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Jammu: जम्मू संभाग में इस बार लीची की पैदावार कम, ग्यारह हजार मीट्रिक टन ही हुआ कारोबार, अब आम पर बंधी आस 

सतीश वालिया, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Thu, 23 Jun 2022 02:46 PM IST
सार

अप्रैल और मई माह में खराब मौसम और तूफान के कारण लीची की पैदावार प्रभावित हुई। इस बार बागवानों को लीची से ज्यादा आय नहीं हुई है। वहीं, अब बागवानों को आम से अच्छी आय की उम्मीद है।

बाजार में बिकती लीची
बाजार में बिकती लीची - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

जम्मू संभाग में इस बार लीची की पैदावार उम्मीद से कम हुई। ऐसे में किसानों को अब आम पर आस बंधी है। अप्रैल और मई माह में खराब मौसम और तूफान के कारण लीची की पैदावार प्रभावित हुई। ओलावृष्टि के कारण लीची बीच से फट गई। इस कारण 11 हजार एमटी लीची ही बाजारों तक पहुंच पाई। तीन हजार एमटी लीची पेड़ों पर ही खराब हो गई।



बाजारों में लीची 70 से 80 रुपये प्रति किलो ही खरीदी गई, जबकि हर साल सौ से 110 रुपये प्रति किलो खरीदी जाती थी। इस बार बागवानों को लीची से ज्यादा आय नहीं हुई है। वहीं, अब बागवानों को आम से अच्छी आय की उम्मीद है। जम्मू संभाग में आम 13 हजार हेक्टेयर भूमि में होता है। 


इससे 31 हजार एमटी पैदावार इस साल होने की संभावना है। जुलाई माह के पहले सप्ताह से आम पकने शुरू हो जाएंगे। जम्मू संभाग में दशहरी और अम्रपाली आम की अच्छी मांग रहती है। यह 80 से 90 रुपये तक बाजारों में बिकता है। जुलाई माह के दूसरे सप्ताह से बाजारों में स्थानीय आम आना शुरू हो जाएगा। स्थानीय प्रजातियों के आम भी पक जाएंगे।

लीची की फसल काफी हद तक तूफान और ओलावृष्टि के कारण प्रभावित रही। ज्यादातर लीची फट गई। इस कारण तीन हजार एमटी लीची पेड़ों पर खराब हो गई। इसके अलावा कट लगी लीची के बाजारों में अच्छे दाम नहीं मिल पाए। आम की फसल उम्दा है। संभावना है कि बागवानों को अच्छी आय होगी। - डॉ. प्रशांत बख्शी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, फल विभाग स्कास्ट।

लीची

  • साल    -    पैदावार (मीट्रिक टन)
  • 2022    -    11 हजार
  • 2021    -    13 हजार
  • 2020    -    14 हजार
  • 2019    -    16 हजार


आम

  • साल    -    पैदावार (मीट्रिक टन)
  • 2022    -    31 हजार  (संभावना)
  • 2021    -    27 हजार
  • 2020    -    29 हजार
  • 2019    -    30 हजार

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