चार दिनों तक मौत से लड़ने के बाद 43 की 'घर वापसी'
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दतली में जहरीली शराब पीने से बीमार हुए 43 लोग शुक्रवार को अस्पताल से वापस अपने घर पहुंचे तो परिवारीजनों की जान में जान आई।
पिछले कई दिनों से जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहे इन लोगों की आंखों में दहशत भी साफ दिखाई दी। परिवारीजनों और बच्चों से लिपटकर दोबारा कभी शराब न पीने की कसमें भी खाई गईं।
दतली में जहरीली शराब पीने के बाद से लगातार मिल रहीं मौतों की सूचना से सहमे ग्रामीणों के लिए शुक्रवार का दिन थोड़ा राहत भरा रहा जब 43 लोग अस्पताल से ठीक होकर वापस घर पहुंचे।
दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे सबसे पहले बलरामपुर अस्पताल की एंबुलेंस 18 लोगों को लेकर दतली पहुंची। सूचना पाकर परिवारीजन भी एंबुलेंस की ओर दौड़ पड़े। करीब आधा घंटे बाद ही डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल की एंबुलेंस चार अन्य लोगों को लेकर पहुंची। बाकी लोग बाद में पहुंचाए गए।
बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराए गए खड़ता गांव के सुकरू (25) जब गांव पहुंचे तो बोले, भइया हमरे तीन बच्चा हैं अउर हम बच्चन की कसम खाइत हन कि अब कबहूं दारू न पीबे।
छोटे भाई की भी शराब पीने से हुई थी मौत
इसी गांव के 50 वर्षीय राजेन्दर ने बताया कि शराब पीने से उनके छोटे भाई दीनदयाल की मौत हो चुकी है और उन्हें भी मौत से जूझकर वापस जिंदगी मिली है, इसलिए अब शराब को जिंदगी से हमेशा के लिए निकाल दिया है।
अस्पताल से ठीक होकर घर वापसी करने वाले अन्य लोगों में सर्वेश, सियाराम, प्यारेलाल, रामसागर, मोहम्मद, अशर्फीलाल, जगदीश, रामभरोसे, रामखेलावन, मतैयाखेड़ा निवासी हरीशचंद्र, खड़ता निवासी कैलाश, रामकिशोर, मुन्नीलाल, सर्वेश, भैयालाल, राजेंद्र शामिल हैं।
इसके अलावा लोहिया अस्पताल में इलाज कराकर लौटे जयकरण, दीवारीलाल, रामनाथ और मातीलाल ने भी कहा कि अब वे शराब को फिर कभी भी हाथ नहीं लगाएंगे। जहरीली शराब पीने से बीमार पड़े रामनाथ की जान तो बच गई लेकिन उसकी आंखों की रोशनी चली गई।
अटौरा के सर्वेश और दतली के रामसागर ने कहा कि उन्हें यह दूसरा जीवन मिला है, मौत को इतनी करीब से देखने के बाद अब शराब की तरफ देखना भी नहीं चाहते। परिवार से मिलकर सभी की आंखें छलक आईं।
परिवारीजनों से छिपकर पी थी शराब
सिविल अस्पताल में भर्ती मलिहाबाद के खड़ता के शैलेंद्र (20) को डॉक्टरों ने शुक्रवार को डिस्चार्ज किया तो उसके चेहरे पर खुशी बिखर गई। पर अगले ही पल वो मायूस दिखा। शैलेंद्र ने बताया कि जहरीली शराब ने उसका परिवार उजाड़ दिया। सभी ने छिपकर शराब पी और जब जान पर बनी तो अस्पताल पहुंचे।
दादा मेवालाल (60), ताऊ मंगल (45) और चाचा सिद्देश्वर (34) और शैलेंद्र ने क्रिकेट मैच के बाद जगनू की दुकान से कच्ची शराब पी पर किसी को एक -दूसरे के बारे में भनक नहीं लगी। रात में हालत बिगड़ी तो कोई कुछ समझ नहीं पाया।
शैलेंद्र ने बताया कि ताऊ मंगल और चाचा सिद्देश्वर अपनी जान गंवा बैठे। रुंधे गले से शैलेंद्र बताता है कि मंगल के बेटे सोनू (25), मोनू (20) और टोटृ (10) के सिर से पिता का साया उठ गया। इलाज के दौरान चाचा सिद्देश्वर की मौत से आठ साल की बेटी सुधांशी व छह साल के बेटे शुभम के सिर से शराब ने पिता का प्यार छीन लिया। शैलेंद्र ने प्रण लिया कि दोबारा शराब को हाथ नहीं लगाएगा।
इसी तरह सिविल अस्पताल से शुक्रवार को 15 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। डिस्चार्ज होने वालों में अटौरा के राकेश (38), सुरेश (42), मटियारीखेड़ा के मनोज (48), चंद्रदेव (46) रामकुमार (44) और आशीष (34) हैं। इसी तरह बलरामपुर अस्पताल में 38 में से 32 मरीजों, लोहिया अस्पताल में भर्ती आठ मरीजों में से 6 को डिस्चार्ज कर दिया गया।
कहां कितने मरीज
ट्रॉमा वेंटिलेटर--04
डिजास्ट वार्ड--11
सिविल--15
बलरामपुर--06
लोहिया--02
कुल--38