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अदालत के आदेश का उल्लंघन करने वाला कौन?
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 13 Sep 2014 02:44 AM IST
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अदालत के आदेश के उल्लंघन के मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए को निर्देश दिए हैं कि उस अफसर की निशानदेही की जाए, जिसने अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया। साथ ही उसी अफसर से 25 हजार रुपये की ‘कास्ट मनी’ वसूली जाए और याचिकाकर्ता को वापस की जाए।
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रूप नगर हाउसिंग कालोनी के रिहायशी क्षेत्र को कामर्शियल में तब्दील किए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका में जेडीए के वाइस चेयरमैन ने अदालत से समय देने की मांग की, जिसमें खंडपीठ ने उन्हें 25 हजार रुपये कास्ट राशि जमा करने के निर्देश दिए थे। जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस ताशी राबस्तन याचिकाकर्ता के वकील एसके शुक्ला और जेडीए के वकील आदर्श शर्मा व सिंधू शर्मा की दलीलें सुनने के बाद पाया कि 27 मार्च, 2014 को अदालत ने नोटिस किया कि 10 नवंबर 2009 के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
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इसके बाद जेडीए वाइस चेयरमैन को 15 अप्रैल, 2014 तक अनुपालन का अंतिम मौका दिया गया, अन्यथा उन पर 25 हजार रुपये कास्ट राशि लगाई जाएगी। दो अक्तूबर, 2014 को अदालत ने पाया कि जेडीए वीसी ने आदेश का उल्लंघन किया, इसलिए उन्हें अगली तिथि पर खुद पेश होने और 25 हजार रुपये कास्ट मनी जमा करवाने को कहा। डिवीजन बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए दो अक्तूबर 2014 के आदेश की फिर से समीक्षा करने की अपील की कि 27 मार्च 2014 के तत्कालीन जेडीए वीसी का तबादला हो चुका था।
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इसलिए वे (याचिकाकर्ता) कास्ट मनी जमा करवाने के लिए पात्र नहीं हैं। याचिका में दायर अन्य बिंदुओं पर कार्यवाही की जा सकती है। बहरहाल इस मामले में अदालत ने पाया कि 27 मार्च 2014 के आदेश को 15 अप्रैल 2014 के पहले अनुपालन नहीं किया गया। प्रतिवादी की ड्यूटी है कि वह उस अफसर की पहचान करे, जिस पर अदालत के आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी थी। इसलिए उक्त अफसर को कास्ट मनी जमा करने के निर्देश दिए जाते हैं और यदि याचिकाकर्ता ने उक्त राशि जमा करवाई है तो उसे लौटाई जाए।