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जम्मू-कश्मीर: खड्ड भूमि पर बनी कॉलोनियों के भूमि हस्तांतरण पर हाईकोर्ट में सरकार से जवाब मांगा

Sat, 20 Nov 2021 03:19 PM IST
विमल शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 20 Nov 2021 03:19 PM IST
सार

राज्य जल नीति के तहत जमीनों के तमाम रिकॉर्ड हस्तांतरित करने की अनुमति को अवैध करार देने वाले आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने सरकार से चार हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है। 

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transfer of the colonies built on the khad land, the Jammu and Kashmir court sought a response from the government
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

राज्य जल नीति के तहत जमीनों के तमाम रिकॉर्ड हस्तांतरित करने की अनुमति को अवैध करार देने वाले आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय में जस्टिस सिंधु शर्मा ने सरकार से चार हफ्तों के भीतर जवाब देकर अपनी आपत्ति दायर करने को कहा है। 

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अक्तूबर 2020 में जारी वित्त आयुक्त के आदेश से जेडीए, हाउसिंग बोर्ड और रियल एस्टेट के निजी बिल्डरों द्वारा तैयार आवासीय कॉलोनियों में घर बनाने वालों में कई आशंकाएं हैं। इन कॉलोनियों के लिए जमीन को वर्ष 2017 में जल नीति के तहत एक आदेश के तहत हस्तांतरित किया गया था।

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यह कॉलोनियां जम्मू शहर के रूपनगर, सैनिक कॉलोनी, ग्रेटर कैलाश, बीरपुर, छन्नी और बनतालाब में बनाई गईं कॉलोनियों में बनी हैं। आदेश में यह भी कहा गया था कि ऐसी भूमि के हस्तांतरण के लिए किसी भी लेन-देन को पंजीकरण के लिए कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

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उच्च न्यायालय ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यदि आपत्तियां दर्ज नहीं की जाती हैं, तो मामले के गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि शहर में कई कॉलोनियां ऐसी जमीन पर बनी हैं, जिनकी राजस्व रिकॉर्ड में भूमि गैर मुमकिन खड्ड दर्शाई गई है।

 

आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में कहा गया है कि वित्त आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश से बड़े पैमाने पर जमीन की स्थिति पर भ्रम पैदा हो गया है। लोगों में डर का माहौल बन गया है। बड़ी संख्या में लोगों ने इस जमीन पर लोन लेकर घर बनाए हैं।  

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