J&K: आत्महत्या के मामलों में 13% बढ़ोतरी, नौकरी की तलाश में टूटते हौसले, सबसे ज्यादा बेरोजगारों ने दी जान
जम्मू-कश्मीर में 2023 में आत्महत्या के मामलों में 13% की बढ़ोतरी हुई है, जिनमें सबसे अधिक 48% मामले बेरोजगारों के हैं।मानसिक तनाव, पारिवारिक समस्याएं, प्रेम विफलता और आर्थिक तंगी आत्महत्या के प्रमुख कारण बनकर सामने आए हैं।
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जम्मू-कश्मीर में आत्महत्या की दर बढ़ी है। एक साल में 13 फीसदी की वृद्धि हुई है। आत्महत्या करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या बेरोजगारों की है। प्रदेश में 2022 में 323 लोगों ने आत्महत्या की। 2023 में यह संख्या 365 हो गई।
इन आत्महत्याओं में 48 फीसदी मामले सिर्फ बेरोजगार लोगों के हैं जो चिंताजनक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट में सामने आया है कि 2023 में 178 बेरोजगार लोगों ने जान दी। इनमें 114 पुरुष और 73 महिलाएं हैं। 2022 में यह संख्या कुल 84 थी जिनमें 58 पुरुष और 26 महिलाएं थीं। यानी कि बेरोजगार रहने का सबसे ज्यादा दबाव पुरुषों पर पड़ रहा है जिस कारण वे जीवन खत्म कर रहे हैं।
2023 की रिपोर्ट में आत्महत्या के अन्य कारणों में पारिवारिक समस्या, शादी में समस्या, प्रेम प्रसंग, परीक्षा में असफलता, बीमारी व मानसिक बीमारी प्रमुख हैं। 2022 की तुलना में इन सभी कारणों में वृद्धि हुई है जो चिंताजनक है।
बेरोजगार लोगों के बाद आत्महत्या के अन्य कारण पारिवारिक समस्या है। इसके चलते 60 लोगों ने खुदकुशी है जिसमें 34 पुरुष और 26 महिलाएं शामिल हैं। बीमारी के चलते 46 लोगों ने आत्महत्या की है जिसमें 29 पुरुष शामिल हैं।
इसी तरह मानसिक स्वास्थ्य के कारण 37 लोगों ने जीवन समाप्त किया है। इसमें भी पुरुषों की संख्या 26 है।
वर्ष 2022 की रिपोर्ट में 19 लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य के कारण आत्महत्या की। यहां भी वृद्धि दर्ज की गई है। कुल 365 आत्महत्याओं में सबसे ज्यादा 174 लोगों ने फांसी लगाकर तो 120 लोगों ने जहर खाकर जान दी है।
प्रेम प्रसंग भी बन रहा पुरुषों में आत्महत्या का कारण
नसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार प्रेम प्रसंग भी पुरुषों की आत्महत्या कारण बन रहा है। 2023 की रिपोर्ट में प्रदेश में प्रेम प्रसंग के चलते 40 लोगों ने जान दी है। इसमें 22 पुरुष और 18 महिलाएं हैं। 2022 की रिपोर्ट में प्रेम प्रसंग में आत्महत्या करने वाले सिर्फ 15 लोग थे जिनमें सात पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थीं।
इसके बाद एक साल में प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या की दर में 166 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। आर्थिक समस्या भी लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रही है। एक लाख कम आय वाले 241 लोगों ने जीवन लीला समाप्त की। इसमें 120 और 121 महिलाएं शामिल हैं। वहीं एक लाख और पांच लाख से अधिक आय वालों में 108 लोगों ने जान दी है जिसमें 78 पुरुष और 30 महिलाएं हैं। यानी कि आर्थिक तंगी भी आत्महत्या के प्रमुख कारणों में एक है।
आत्महत्या करने वालों में पुरुषों की संख्या इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि उनका आत्महत्या का तरीका काफी सटीक होता है। यानी वह उसमें कामयाब होते हैं। महिलाएं आत्महत्या का प्रयास ज्यादा करती हैं लेकिन सफल कम होती हैं। आत्महत्या सबसे ज्यादा फंदा लगाकर की जाती है। नींद की गोलियां व जहर खाना भी बड़ा कारण है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हमें और ज्यादा गंभीर होना होगा। 2022 के मुकाबले 2023 में आत्महत्या की दर बढ़ना चिंताजनक है। -डॉ. अखिल मीनिया, मनोचिकित्सक