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निकाय चुनाव: कश्मीर में आतंकियों और अलगावादियों का खौफ इतना की 70 फीसदी वार्डों में नहीं हुई वोटिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:30 AM IST
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निकाय चुनाव में खाली पड़े पोलिंग स्टेशन
- फोटो : बासित जरगर
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नगर निकाय के लिए घाटी में हुए चुनाव में 598 वार्ड में से 70 फीसदी वार्डों में वोटिंग नहीं हुई। या तो इन वार्डों में एक भी प्रत्याशी मैदान में नहीं थे या फिर निर्विरोध चुन लिए गए थे। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय की ओर से तैयार डाटा के मुताबिक घाटी के 10 जिलों के 40 निकायों के 598 वार्ड में से सिर्फ 186 वार्ड के लिए ही वोट पड़े। शेष 412 वार्ड यानी 69.89 फीसदी वार्डों में चुनाव नहीं हुए।
181 वार्ड (30.26 प्रतिशत) में किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं भरा। पहले चरण में 69, दूसरे में 61, तीसरे में 49 व चौथे चरण में 52 वार्ड में निर्विरोध निर्वाचन हुआ। छह निकायों में दो प्रत्याशी रहे। पुलवामा के 13 वार्ड में दो केवल दो ही प्रत्याशी मैदान में थे जो निर्विरोध चुन लिए गए। कुलगाम जिले के फ्रिसल व पुलवामा जिले के ख्रीव के 13-13 वार्ड में एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं हुआ।
घाटी के 40 निकायों में 27 पर वोटिंग नहीं हुई। 13 निकायों के लिए हुए चुनाव में प्रथम चरण में 8.3, दूसरे में 3.4, तीसरे में 3.5 व चौथे चरण में 4.2 फीसदी रिकार्ड किया गया। मतदान का प्रतिशत कम होने के पीछे आतंकियों की धमकी को प्रमुख कारण माना गया है। साथ ही अलगाववादियों के बहिष्कार व दो प्रमुख पार्टियों नेकां व पीडीपी के चुनाव में भाग न लेने को भी कम वोटिंग के लिए जिम्मेदार माना गया है।
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181 वार्ड (30.26 प्रतिशत) में किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं भरा। पहले चरण में 69, दूसरे में 61, तीसरे में 49 व चौथे चरण में 52 वार्ड में निर्विरोध निर्वाचन हुआ। छह निकायों में दो प्रत्याशी रहे। पुलवामा के 13 वार्ड में दो केवल दो ही प्रत्याशी मैदान में थे जो निर्विरोध चुन लिए गए। कुलगाम जिले के फ्रिसल व पुलवामा जिले के ख्रीव के 13-13 वार्ड में एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं हुआ।
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घाटी के 40 निकायों में 27 पर वोटिंग नहीं हुई। 13 निकायों के लिए हुए चुनाव में प्रथम चरण में 8.3, दूसरे में 3.4, तीसरे में 3.5 व चौथे चरण में 4.2 फीसदी रिकार्ड किया गया। मतदान का प्रतिशत कम होने के पीछे आतंकियों की धमकी को प्रमुख कारण माना गया है। साथ ही अलगाववादियों के बहिष्कार व दो प्रमुख पार्टियों नेकां व पीडीपी के चुनाव में भाग न लेने को भी कम वोटिंग के लिए जिम्मेदार माना गया है।
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