जम्मू के इस गांव ने पिछले चुनावों में नहीं डाले थे वोट
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कठुआ से लगभग 125 किमी दूर एक सुदूर गांव ने पिछले विधानसभा में सामूहिक रुप से चुनावों का बहिष्कार किया था। जिसके बाद इस घटना को लेकर भारतीय लोकतंत्र पर एक सवाल उठ खड़ा हुआ था कि क्या आज भी देश के सभी जगहों के लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाता है?
कठुआ से लगभग 125 किमी दूर डंडी गुट्टू गांव हिमाचल की सीमा से सटा एक छोटा गांव है। जहां आजादी के साठ साल भी बिजली पानी सड़क जैसे मूलभूत सुविधाएं आज भी मौजूद नहीं है। लोग के लिए बिजली आज भी यहां एक सपना देखने जैसा है।
इस गांवो ना तो सरकार ध्यान दे रही है और ना ही स्थानीय प्रशासन। जिसके चलते ये गांव काफी पिछड़ा हुआ है। पिछले चुनावों में इस गांव के लोगों ने वोट ना डालने का फैसला किया था। इस घटना के बाद भी प्रशासन और सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। समस्या जस की तस बनी हुई है। अब चुनाव एक बार फिर से आ गए है तो इस लोगों ने फिर से वोट ना डालने का एलान किया है।
चुनावी सीजन में अमूमन सियासी दल और उम्मीदवार ही वोटरों को रिझाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं लेकिन नब्बे फीसदी मतदान का लक्ष्य लेकर इस दफा प्रशासनिक अमला भी मतदाताओं से मनुहार करेगा।
वैसे तो सिस्टमेटिक वोटर एजूकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (स्वीप) कार्यक्रम के तहत सभी इलाकों में जागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया है लेकिन संसदीय चुनावों में कम मतदान वाले 60 केंद्रों पर इस बार विशेष ध्यान दिया जाएगा।
60 अफसरों को इन मतदान केंद्रों का जिम्मा
इनके लिए बाकायदा हिदायतें जारी की गई हैं कि ये लोगों की समस्याएं सुनने से लेकर उन्हें मतदान के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी इन अफसरों की होगी। स्वीप के तहत विशेष कार्यक्रमों से लेकर मतदाताओं के साथ मोहड़ावार बैठक करने और मतदान का महत्व समझाने के लिए प्रशासनिक अफसरों को विशेष प्रयास करने को कहा गया है।
जिला चुनाव अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कठुआ जिले में संसदीय चुनावों के दौरान मतदान का औसत प्रतिशत बेहतर रहा था लेकिन 60 मतदान केंद्रों का औसत प्रतिशत कम रहा था। इसी श्रेणी में शामिल बनी विधानसभा क्षेत्र का डंडी गुट्टू गांव सबसे बड़ा अपवाद बना था। इस मतदान केंद्र पर एक भी मत नही डाला गया था जबकि मतदाताओं की संख्या चार सौ से अधिक है।
कम मतदान वाले केंद्रों के लिए विशेष व्यवस्था के संबंध में पूछे जाने पर जिला चुनाव अधिकारी डा. शाहिद इकबाल चौधरी ने बताया कि 60 गजटेड अफसरों को मतदान केंद्रों का जिम्मा सौंपा गया है। प्रशासन ऐसी कोई भी कसर नहीं छोड़ेगा जिससे मतदान प्रतिशत पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहे।