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Lucknow News: हर घंटे सड़क हादसों में 20 मौतें, हेलमेट और सीट बेल्ट से बच सकती है जान
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ट्रॉमा सेंटर।
लखनऊ। सड़क हादसों में होने वाली मौतों को हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा का पालन कर काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके बावजूद लापरवाही के चलते हर साल हजारों लोग जान गंवा रहे हैं। सड़क हादसों में सबसे ज्यादा युवा प्रभावित हो रहे हैं। ये जानकारी केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने विश्व ट्रॉमा दिवस पर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा की।
डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 1,77,175 लोगों की मौत हुई, जबकि 4,71,441 लोग घायल हुए। यानी हर घंटे करीब 20 लोगों की जान सड़क हादसों में गई। वर्ष 2023 के मुकाबले दुर्घटनाओं में 1.5 प्रतिशत और मौतों में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। करीब 70 प्रतिशत हादसों, घायलों और मौतों के मामलों में तेज रफ्तार की भूमिका रही।
युवा और दोपहिया सवार सबसे ज्यादा जोखिम में
आंकड़ों के अनुसार, सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 66.1 प्रतिशत लोग 18 से 45 वर्ष और 83.3 प्रतिशत लोग 18 से 60 वर्ष की आयु के थे। मृतकों में 46.2 प्रतिशत दोपहिया सवार और 20.6 प्रतिशत पैदल यात्री थे। वर्ष 2023 में हेलमेट नहीं पहनने के कारण 54,568 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 15,408 लोग दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठे थे। ऐसे में चालक के साथ पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट पहनना जरूरी है।
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यूपी में सबसे ज्यादा मौतें
वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 24,118 लोगों की मौत हुई, जो देश में सर्वाधिक थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी से बचकर हादसों का जोखिम कम किया जा सकता है।
घायल की मदद के लिए 112 या 108 पर करें फोन
ट्रॉमा सेंटर के एमएस डॉ. अमिय अग्रवाल ने बताया कि हादसे के बाद घायल की मदद करने से पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें और 112 या 108 पर फोन करें। खून बहने पर साफ कपड़े से दबाव डालें और घायल की गर्दन या पीठ को अनावश्यक न मोड़ें। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायलों को कैशलेस उपचार योजना के तहत सात दिन तक डेढ़ लाख रुपये तक इलाज की सुविधा मिल सकती है। घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार के लिए 25 हजार रुपये पुरस्कार का भी प्रावधान है।
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डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 1,77,175 लोगों की मौत हुई, जबकि 4,71,441 लोग घायल हुए। यानी हर घंटे करीब 20 लोगों की जान सड़क हादसों में गई। वर्ष 2023 के मुकाबले दुर्घटनाओं में 1.5 प्रतिशत और मौतों में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। करीब 70 प्रतिशत हादसों, घायलों और मौतों के मामलों में तेज रफ्तार की भूमिका रही।
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युवा और दोपहिया सवार सबसे ज्यादा जोखिम में
आंकड़ों के अनुसार, सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 66.1 प्रतिशत लोग 18 से 45 वर्ष और 83.3 प्रतिशत लोग 18 से 60 वर्ष की आयु के थे। मृतकों में 46.2 प्रतिशत दोपहिया सवार और 20.6 प्रतिशत पैदल यात्री थे। वर्ष 2023 में हेलमेट नहीं पहनने के कारण 54,568 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 15,408 लोग दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठे थे। ऐसे में चालक के साथ पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट पहनना जरूरी है।
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यूपी में सबसे ज्यादा मौतें
वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 24,118 लोगों की मौत हुई, जो देश में सर्वाधिक थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी से बचकर हादसों का जोखिम कम किया जा सकता है।
घायल की मदद के लिए 112 या 108 पर करें फोन
ट्रॉमा सेंटर के एमएस डॉ. अमिय अग्रवाल ने बताया कि हादसे के बाद घायल की मदद करने से पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें और 112 या 108 पर फोन करें। खून बहने पर साफ कपड़े से दबाव डालें और घायल की गर्दन या पीठ को अनावश्यक न मोड़ें। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायलों को कैशलेस उपचार योजना के तहत सात दिन तक डेढ़ लाख रुपये तक इलाज की सुविधा मिल सकती है। घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार के लिए 25 हजार रुपये पुरस्कार का भी प्रावधान है।