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Jammu Kashmir: चुनावी वादों पर बढ़ी तकरार, गठबंधन में पड़ी दरार; कांग्रेस ने एनसी सरकार पर साधा निशाना

Wed, 15 Jul 2026 12:50 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 15 Jul 2026 12:50 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में चुनावी वादों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, जिससे गठबंधन में तनाव के संकेत मिल रहे हैं।

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Unfulfilled election promises could create a rift between the National Conference and the Congress.
फारुक अब्दुल्ला और सीएम उमर अब्दुल्ला - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस के बीच चुनावी वादों को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे के श्रेय की होड़ और अधूरे चुनावी वादों को लेकर कांग्रेस नेताओं की नाराजगी से दोनों सहयोगी दलों के बीच दूरी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

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कांग्रेसी नेताओं का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया जा रहा है। इस पर पार्टी नेताओं ने स्मार्ट मीटर, बेरोजगारी, संविदा कर्मियों को स्थायी करने और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। धरना-प्रदर्शनों में कांग्रेसियों ने खुलकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस नेता चाहे जो बयान दें, गठबंधन से जुड़े फैसले शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही तय होंगे। राष्ट्रीय स्तर पर हमारा समझौता इंडिया गठबंधन से है।

अक्तूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। चुनावी घोषणाओं में पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली सबसे प्रमुख मुद्दा था। इसके अलावा स्मार्ट मीटर हटाने, संविदा कर्मियों को नियमित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे वादे भी किए गए थे। चुनाव के बाद अंतत: बाहर से समर्थन दे रहे कांग्रेस के छह विधायकों के सहयोग से उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनी। कांग्रेस में उम्मीद थी चुनावी वादे पूरे होंगे लेकिन करीब दो साल बाद भी वादे पूरे न होने से वे निराश हैं। कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने कहा कि सहयोगी दल होने के नाते जनता को हमें जवाब देना पड़ता है। चुनाव के दौरान किए गए वादों पर जनता और विधायक दोनों सवाल उठा रहे हैं।

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अधूरे चुनावी वादों पर प्रदेश कांग्रेस के सवाल
  • पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के आंदोलन में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का आरोप।
  •  घर-घर लगाए गए स्मार्ट मीटर हटाने की मांग पूरी नहीं की गई।
  • वृद्धा और विधवा पेंशन में बढ़ोतरी नहीं हुई।
  • करीब 4500 बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोलने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
  • जम्मू को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए बड़ी योजना नहीं बनी।
  • पीरखो से महामाया और बावे माता मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना अधूरी है।
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स्थानीय नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर है हमारा गठबंधन : कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला कहते हैं कि चुनावी वादे पूरे नहीं होने से जनता में नाराजगी है। उनके प्रति हमारी भी जिम्मेदारी है और कांग्रेस उनकी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और एनसी का गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया ब्लॉक के तहत है। स्थानीय मुद्दों पर पार्टी अपनी बात रखेगी लेकिन अंतिम दिशा-निर्देश शीर्ष नेतृत्व से ही आएंगे और उसका पालन भी करेंगे।

स्थानीय कांग्रेसी नेता कुछ भी कहें पर होगा वही जो उनका शीर्ष नेतृत्व कहेगा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इंडिया ब्लॉक का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रदेश कांग्रेस के नेता कुछ भी बयान दें लेकिन होगा वही हो उनका शीर्ष
कांग्रेस नेतृत्व कहेगा और उन्हें बात माननी ही होगी।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर अंतिम फैसला 16 को लेगी प्रदेश सरकार
राज्य का दर्जा बहाल की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन की रणनीति पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) सरकार 16 जुलाई को अंतिम फैसला करेगी। प्रदर्शन की तिथि से पांच दिन पहले तक दिल्ली पुलिस से अनुमति नहीं मिलती है, तो सरकार और एनसी संगठन आगे की रणनीति तय करेंगे।

प्रदेश सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए दिल्ली पुलिस को आवेदन भेजा है, जिसकी जांच-परख जारी है। प्रदर्शन की अनुमति देना दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई है। इसमें भागीदारी के लिए देशभर के 52 राजनीतिक दलों को भी आमंत्रण भेजा गया है। सरकार का कहना है कि अनुमति मिले या नहीं, केंद्र तक मांग हर हाल में पहुंचाएंगे।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तय प्रक्रिया
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए किसी भी संगठन को दिल्ली पुलिस द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। आवेदन में संगठन का नाम, प्रदर्शन का उद्देश्य, तारीख और समय का उल्लेख जरूरी है। आयोजक का नाम, पता व मोबाइल नंबर भी देना होता है। सुरक्षा कारणों से इन नियमों का पालन जरूरी है। वर्तमान में जंतर-मंतर पर एक संगठन का प्रदर्शन जारी है जिसके लिए 17-18 जून को अनुमति दी गई थी और यह प्रदर्शन
20 जून से शुरू हुआ था।

एनसी ने सभी विकल्प रखे खुले
एनसी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, प्रदर्शन की अनुमति 16 जुलाई तक मिलने की उम्मीद है। अनुमति नहीं मिलती है, तब भी सभी विकल्प खुले हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा बहाली की मांग केंद्र तक हर हाल में पहुंचाई जाएगी। अगली रणनीति का खुलासा 16 जुलाई के बाद किया जाएगा।

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