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अलीगंज अग्निकांड : घायल व्यक्ति के इलाज का खर्च हर महीने दे राज्य सरकार : हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को अलीगंज अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल हुए जयंत गुप्ता के इलाज का खर्च हर महीने वहन करने का निर्देश दिया है। 25 वर्षीय जयंत हादसे में स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनका इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में चल रहा है। 22 जून को हुए इस अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हुई थी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने शिवेंदु पांडे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने नौ सितंबर 2026 के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा, जिसमें सरकार को जयंत के इलाज का खर्च उठाने और केजीएमयू को उनसे इलाज का शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया गया था।
सुनवाई के दौरान जयंत के वकील ने बताया कि वह इलाज पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं, जबकि उन्हें सभी स्रोतों से महज 1.5 लाख रुपये मुआवजा मिला है। हादसे से पहले वह चरित्र कलाकार के रूप में काम करते थे और करीब 46 हजार रुपये प्रतिमाह कमाते थे। अब कमाई करने में असमर्थ हैं और 25 हजार रुपये मासिक पेंशन पाने वाले अपने पिता पर निर्भर हैं।
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कोर्ट ने कहा कि इलाज पर खर्च की गई रकम के बिल अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा सचिव को दिए जाएं। सत्यापन के बाद अगली सुनवाई से पहले आवश्यक भुगतान किया जाए। अस्पताल या घर पर इलाज के वर्तमान और नियमित खर्च के बिल भी इसी प्रक्रिया से जमा होंगे और जयंत को हर महीने भुगतान किया जाएगा।
मुआवजे के लिए नीति बनाने को समिति गठित
सरकार की ओर से बताया गया कि मुआवजे के लिए नीति या कानून तैयार करने के संबंध में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। कोर्ट ने उचित और न्यायसंगत नीति तैयार होने की उम्मीद जताते हुए मामले की अगली सुनवाई नवंबर 2026 के चौथे सप्ताह में तय की।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने शिवेंदु पांडे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने नौ सितंबर 2026 के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा, जिसमें सरकार को जयंत के इलाज का खर्च उठाने और केजीएमयू को उनसे इलाज का शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया गया था।
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सुनवाई के दौरान जयंत के वकील ने बताया कि वह इलाज पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं, जबकि उन्हें सभी स्रोतों से महज 1.5 लाख रुपये मुआवजा मिला है। हादसे से पहले वह चरित्र कलाकार के रूप में काम करते थे और करीब 46 हजार रुपये प्रतिमाह कमाते थे। अब कमाई करने में असमर्थ हैं और 25 हजार रुपये मासिक पेंशन पाने वाले अपने पिता पर निर्भर हैं।
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कोर्ट ने कहा कि इलाज पर खर्च की गई रकम के बिल अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा सचिव को दिए जाएं। सत्यापन के बाद अगली सुनवाई से पहले आवश्यक भुगतान किया जाए। अस्पताल या घर पर इलाज के वर्तमान और नियमित खर्च के बिल भी इसी प्रक्रिया से जमा होंगे और जयंत को हर महीने भुगतान किया जाएगा।
मुआवजे के लिए नीति बनाने को समिति गठित
सरकार की ओर से बताया गया कि मुआवजे के लिए नीति या कानून तैयार करने के संबंध में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। कोर्ट ने उचित और न्यायसंगत नीति तैयार होने की उम्मीद जताते हुए मामले की अगली सुनवाई नवंबर 2026 के चौथे सप्ताह में तय की।