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Jammu News: बस अड्डे से मुख्य मंदिर रोड को लेकर की चर्चा
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पर्यटन विभाग के सचिव ने किया पुरमंडल व उत्तरवाहिनी का दौरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। पयर्टन विभाग के सचिव डॉ. सैयद आबिद राशिद शाह ने रविवार को पुरमंडल और उत्तरवाहिनी का दौरा कर विकास कार्यों का जायजा लिया। इसका उद्देश्य इन दोनों तीर्थ स्थलों को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से और बेहतर तरीके से विकसित करना था। उन्होंने पुरमंडल बस अड्डे से मुख्य मंदिर तक रोड को लेकर चर्चा की जो देविका के किनारे बनाया जाना है।
लोगों को जानकारी दी कि सड़क पर पर्यटकों के लिए कुछ व्यू प्वाइंट भी बनाए जाएंगे, ताकि लोग यहां आने पर एक सुखद एहसास की अनुभूति कर सकें। मौके पर उनके संयुक्त निदेशक पर्यटन सुनैना शर्मा, डीसी सांबा अनुराधा गुप्ता, मानसर-सुरुईंसर विकास प्राधिकरण के सीईओ, आदि उपस्थित थे। स्थानीय लोगों ने पुरमंडल उत्तरवाहिनी के दौरे पर आए सचिव को भरोसा दिलाया कि वे विभाग के साथ हैं, और विकास चाहते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने की बहुत जरूरत है। इसे दशकों से नजरअंदाज किया जा रहा है।
लोगों ने पुरमंडल-उत्तरवाहिनी के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 2014 में बनाई परियोजना के शुरू न होने पर निराश व्यक्त की। इस परियोजना के अंतर्गत 51 करोड़ रुपये की लागत से प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार होना था, लेकिन यह काम कभी शुरू ही नहीं हो पाया। लोगों ने प्रशासन और केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस लंबित परियोजना को मंजूरी दी जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। पयर्टन विभाग के सचिव डॉ. सैयद आबिद राशिद शाह ने रविवार को पुरमंडल और उत्तरवाहिनी का दौरा कर विकास कार्यों का जायजा लिया। इसका उद्देश्य इन दोनों तीर्थ स्थलों को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से और बेहतर तरीके से विकसित करना था। उन्होंने पुरमंडल बस अड्डे से मुख्य मंदिर तक रोड को लेकर चर्चा की जो देविका के किनारे बनाया जाना है।
लोगों को जानकारी दी कि सड़क पर पर्यटकों के लिए कुछ व्यू प्वाइंट भी बनाए जाएंगे, ताकि लोग यहां आने पर एक सुखद एहसास की अनुभूति कर सकें। मौके पर उनके संयुक्त निदेशक पर्यटन सुनैना शर्मा, डीसी सांबा अनुराधा गुप्ता, मानसर-सुरुईंसर विकास प्राधिकरण के सीईओ, आदि उपस्थित थे। स्थानीय लोगों ने पुरमंडल उत्तरवाहिनी के दौरे पर आए सचिव को भरोसा दिलाया कि वे विभाग के साथ हैं, और विकास चाहते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने की बहुत जरूरत है। इसे दशकों से नजरअंदाज किया जा रहा है।
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लोगों ने पुरमंडल-उत्तरवाहिनी के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 2014 में बनाई परियोजना के शुरू न होने पर निराश व्यक्त की। इस परियोजना के अंतर्गत 51 करोड़ रुपये की लागत से प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार होना था, लेकिन यह काम कभी शुरू ही नहीं हो पाया। लोगों ने प्रशासन और केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस लंबित परियोजना को मंजूरी दी जाए।
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