा मुद्दा है। वहीं, योजनाओं से सरकार की छवि गरीब हितैषी होने की गढ़कर और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की झांकी दिखाकर ध्रुवीकरण की जमीन भी तेजी से तैयार हो रही है। अवध के चार में से तीन जिलों में मुस्लिम आबादी 31 से 38 फीसदी के बीच है। इनमें से ज्यादातर सीटों पर भाजपा और सपा की सीधी लड़ाई नजर आने लगी है। कुछेक सीटों पर बसपा या एआईएमआईएम का भी जोर है। ऐसी सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बन सकता है। 
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बहराइच : हर सीट के अपने समीकरण, अपना गुणा-भाग
जिले में विधानसभा की सात सीटें हैं। 2017 के चुनाव में इनमें से छह सीटें- बहराइच, महसी, नानपारा, बलहा, पयागपुर और कैसरगंज भाजपा ने जीती थीं। मटेरा सीट सपा के हिस्से आई थी। पर, नानपारा की विधायक माधुरी वर्मा ने सपा में घर वापसी कर यहां से भाजपा के लिए नए चेहरे का रास्ता खोल चुकी हैं। सहकारिता मंत्री और कैसरगंज के विधायक मुकुट बिहारी वर्मा अब 75 साल वाली कतार में पहुंच चुके हैं। ऐसे में भाजपा की रीति-नीति के हिसाब से उनकी सीट पर भी नया चेहरा तय माना जा रहा है। 
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मुद्दों पर लोग मुखर, पर... प्रत्याशियों का चेहरा डालेगा बड़ा असर
जिले में जरवलरोड होते हुए कैसरगंज क्षेत्र के मुस्तफाबाद-चुरईपुरवा, महसी के बड़नापुर व उत्तम नगर, मटेरा के मैगला मोड़ नेवादा, बहराइच सदर के रहवा व डिगिहा तिराहा, पयागपुर और विशेश्वरगंज तक के भ्रमण में पांच बातें खुलकर सामने आईं। पहला, प्रत्याशी की घोषणा से पहले कैसरगंज सीट को छोड़कर अन्य सभी पर फिलहाल भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई नजर आ रही है। कैसरगंज में सपा का संभावित प्रत्याशी बाहरी व बसपा का उसी समाज का स्थानीय होने से लड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है। दूसरा, मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि और श्रमिकों को एक-एक हजार रुपये की दो किस्तों के भुगतान के दांव का भाजपा को फायदा मिलता दिख रहा है। 

तीसरा, छुट्टा जानवरों से हो रही समस्या, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे सपा को ताकत दे रहे हैं। चौथा, विधायकों की जनता के बीच उपस्थिति व व्यवहार पहली बार सबसे बड़े मुद्दे के रूप में सामने आया है। भाजपा के कई विधायकों से उसके प्रतिबद्ध मतदाताओं में भी नाराजगी के स्वर सुनाई दे रहे हैं। लोग यह भी कहना नहीं भूलते कि पार्टी के जीते छह में से चार क्षेत्रों में चेहरे न बदले तो इस बार विधायकों की संख्या आधे से कम पर सिमट सकती हैं। बहरहाल, महसी क्षेत्र के बड़नापुर में मिले अमृतलाल व शिवपूजन जैसे मतदाता भी हैं जो कहते हैं, इस चुनाव में भाजपा से बबूल कै ठूठ पाई तो भी जीत जाई। लेकिन, सही प्रत्याशी न आया तो दूसरी पार्टी मैदान मार ले जाएगी। पांचवां, जिले में 37.6 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इससे ज्यादातर सीटों पर मतदान की तारीख आते-आते मामला हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण में तब्दील हो जाता है। 

बलरामपुर : ध्रुवीकरण से भाजपा-सपा के बीच लड़ाई

बलरामपुर जिले में चार विधानसभा सीटें हैं। सभी भाजपा के कब्जे में हैं। लेकिन, पूर्व सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान पिछली बार कांग्रेस से लड़ीं और नंबर दो पर थीं, वह अब सपा में आ गई हैं। पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी योगी सरकार के भू-माफिया विरोधी अभियान  के लपेटे में जेल जाकर बाहर आ चुके हैं। इससे पूरे जिले में सत्ताविरोधी वोट की एकजुटता बढ़ी है। बलरामपुर में 37.51 फीसदी मुस्लिम आबादी है और नेपाल का सीमावर्ती जिला है। प्रत्याशी आने से पहले यहां हर सीट पर ध्रुवीकरण और भाजपा-सपा के बीच सीधी लड़ाई नजर आ रही है। उतरौला के बनघुसरा में मिले फर्नीचर के दुकानदार विजय राम कहते हैं, क्षेत्र में काम हुए हैं। सड़कें बनी हैं। बिजली आ रही है। सरकार की योजनाएं भी गरीबों को प्रभावित कर रही हैं। लेकिन, योजनाओं का भरपूर लाभ पाने वाले तमाम लोग जहां वोट देते थे, वहीं देंगे। अशोक श्रीवास्तव कहते हैं कि अन्य कामों के साथ कानून-व्यवस्था पर अच्छा काम हुआ है। पर, महंगाई का भी असर है। कई सीटों पर बसपा भी मुकाबले में रहेगी, जो समीकरण तय करेगी। 

कद्दावर नेताओं का असर भी दिखा रहा रंग
तुलसीपुर के रमईडीह चौराहे पर मीहीलाल, संचित राम व सौरभ पांडेय मिल गए। मीहीलाल कहते हैं कि राशन, पेंशन व किसान निधि के साथ श्रम कार्ड लाकर सरकार ने बहुत अच्छा किया। सौरभ कहते हैं कि यहां लोग आमतौर पर सपा-भाजपा व कुछ व्यक्ति विशेष नेताओं को देखते हैं। मसलन, पूर्व सांसद रिजवान, पूर्व विधायक मो. उमर व पूर्व मंत्री शिव प्रताप यादव चुनाव लड़ें या न लडे़ं, जीतें या हारें, चुनाव में ये सब फर्क जरूर डालते हैं। इसी तरह कैसरगंज के सांसद बृजभूषण की भूमिका अहम है। बलरामपुर में पलटूराम विधायक व मंत्री उन्हीं की वजह से बने, हर कोई जानता है। जिला पंचायत अध्यक्ष उनकी रणनीति से ही बनी। इसलिए सांसद की भी भूमिका अहम ेरहेगी। गैंसड़ी, उतरौला, तुलसीपुर हर जगह त्रिकोणीय लड़ाई हो सकती है।

श्रावस्ती : प्रत्याशी पर टिका दारोमदार, कई जगह बदलाव चाहते हैं वोटर

श्रावस्ती जिले में विधानसभा की दो सीटें हैं। श्रावस्ती बस स्टॉप के पास साथियों के साथ मिले शिवम मिश्रा कहते हैं, 2017 में श्रावस्ती सीट भाजपा बमुश्किल 445 मतों के अंतर से जीत पाई थी। वहीं, भिनगा सीट बसपा ने 6,090 मतों के अंतर से जीती थी। इस चुनाव से पहले बसपा विधायक सपा में चले गए और उनके दूसरे क्षेत्र से टिकट मांगने की चर्चा है। इससे समीकरण भी नया स्वरूप लेता नजर आ रहा है। वह कहते हैं, मोदी-योगी के काम से आम लोग खुश तो हैं, लेकिन भाजपा युवा और अच्छे छवि का प्रत्याशी न लाई तो सीट हाथ से निकल जाएगी। नरौली भट्टा नहसुतिया के पास मिले सतीश सिंह कहते हैं, मुद्दे से ज्यादा सपा और भाजपा के प्रत्याशी नतीजे तय करेंगे। अभी दोनों ही जगह दावेदारों पर फैसला बाकी है। वह यह भी जोड़ते हैं कि दोनों सीटों पर ध्रुवीकरण की तस्वीर भी बनने लगी है। ऐसे में दोनों सीटों पर सपा-भाजपा में सीधी लड़ाई हो सकती है।

गोंडा : विधायकों से नाराजगी पर लोग मुखर

गोंडा की सभी सात सीटों पर भाजपा का कब्जा है। जिले की सियासत पिछले कई वर्षों से भाजपा के कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह और सपा नेता व पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह के बीच केंद्रित थी। पिछले वर्ष कोविड काल में पंडित सिंह की मृत्यु के बाद सियासी समीकरण बृजभूषण पर केंद्रित हो गया है। मंडल के जिला पंचायत सदस्य से जिला पंचायत अध्यक्ष तक के चुनाव में उन्होंने अपनी धमक दिखाई है। गोंडा सदर से तरबगंज, मनकापुर, गौरा, मेहनौन, कटराबाजार और कर्नलगंज तक के भ्रमण में हर सीट पर भाजपा के समानांतर बृजभूषण की रणनीति नजर आई। हर सीट पर उनसे जुड़े लोगों की दावेदारी नजर आई, जो कई मौजूदा विधायकों की नींद उड़ाए हुए है। अयोध्या से सटे इस जिले में राशन-नकदी के साथ राम मंदिर निर्माण से लेकर वाराणसी के विश्वनाथ धाम के पुनर्निर्माण तक की कहानी लोग सुनाते हैं। पर, लोग यह भी कहना नहीं भूलते कि सिर्फ चुनाव में जनता के बीच जाने वाले विधायकों के टिकट न कटे, क्षेत्र न बदले और सामाजिक समीकरण साधने में पार्टी चूकी तो इस बार सपा की कई सीटें पक्की हैं। इन तर्कों में इसलिए भी दम दिखाई पड़ता है, क्योंकि सात में से तीन विधायकों के खिलाफ खुली नाराजगी जताते भाजपा समर्थक हमें कई चौराहों पर ही मिल गए।

मतदाताओं के दिल की बातें
-    गोंडा के मनकापुर क्षेत्र अंतर्गत नवाबगंज के पास बालागंज के पास खेत में गन्ना काटते कई किसान मिल गए। कमला देवी, मोहिनी, रीता, राकेश साहू कहते हैं, छुट्टा जानवर खेती बर्बाद कर दे रहे हैं। तीन बीघे खेत की तारबंदी पर 10 हजार खर्च हुआ है। सरकार न जाने कहां गौशाला खोल रही है! छुट्टा जानवर पकड़ रही है! मेहनौन के परौतीलाल बाजार में रंजीत वर्मा, राम नाथ मौर्या, तुलसीराम मौर्या, विनोद कुमार, शिवराज मौर्या, लहरी व मनोज वर्मा अलाव पर सियासी चर्चा करते मिल गए। यहां सपा और भाजपा के दावेदारों की चर्चा छेड़ने पर विनोद बताते हैं कि वोट तो मोदी-योगी के नाम पर ही जाएगा, लेकिन फला टिकट पाएंगे तभी भाजपा जीतेगी। 
-   गौरा में पूर्व मंत्री राजा आनंद सिंह ने मौजूदा विधायक के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। मसकनवा में मिले अर्जुन यादव कहते हैं, राजा सपा से आए तो लड़ाई कड़ी हो जाएगी। लोग महंगाई, बेरोजगारी व जातिवाद से परेशान हैं। इसी क्षेत्र के मछमरवा में मिले राधेश्याम कहते हैं कि सड़कें खूब बनी हैं। आवास, शौचालय, सम्मान निधि लोग पा रहे हैं। पेंशन बढ़ी है। गरीब-पिछड़े पूरी ताकत से मोदी के साथ हैं।
-    करनैलगंज में मिले विपिन दुबे और संदीप यादव कहते हैं, यहां तो लल्ला भइया व योगेश भइया के परिवार में मुकाबला रहता आया है। इस बार दोनों पार्टियों में और भी दावेदार हैं। प्रत्याशी फाइनल हो तो समीकरण साफ हो। विपिन यह भी बताते हैं कि जिले में कुछ विधायक इधर से उधर किए जाएं तो भी बात बन सकती है।
-    बलरामपुर चौराहे पर दिव्यांशु सिंह व उत्सव सिंह मिल गए। दिव्यांशु कहते हैं, सरकारी नौकरी मिल नहीं रही है। सब कुछ ठीक होने के बावजूद युवा सरकार के साथ नहीं है। हालांकि, उनके पास ही खड़े सरकारी कर्मचारी उनके चाचा कहते हैं, युवा नाराज जरूर हैं लेकिन जब वे समग्रता में बात करते हैं तो साथ नजर आते हैं। 
-    कैसरगंज क्षेत्र अंतर्गत मुस्तफाबाद चुरईपुरवा पहुंचे तो यहां मनोज वर्मा कौशल किशोर, पंकज कुमार, राजू व चंद्रसेन मिल गए। मनोज कहते हैं कि बड़े लोगन का मंत्री-विधायक देत हैं और छोटेन का सरकार। यह सरकार हर तरह से मददगार है। लड़ाई भाजपा, सपा व बसपा के बीच में होगी। इसी तरह मटेरा के नवादा में अंबरीष कुमार शुक्ला एडवोकेट कहते हैं, लोग योजनाओं से खुश हैं। वोट में इन सबका असर दिखेगा।
-    कनपुरवा चौराहा पर मिले राजन शुक्ला कहते हैं, लड़के डिग्री-डिप्लोमा लिए परेशान हैं। बेरोजगारी बड़ी समस्या है। जब भर्ती निकालते हैं, कोई न कोई त्रुटि आ ही जाती है। युवा सपा के साथ नजर आ रहा है। महसी के उत्तम नगर में मिले शैलेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं, कम पढ़े-लिखे तबके में राशन-रुपये का असर है, पढ़े-लिखे लोग महंगाई, बेरोजगारी भी देख रहे हैं। मटेरा के मैगला मोड़ (नेवादा) पर प्रदीप सिंह, कृष्ण बहादुर, रामकुमार साहू, रामजस साहू व श्रीराम से मुलाकात हुई। प्रदीप कहते हैं, पिछली बार सिर्फ 1595 वोट से जीत-हार हुई थी। इसलिए मुकाबला इस बार भी जोरदार रहने के आसार हैं।
-    बहराइच के रहवा में मिले अनिल कहते हैं कि सरकार चना, नमक, चीनी, तेल, रुपये सब दे रही है। इसका काफी अच्छा असर दिख रहा है। बसपा के भी ज्यादातर वोटर भाजपा के साथ जा रहे हैं। जग प्रसाद कहते हैं, लड़ाई भाजपा-सपा में ही होगी।
-    पयागपुर क्षेत्र के रानीपुर तिलक में मिले उदयराज वर्मा कहते हैं, फलां दावेदार को भाजपा ने टिकट दिया तो सीट फिर निकल जाएगी। सतीश चंद्र पांडेय व वासुदेव विश्वकर्मा कहते हैं कि कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है। बिजली अच्छी मिल रही है। गरीब की मदद हो रही है। लेकिन, सपा के जिस दावेदार के टिकट मिलने की उम्मीद ज्यादा है, वह व्यक्तिगत व्यवहार के चलते भारी है। बलहा में रवींद्र प्रताप कहते हैं कि यह सीट सपा गठबंधन में दे सकती है। ऐसा हुआ तो भाजपा फिर बीस पड़ सकती है। महसी के मोगलहा में आकिब खां, अब्दुल हकीम, दिनेश मिले। आकिब कहते हैं, यहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। 

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