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विश्व अर्थराइटिस दिवस: बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी सताने लगा गठिया, ऐसे करें बचाव
Sat, 12 Oct 2019 12:23 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 12 Oct 2019 12:23 AM IST
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world arthritis day
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मोटापे से गठिया (जोड़ो की सूजन) रोग अभिशाप बनता जा रहा है। जंक फूड का बढ़ता चलन मोटापे को बढ़ावा दे रहा है। अब 50 की उम्र से पहले ही गठिया की समस्या हो रही है। इसके साथ जीवनशैली में सामान्य से अधिक आरामदायक बनना और गलत तरीके से जोड़ों की गतिविधियां करना भी गठिया का कारण बन रहा है। जीएमसी में आरथो की रोजाना करीब 350 ओपीडी में 30 फीसदी मरीज गठिया की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली को संतुलित बनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
अर्थराइटिस यानी गठिया आज की बदलती जीवन शैली, मोटापा, गलत खानपान आदि वजहों से बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। अर्थराइटिस का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कुल्हे की हड्डियों पर पड़ता है। इससे बदन में दर्द और अकड़न महसूस होने लगती है।
कभी कभी उनके हाथों, कंधों और घुटने में सूजन और दर्द रहता है और उन्हें हाथ मिलाने में तकलीफ होती है। ऐसे लोगों को अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। जीएमसी के आरथो विभाग के एचओडी डॉ. संजीव के अनुसार गठिया के लिए प्रमुख कारणों में मोटापा सबसे ऊपर है।
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शरीर पर सामान्य से अधिक वजन जोड़ों में सूजन पैदा करता है। अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन है। सौ से अधिक प्रकार के गठिया से लोग परेशान हो रहे हैं। सामान्य स्थिति में आस्टियो अर्थराइटिस 50 साल की उम्र के बाद होता है। यह शरीर पर निर्भर करता है कि जोड़ो को कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया गया है।
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अर्थराइटिस यानी गठिया आज की बदलती जीवन शैली, मोटापा, गलत खानपान आदि वजहों से बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। अर्थराइटिस का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कुल्हे की हड्डियों पर पड़ता है। इससे बदन में दर्द और अकड़न महसूस होने लगती है।
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कभी कभी उनके हाथों, कंधों और घुटने में सूजन और दर्द रहता है और उन्हें हाथ मिलाने में तकलीफ होती है। ऐसे लोगों को अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। जीएमसी के आरथो विभाग के एचओडी डॉ. संजीव के अनुसार गठिया के लिए प्रमुख कारणों में मोटापा सबसे ऊपर है।
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शरीर पर सामान्य से अधिक वजन जोड़ों में सूजन पैदा करता है। अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन है। सौ से अधिक प्रकार के गठिया से लोग परेशान हो रहे हैं। सामान्य स्थिति में आस्टियो अर्थराइटिस 50 साल की उम्र के बाद होता है। यह शरीर पर निर्भर करता है कि जोड़ो को कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया गया है।
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अर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ विकसित होते हैं, लेकिन ये अचानक भी समस्या बन सकते हैं। इसके अलावा गलत एंगल से अधिक देर तक झुककर काम करना, सिर पर नियमित तौर पर वजन उठाना, झुककर कोई वजन उठाना, कंप्यूटर के सामने गलत तरीके से घंटों बैठे रहना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना, गर्दन झुकाकर घंटों काम करने से भी गठिया की शिकायत होती है।
इसके अलावा रुमेटोइड अर्थराइटिस में मरीज के शरीर के अंग अकड़ जाते हैं। इसमें महिलाओं में अधिक शिकायत होती है। इसी तरह यूरिक एसिड बढ़ने से भी गठिया (गाउट) की समस्या होती है। गठिया की शिकायत होने पर तुरंत डाक्टर की सलाह लें। इसमें फिजियोथैरेपी को नजरअंदाज न करें।
बचाव
1. रोजाना संतुलित आहार लें
2. धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, ये हड्डियों को कमजोर बनाता है
3. साइकिलिंग से हड्डियों को मजबूत बनाएं
3. स्वीमिंग को अपनाकर शरीर को तंदुरुस्त रखें
4. जंक फूड से तौबा करें, रोजाना सैर करें
गठिया को बढ़ा सकती है देसी मालिश
डॉक्टरों के अनुसार अक्सर गठिया की समस्या होने पर लोग देसी मालिश का सहारा लेते हैं। लेकिन ऐसी मालिश से जोड़ो के भीतर तक समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता है। जिससे दर्द और सूजन की समस्या बढ़ जाती है। यह बीमारी को बढ़ा देती है।
इसके अलावा रुमेटोइड अर्थराइटिस में मरीज के शरीर के अंग अकड़ जाते हैं। इसमें महिलाओं में अधिक शिकायत होती है। इसी तरह यूरिक एसिड बढ़ने से भी गठिया (गाउट) की समस्या होती है। गठिया की शिकायत होने पर तुरंत डाक्टर की सलाह लें। इसमें फिजियोथैरेपी को नजरअंदाज न करें।
बचाव
1. रोजाना संतुलित आहार लें
2. धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, ये हड्डियों को कमजोर बनाता है
3. साइकिलिंग से हड्डियों को मजबूत बनाएं
3. स्वीमिंग को अपनाकर शरीर को तंदुरुस्त रखें
4. जंक फूड से तौबा करें, रोजाना सैर करें
गठिया को बढ़ा सकती है देसी मालिश
डॉक्टरों के अनुसार अक्सर गठिया की समस्या होने पर लोग देसी मालिश का सहारा लेते हैं। लेकिन ऐसी मालिश से जोड़ो के भीतर तक समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता है। जिससे दर्द और सूजन की समस्या बढ़ जाती है। यह बीमारी को बढ़ा देती है।