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Jammu News: वॉल क्लाइंबिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक रहीं चाढ़क बहनें

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wall climbing, chadhak sisters
जम्मू। स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग (वॉल क्लाइंबिंग) के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाली चाढ़क बहनें शिवानी और शिल्पा आज महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद देश-विदेश की प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर परचम लहराया है। उनकी मांग है कि इस खेल को प्रदेश में एसआरओ के तहत शामिल किया जाए ताकि खिलाड़ियों को रोजगार और बेहतर अवसर मिल सकें।
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जम्मू की शिवानी चाढ़क ने बीते 75 वर्षों में एशियन गेम्स में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला बनने का गौरव हासिल किया है। शिवानी ने बताया कि वर्ष 2014 से ही खेल से जुड़ी हैं और लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर 13 गोल्ड, 16 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज अपने नाम कर चुकी हैं। इसके अलावा ईटली, चीन, थाइलैंड और हांगकांग सहित कई देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर चुकी हैं।
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शुरुआती दौर में पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं जिससे नियमित अभ्यास कठिन था और बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था। अब एमए स्टेडियम में वॉल तैयार की गई है जिससे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है। उनका मानना है कि जब स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे वैश्विक आयोजनों का हिस्सा बन चुका है तो इसे प्रदेश में भी एसआरओ के तहत शामिल किया जाना चाहिए।
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अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में शिल्पा ने दिखाई प्रतिभा

शिल्पा चाढ़क ने महज 13 वर्ष की उम्र में ही वॉल क्लाइंबिंग की शुरुआत कर दी थी। अब तक लगभग नौ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एशियन यूथ चैंपियनशिप तथा वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप सहित कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। शिल्पा ने बताया कि लगभग 20,500 फुट की ऊंचाई तक क्लाइंबिंग करने का अनुभव हासिल कर चुकी हैं। प्रदेश में साहसिक खेल के एसआरओ में शामिल न होने की वजह से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। कई बार स्पोर्ट्स कोटे के तहत सरकारी नौकरी के लिए आवेदन भी किया लेकिन जरूरी मान्यता न मिलने के कारण सफलता हाथ नहीं लग सकी। खेल को एसआरओ के तहत शामिल करने का आश्वासन कई बार दिया जा चुका है पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई बाकी है।
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