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Lucknow News: फ्लैट, प्लॉट के नाम पर 55 लाख रुपये ठगे
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लखनऊ। दो रियल एस्टेट फर्म के मालिकों ने फ्लैट व प्लॉट के नाम पर दो लोगों से 55 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ितों ने एफआईआर दर्ज कराई है। बिहार के मुंगेर निवासी कारोबारी चांद शेखर ने बताया कि वर्ष 2014 में उनकी मुलाकात नई दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी अजीत कुमार मिश्रा व पंकज पांडेय से हुई। दोनों ने बताया कि वे एमएस इनवेस्ट रियल एस्टेट ग्रोथ फर्म से जुड़े हैं। उनकी सुशांत गोल्फ सिटी ब्लॉक-2 में ग्रैंड वन परियोजना चल रही है। इसमें निवेश करने पर मुनाफे में फ्लैट मिलेगा।
चांद ने 29 नवंबर 2014 से तीन अगस्त 2015 के बीच 30 लाख रुपये निवेश कर दिए। आरोप है कि दस वर्ष बाद भी न तो परियोजना शुरू हुई और न ही फ्लैट मिला। जांच में पता चला कि परियोजना फर्जी थी। चांद ने सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस से शिकायत की। इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के मुताबिक जांच चल रही है।
गाजियाबाद के सेक्टर-2 ए निवासी दिव्या गुप्ता के मुताबिक वर्ष 2022 में वह लखनऊ आई थीं। यहां विभूतिखंड स्थित वसुंधरा ग्रुप के कार्यालय में मैनेजर लवकुश दुबे से उनकी मुलाकात हुई। उसने नए प्रोजेक्ट ऑर्किड वैली की जानकारी देते हुए प्लॉट बुक कराने की बात कही। दिव्या ने 25 लाख रुपये का प्लॉट बुक कराते हुए रकम कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दी। वर्ष 2023 में कंपनी के एमडी सुधीर सिंह ने दिव्या के नाम रजिस्ट्री कर दी। कुछ दिन बाद उन्हें पता चला कि जिस परियोजना के तहत उन्हें प्लॉट बेचा गया है, वह असल में है ही नहीं। पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने डीसीपी पूर्वी से शिकायत की। इंस्पेक्टर विभूतिखंड अमर सिंह के मुताबिक डीसीपी के आदेश पर एमडी और मैनेजर पर केस दर्ज विवेचना की जा रही है।
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चांद ने 29 नवंबर 2014 से तीन अगस्त 2015 के बीच 30 लाख रुपये निवेश कर दिए। आरोप है कि दस वर्ष बाद भी न तो परियोजना शुरू हुई और न ही फ्लैट मिला। जांच में पता चला कि परियोजना फर्जी थी। चांद ने सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस से शिकायत की। इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के मुताबिक जांच चल रही है।
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गाजियाबाद के सेक्टर-2 ए निवासी दिव्या गुप्ता के मुताबिक वर्ष 2022 में वह लखनऊ आई थीं। यहां विभूतिखंड स्थित वसुंधरा ग्रुप के कार्यालय में मैनेजर लवकुश दुबे से उनकी मुलाकात हुई। उसने नए प्रोजेक्ट ऑर्किड वैली की जानकारी देते हुए प्लॉट बुक कराने की बात कही। दिव्या ने 25 लाख रुपये का प्लॉट बुक कराते हुए रकम कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दी। वर्ष 2023 में कंपनी के एमडी सुधीर सिंह ने दिव्या के नाम रजिस्ट्री कर दी। कुछ दिन बाद उन्हें पता चला कि जिस परियोजना के तहत उन्हें प्लॉट बेचा गया है, वह असल में है ही नहीं। पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने डीसीपी पूर्वी से शिकायत की। इंस्पेक्टर विभूतिखंड अमर सिंह के मुताबिक डीसीपी के आदेश पर एमडी और मैनेजर पर केस दर्ज विवेचना की जा रही है।
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