कश्मीरी पंडितों के लिए 50 एकड़ में बनेगी टाउनशिप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप पर मचे घमासान के बीच केंद्रीय गृहमंत्री ने साफ कर दिया कि पुनर्वास हर हाल में होगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि शनिवार को ही जम्मू-कश्मीर के सीएम से बात हुई है। टाउनशिप के पहले चरण के लिए राज्य सरकार 50 एकड़ जमीन देने पर राजी हो गई है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के सीएम से लगातार बात हो रही है।
न्यूनतम साझा कार्यक्रम और उसके बाद हुई बातचीत पर वह सहमत हैं। हमको मिलकर कश्मीरी पंडितों में सुरक्षा का भाव जगाना है। अलगाववादी बेवजह का शोर मचा रहे हैं। उनके विरोध में कोई दम नहीं है। किसी विरोध से पंडितों के पुनर्वास का काम रुकने वाला नहीं है। जम्मू-कश्मीर के सीएम और केंद्र सरकार का कोई विवाद नहीं है। दोनों मिलकर इस काम को पूरा करेंगे।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए कि श्तों में जमीन मिलनी है, इसकी पहली किश्त के रूप में 50 एकड़ की व्यवस्था वहां की सरकार ने कर दी है। उल्लेखनीय है कि कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप बनाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ शनिवार को अलगाववादी संगठनों ने कश्मीर बंद की काल दी थी।
इसके अलावा जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (जेकेएलफ) के चेयरमैन यासीन मलिक ने 18 अप्रैल से अनशन पर जाने की भी घोषणा की है।
'समझ से पहले है वापसी पर विवाद'
कश्मीरी पंडितों के सेटेलाइट टाउन को लेकर लगातार बढ़ रहे विरोध से साफ पता चलता है कि अलगाववादी और कश्मीरी नेता कश्मीरी पंडितों को एक चुनौती दे रहे हैं। कश्मीरी पंडित इस चुनौती को स्वीकार करते हैं। अगर राज्य और केंद्र सरकार उनकी वापसी करवाना चाहती है तो पहले उनके लिए कश्मीर में होमलैंड स्थापित करे।
ये बातें शनिवार को पनुन कश्मीर के प्रधान अश्वनी कुमार चुरंगू ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं। अश्वनी कुमार ने प्रेस वार्ता में बात रखते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों की कश्मीर में वापसी को लेकर विवाद क्यों पैदा किया जा रहा है, यह समझ से परे है। कश्मीरी पंडितों की वापसी को लेकर अलगाववादी और बड़े नेता मतभेद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि सरकार अपनी तरफ से सेटेलाइट टाउन बनाने की बातें कर रही है, जबकि इसके बारे में अभी तक कश्मीरी पंडितों से पूछा तक नहीं गया है। अगर सरकार कोई योजना बनाती है तो उसमें कश्मीरी पंडित के प्रतिनिधियों को भी रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अलगाववादियों और नेताओं को एक बात समझ लेनी चाहिए कि जब कश्मीरी पंडितों ने वापस कश्मीर में जाना होगा तो उनको किसी से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। पनुन कश्मीर के राष्ट्रीय प्रवक्ता विरेंद्र रैना ने कहा कि होमलैंड स्थापित किए बिना कश्मीरी पंडितों का वापस जाना किसी तरह भी संभव नहीं है।
कश्मीरी पंडितों ने दिल्ली में भरी हुंकार
घर वापसी के मुद्दे पर कश्मीरी पंडितों ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। कश्मीरी विस्थापितों ने कहा कि सरकार एक समिति बनाए और उसमें उन्हें भी प्रतिनिधित्व दिया जाए ताकि उनकी बात को सही तरीके से पेश किया जा सके।
कश्मीरी पंडितों ने इस बात पर विरोध जताया कि एक ओर केंद्र सरकार उनकी वापसी के लिए अलग शहर बसाने की योजना बना रही है, तो दूसरी ओर हुर्रियत और अन्य अलगाववादी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि पीड़ितों की कोई नहीं सुन रहा है। ऑल पार्टी माइग्रेंट को-ऑर्डीनेशन कमेटी की अगुवाई में कश्मीरी पंडित शनिवार को जंतर-मंतर पर जमा हुए।
प्रदर्शन के दौरान कश्मीरियों ने केंद्र सरकार की योजना का विरोध किया। प्रदर्शन में सुनील शकधर, रशनीक खेर, आशीष जुत्सी, अनिल धर और रवि रेगु समेत सैकड़ों कश्मीरियों ने हिस्सा लिया। इनका कहना है कि सरकार अगर उनकी घर वापसी के लिए गंभीर है तो वहां उन्हें सुरक्षा और सम्मान की जिंदगी चाहिए। उन्हें अलग शहर में बसा देना इस समस्या का हल नहीं है।
कमेटी के नेता रवींद्र पंडिता के मुताबिक समस्या का हल अलग शहर बसाकर देने से नहीं होगा। समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्हें वापस भेजने से पहले उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। कश्मीरी पंडितों की समस्या करीब तीन दशक पुरानी है। कश्मीर से लाखों की संख्या में पंडितों ने पलायन किया था।