बारीदारों ने मांगा वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का नियंत्रण, दसवीं शताब्दी में श्राइन की खोज का दावा
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श्री माता वैष्णो देवी मंदिर पर श्राइन बोर्ड और सरकार के नियंत्रण को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हिंदु संगठन बारीदार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने सरकार से चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। श्राइन बोर्ड बनने से पहले माता वैष्णो देवी मंदिर की देखरेख बारीदारों के पास थी। बारीदार समुदाय ने फिर से श्राइन बोर्ड का प्रशासन, प्रबंधन और शासन मांगा है। बुधवार को बारीदार संघर्ष कमेटी के प्रधान शाम सिंह ने 54 अन्य याचिकाकर्ताओं के साथ एडवोकेट अंकुर शर्मा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने श्राइन बोर्ड के सीईओ और सरकार के कानून सचिव को नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ताओं ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अधिनियम, 1988 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। इसे एक ऐसा कानून बताया जिसने श्री माता वैष्णो देवी जी मंदिर के नियंत्रण को हिंदुओं (बरीदारों) के हाथों से छीन कर सरकार के हाथों में दे दिया। अपीलकर्ताओं ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत इसकी सभी संपत्तियां मांगी हैं। साथ ही श्राइन के प्रबंधन, प्रशासन और शासन की मांग की।
सरकार द्वारा नियंत्रित श्राइन बोर्ड द्वारा कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ताओं ने 1986 से एक प्रतिष्ठित ऑडिट फर्म या एक ऑडिट इंस्टीट्यूशन के माध्यम से श्री माता वैष्णो देवी जी श्राइन फंड के बाहरी ऑडिट का संचालन करने की मांग की है जो प्रकृति में संवैधानिक या वैधानिक है।
एडवोकेट अंकुर शर्मा ने कोर्ट में कहा कि मौजूदा याचिका अपीलकर्ताओं के मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने संबंधी है। यह अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 (2) (ए), 26, 29, 14 और 31 ए (बी) के तहत अपीलकर्ताओं को प्राप्त है। जम्मू और कश्मीर में हिंदू धार्मिक संस्थान राज्य के अंगूठे के नीचे रहे हैं। अपने स्वयं के संस्थानों को व्यवस्थित करने के लिए हिंदू समुदाय की क्षमता को व्यवस्थित और नीचे गिरा दिया गया है। अन्य धर्मों से संबंधित धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन, प्रशासन और शासन को संभालने के लिए समान रूप से सशक्त होने के बावजूद, राज्य ने अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हुए केवल हिंदू मंदिरों के खिलाफ अपने अधिकार का प्रयोग किया है।
दसवीं शताब्दी में श्राइन की खोज का दावा
इस तथ्य की सत्यता को प्रमाणित करने वाले सार्वजनिक डोमेन में पर्याप्त वास्तविक सबूत उपलब्ध हैं। त्रिकुटा पर्वत और कटड़ा के आसपास के क्षेत्रों में निवास करने वाले बारीदार समुदाय के सदस्यों द्वारा पवित्र गुफा की खोज एक अच्छी तरह से सचित्र तथ्य है। 1986 में राज्य द्वारा अपने अधिकार लेने से पहले, प्रसाद का अधिकार सहित पवित्र तीर्थ का प्रबंधन, प्रशासन और शासन हमेशा बरीदारों के पास रहा।
याचिका में लगाए गंभीर आरोप
एडवोकेट अंकुर शर्मा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुप्रबंधन के आधार पर सरकार द्वारा मंदिर पर कब्जा कर लिया गया था। बोर्ड पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुप्रबंधन/भ्रष्टाचार के मामलों से लेकर हिंदू हितों के खिलाफ काम करने तक के मामले शामिल हैं। हिंदू प्रतिरोध के बावजूद एक नए रास्ते के निर्माण के साथ बोर्ड ने धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक महत्व को नष्ट करने के लिए कदम उठाए हैं जो पारंपरिक मार्ग चरण पादुका, अर्ध कुंवारी आदि में मौजूद हैं। श्राइन बोर्ड के धन को अलग-अलग धार्मिक समूह के सदस्यों के पक्ष में इफ्तार पार्टियों के आयोजन के लिए खर्च किया गया। यह भी आरोप है कि बोर्ड ने अपने प्रशासन में विभिन्न पदों पर कई गैर-हिंदुओं को भी नियुक्त किया है।
200 श्रद्धालु पहुंचे माता वैष्णो देवी के दरबार, चॉपर सेवा बहाल
श्री माता वैष्णो देवी की पवित्र यात्रा बुधवार को भी जारी है। 10वें दिन करीब 200 भक्तों ने भवन की ओर प्रस्थान किया। वहीं, बुधवार को चॉपर सेवा भी बहाल हो गई। मगर त्रिकुटा पर्वत पर छाई धुंध और बारिश के कारण दोपहर बाद सिर्फ दो ही उड़ाने भरी जा सकी हैं। उधर, रोपवे और बैटरी कार सेवा अन्य दिनों की तरह सुचारु रही है। दिनभर भवन मार्ग मां के जयकारों से गूंजता रहा।