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Build 2026 Lucknow: एक्सप्रेसवे से एक्सपोर्ट तक और प्रॉपर्टी से निवेश तक, यूपी के विकास पर हुआ मंथन

Fri, 09 Oct 2026 05:27 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Fri, 09 Oct 2026 05:27 PM IST
खास बातें

UP infrastructure conclave 2026 Live Updates in Hindi: लखनऊ में अमर उजाला बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा पर मंथन हुआ। स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा, औद्योगिक निवेश, रियल एस्टेट, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर विचार रखे। 

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EBuild-2026 Live UP's Development Roadmap, Infrastructure Conclave and Property Expo in Lucknow Latest Updates
अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने अपनी बात रखी - फोटो : अमर उजाला

लाइव अपडेट

05:27 PM, 09-Oct-2026

सालाना 4500 से 5000 फैक्टरियां शुरू कर रहीं उत्पादन

आलोक कुमार ने कहा कि 20 या इससे अधिक कर्मचारियों वाली और व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी फैक्टरियों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2010 से 2020 के बीच प्रदेश में हर साल औसतन 500 फैक्टरियों शुरू होती थीं, जबकि अब यह संख्या सालाना 4500 से 5000 के बीच पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि निवेश के आंकड़ों में यह देखना जरूरी है कि कितना निवेश वास्तव में धरातल पर उतरा है। भारत सरकार से सत्यापित आंकड़ों के आधार पर ही वास्तविक निवेश का आकलन किया जाता है। अभी कई बड़े निवेश की परियोजनाएं निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं। इनके उत्पादन शुरू करने के बाद औद्योगिक विकास को और गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्लांट में शुरुआत से ही 100 फीसदी क्षमता पर उत्पादन नहीं होता। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता है, इसलिए बड़े निवेश का पूरा प्रभाव आने वाले वर्षों में दिखाई देगा। वर्ष 2023-24 के वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास पर जोर

आलोक कुमार ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पहले विकसित किया जाए या मांग के अनुसार, इस पर हमेशा चर्चा होती है। चीन जैसे देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए वित्तीय व्यवस्थाएं अलग हैं। उत्तर प्रदेश में सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास पर भरोसा कर रही है और इसके लिए वित्तीय संसाधन जुटाए जा रहे हैं, ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि नोएडा-आगरा एक्सप्रेसवे के बाद आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ा गया है। बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। सरकार का प्रयास है कि कोई जिला एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से छूटे नहीं। इसके लिए लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। गोरखपुर को प्रयागराज से जोड़ने और झांसी सहित बुंदेलखंड क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
05:15 PM, 09-Oct-2026

एयरपोर्ट पर यात्री, कार्गो और मेंटेनेंस सुविधाओं का होगा विस्तार

एयरपोर्ट परियोजना के अलग-अलग चरणों में यात्री सुविधाओं, एयर कार्गो और विमान मेंटेनेंस से जुड़ी गतिविधियों को विकसित करने की योजना है। पहले चरण में यात्री क्षमता बढ़ाने पर जोर है। पांच मिलियन यात्रियों की क्षमता पूरी होने के बाद अगला रनवे शुरू करने की योजना है।

इसके अलावा, देश में एयर कार्गो की कम हिस्सेदारी को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरे चरण में विमान मेंटेनेंस, सिविल और मैकेनिकल मेंटेनेंस के साथ विमान के कुछ पुर्जों के निर्माण की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को बिना समय और लागत बढ़ाए पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन अर्थव्यवस्था की विकास दर और 2047 तक की संभावनाओं को देखते हुए एनसीआर क्षेत्र में हवाई सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। भविष्य में एनसीआर की जरूरतों के लिए दो एयरपोर्ट भी कम पड़ सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के लिए लिए गए कर्ज की वापसी हवाई यातायात से होने वाली आय पर निर्भर करेगी। यातायात में 30 फीसदी तक की कमी आने की स्थिति का आकलन करना भी जरूरी है।
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05:10 PM, 09-Oct-2026

परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन हो रहा

अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास 2021 में हुआ और 2026 की शुरुआत में इसका उद्घाटन हुआ। यह परियोजना के तेजी से क्रियान्वयन का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण में कुछ मामलों में पांच से सात फीसदी तक जमीन कानूनी विवाद या अन्य कारणों से अटक जाती है। कुछ लोग जमीन बेचने को तैयार नहीं होते। ऐसे मामलों में कानून के तहत प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में चुनौती आती है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ इसकी मांग भी बढ़ती है। आज जो क्षेत्र खाली नजर आ रहे हैं, वहां पांच से दस साल बाद तेजी से विकास हो सकता है। कई जगहों पर प्लॉट की मांग इतनी है कि लोगों को समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।
05:03 PM, 09-Oct-2026

दादरी के पास 800 एकड़ में बनेगा बड़ा लॉजिस्टिक हब

आखिरी सत्र में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने अपनी बात रखी। अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए सड़क, रेल और जलमार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी है। अमृतसर-कोलकाता और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर का दादरी के पास उत्तर प्रदेश में इंटरसेक्शन है। इस स्थान पर करीब 800 एकड़ में बड़ा लॉजिस्टिक हब विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के एक हिस्से में निर्माण कार्य हो चुका है और उसे अवार्ड भी किया जा चुका है। यहां कंटेनर लोडिंग की सुविधा विकसित होने से माल को रेल के माध्यम से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे को भी इस कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना है। इससे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और मुरादाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों से ग्रेटर नोएडा और नोएडा की ओर आवागमन आसान होगा। साथ ही, नोएडा से एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
05:01 PM, 09-Oct-2026

यूपी में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

निर्यात में प्रतिस्पर्धी बनने के लिए मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उद्देश्य भी मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को बढ़ावा देना है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इस क्षेत्र का एक प्रमुख सेक्टर है। उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उद्योगों में निवेश बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में यूपीसीडा में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।

पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के बीच प्रति व्यक्ति जीडीपी का अंतर कम करने के लिए पूर्वांचल में विकास की गति तेज करना जरूरी है। इसके लिए सरकार विशेष परियोजनाओं पर काम कर रही है।

विश्व बैंक की 400 मिलियन डॉलर की परियोजना के तहत पूर्वांचल के जिलों में कृषि उत्पादकता, खाद्य प्रसंस्करण और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा, करीब 2000 करोड़ रुपये की एक अन्य परियोजना को मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने की बात कही।

प्रदेश की जीडीपी में कृषि का योगदान करीब 25 फीसदी, मैन्युफैक्चरिंग का 25 फीसदी और सेवा क्षेत्र का 50 फीसदी है। विकास को गति देने के लिए करीब 2000 से 2500 करोड़ रुपये की एक और परियोजना का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके तहत प्रत्येक जिले की विशेषताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर निवेश की योजना तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय विकास को बढ़ावा मिल सके।
04:54 PM, 09-Oct-2026

एक्सक्लूसिव एक्सपोर्ट के लिए अभी कोई योजना नहीं

एक्सक्लूसिव एक्सपोर्ट के लिए अभी कोई मांग नहीं आई है और न ही ऐसी कोई योजना है। भारत में करीब 70 फीसदी मैन्युफैक्चरिंग घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है, जबकि लगभग 30 फीसदी उत्पादन निर्यात के लिए होता है। वहीं, चीन में करीब 60 से 65 फीसदी उत्पादन निर्यात पर केंद्रित है।

हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय की ओर से कानपुर में बैठक हुई थी। इसमें मंत्रालय की सांसदों की सलाहकार समिति के समक्ष संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। घरेलू बाजार में उत्पाद बेचने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन पूरी तरह निर्यात आधारित इकाइयों को कस्टम और जीएसटी विभाग के समक्ष बार-बार अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है।
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04:52 PM, 09-Oct-2026

प्लॉट आवंटन के साथ ही सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर जोर

चर्चा में आगे बात निकलकर आई कि औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में होने वाली देरी पर सरकार की ओर से आवंटित प्लॉट पर उद्योग लगाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर समय पर मिलना महत्वपूर्ण है। यदि निवेशक को प्लॉट मिलने के बाद बिजली, सड़क, ड्रेनेज जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं, तो उसका उत्पादन शुरू करने का कार्यक्रम प्रभावित होता है।

छोटे औद्योगिक भूखंडों के मामले में सरकार की ओर से सीधे आवंटन की व्यवस्था भी की जा सकती है। ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर आवंटन और परियोजनाओं की निगरानी की जाती है, ताकि निवेशकों को जल्द सुविधाएं मिल सकें।

पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में कहीं-कहीं सड़क और ड्रेनेज से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, बिजली आपूर्ति को लेकर संबंधित विभागों और प्राधिकरणों की ओर से लगातार काम किया जा रहा है। नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के दौरान बिजली सहित जरूरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत का आकलन पहले से किया जा रहा है, ताकि उद्योग स्थापित होने के बाद निवेशकों को परेशानी न हो।

औद्योगिक विकास में केवल जमीन आवंटित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पर उत्पादन शुरू करने के लिए जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना भी उतना ही अहम है। इसके लिए संबंधित विभागों और प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय और परियोजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है।
04:48 PM, 09-Oct-2026

ट्रांसशिपमेंट हब बनने के लिए एयरपोर्ट पर बढ़ानी होगी सुविधाएं

मनोज कुमार सिंह ने आगे कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब बनाने के लिए एयरपोर्ट पर कार्गो हैंडलिंग की दक्षता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को सरल करने की जरूरत है। मौजूदा व्यवस्था में दूसरे देशों से आने वाले सामान को किसी तीसरे देश में भेजने से पहले दोबारा जांच और पैकेजिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इससे समय और लागत बढ़ती है। यदि सुरक्षा जांच के बाद बांडेड क्षेत्र में रखे गए सामान को निर्धारित नियमों के तहत दोबारा खोलने और जांचने की जरूरत न पड़े, तो ट्रांसशिपमेंट की प्रक्रिया अधिक आसान हो सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने के लिए नीतिगत बदलावों के साथ एयरपोर्ट की कार्यक्षमता में सुधार करना होगा। इससे देश में आने वाले और यहां से दूसरे देशों को भेजे जाने वाले माल की आवाजाही तेज होगी।

2030 तक एयर कार्गो क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

मनोज कुमार सिंह ने बताया कि देश के प्रमुख एयरपोर्टों से होने वाले कुल एयर कार्गो को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने 2030 तक भारत के एयर कार्गो को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 10 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उनके अनुसार, हांगकांग जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों की तुलना में भारत को अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता और परिचालन दक्षता में सुधार करना होगा।

उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में केवल भंडारण ही नहीं, बल्कि माल के ट्रांसशिपमेंट और तेजी से वितरण की सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। इससे उत्तर प्रदेश में निर्मित उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता पर जोर

मनोज कुमार सिंह ने औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के लिए जमीन लेने वाले निवेशकों को पहले से यह जानकारी मिलनी चाहिए कि संबंधित औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति कितनी भरोसेमंद है। इसके लिए पावर रिलायबिलिटी इंडेक्स या स्कोरकार्ड तैयार करने की जरूरत है, जिससे निवेशक विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर सकें।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई पुराने और नए औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार हुआ है। इन क्षेत्रों में डबल फीडर और 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर काम किया गया है। हालांकि, कुछ स्थानों पर अब भी आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं।

बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च

उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये के आसपास के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इसमें 220 केवी और 33 केवी के बिजली ढांचे को मजबूत करने के कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं के लिए अटल मिशन और यूपीसीडा के बजट सहित विभिन्न स्रोतों से संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कुछ कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ पर अभी काम चल रहा है। नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के दौरान बिजली की जरूरतों का आकलन पहले ही किया जा रहा है, क्योंकि विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में समय लगता है। इस व्यवस्था से भविष्य में उद्योगों की बिजली संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।

मनोज कुमार सिंह के अनुसार, औद्योगिक विकास के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति दोनों जरूरी हैं। इन सुविधाओं में सुधार से प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहन देने और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
04:40 PM, 09-Oct-2026

लॉजिस्टिक नीति के तहत 75 परियोजनाओं को मिली यूआईडी

यूपीसीडा के सीईओ बलकार सिंह ने कहा कि यूपी में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए लागू लॉजिस्टिक नीति-2022 के तहत अब तक 75 परियोजनाओं को यूनिक आईडी (यूआईडी) जारी की गई है। इन परियोजनाओं में करीब 15 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के सीईओ बलकार सिंह ने बताया कि लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस और निजी औद्योगिक पार्क स्थापित करने के इच्छुक निवेशक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक नीति-2022 के तहत यूपीसीडा नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। नीति के अंतर्गत आवेदन करने वाले निवेशकों को ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से यूनिक आईडी जारी की जाती है। यह प्रक्रिया निशुल्क है। इसके अलावा, भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज कन्वर्जन) से संबंधित कुछ सुविधाएं भी नीति के तहत निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

परियोजना शुरू होने के बाद आगे बढ़ती है प्रक्रिया

बलकार सिंह ने बताया कि यूनिक आईडी मिलने के बाद निवेशक भूमि की उपलब्धता और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर अपनी परियोजना शुरू कर सकते हैं। इसके बाद पात्र परियोजनाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार प्रोत्साहन राशि के वितरण के लिए शासन को भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि नीति का उद्देश्य प्रदेश में लॉजिस्टिक्स से जुड़े निवेश को बढ़ावा देना और निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

निवेशकों से आवेदन करने की अपील

यूपीसीडा के सीईओ ने लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस और निजी औद्योगिक पार्क स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों से नीति के तहत आवेदन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निवेशकों को आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की समस्या आने पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नीति के माध्यम से प्रदेश में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।
 
04:35 PM, 09-Oct-2026

ग्रेटर नोएडा में विकसित होंगे दो मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क

इस सेशन में राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह, यूपीसीडा के सीईओ बलकार सिंह, मनोज गुप्ता, चेयरमैन फिक्की एंड एमकेयू शामिल हुए। इस मौके पर राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए ग्रेटर नोएडा में दो मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। वहीं, जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास 50 एकड़ जमीन पर एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब बनाने की भी योजना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र के उद्योगों को माल के परिवहन और निर्यात में सुविधा मिलने के साथ उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।

मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में 175 एकड़ जमीन पर एक मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, करीब 2800 एकड़ क्षेत्र में एक अन्य मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बनाने की योजना है। इसके लिए दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड को एच-1 बोलीदाता के रूप में चयनित किया गया है। यह परियोजना पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि दोनों लॉजिस्टिक पार्क बनने से क्षेत्र में माल के भंडारण, परिवहन और वितरण से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा। इससे औद्योगिक इकाइयों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी और लॉजिस्टिक्स पर आने वाली लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब

मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास 50 एकड़ जमीन पर एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब विकसित करने की योजना है। इसके लिए सरकार स्तर पर योजना तैयार कर उसे लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस हब से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और क्षेत्र के कारोबार को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

लॉजिस्टिक्स लागत घटने से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स किसी भी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है। परिवहन और माल की आपूर्ति पर अधिक खर्च होने से उत्पाद की कुल लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से लागत घटाने और उत्पादों को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलती है।

उन्होंने जीएसटी की दरों का उदाहरण देते हुए कहा कि कर की दरों में कमी से वस्तुओं की लागत पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर होने से उद्योगों को अपने उत्पादों की लागत नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। ग्रेटर नोएडा में लॉजिस्टिक पार्कों और जेवर एयरपोर्ट के आसपास एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब के विकास से क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों और निर्यात को गति मिलने की संभावना है।
 
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