फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   The pain of teachers of Jammu and Kashmir: Feed data in the app... or teach the children, they said- became da

जम्मू कश्मीर के शिक्षकों का दर्द: एप में डाटा फीड करे... या बच्चों को पढ़ाएं, कहा- बन गए डेटा एंट्री ऑपरेटर

Mon, 14 Jul 2025 05:33 PM IST
निकिता गुप्ता सतीश वालिया अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
सतीश वालिया अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Mon, 14 Jul 2025 05:33 PM IST
सार

सरकारी स्कूलों के शिक्षक 13 अलग-अलग एप पर डेटा भरने के बोझ से परेशान हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों ने मांग की है कि या तो स्टाफ बढ़ाया जाए या क्लर्कों की नियुक्ति की जाए।

विज्ञापन
The pain of teachers of Jammu and Kashmir: Feed data in the app... or teach the children, they said- became da
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI generated

विस्तार

यह शिक्षकों का दर्द है... सरकारी स्कूलों में गुरुजी बाबू बनकर रह गए हैं। ऐसा इसलिए है कि शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को 13 एप का काम सौंपा है। इन एप पर काम निपटाने में ही अध्यापकों के छह घंटे बीत जा रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।जम्मू-कश्मीर टीचर्स फोरम के अनुसार, इसके लिए सरकार को स्टाफ की संख्या बढ़ानी चाहिए, या क्लर्कों की नियुक्ति करनी चाहिए।

विज्ञापन


फोरम ने कहा कि मिडिल स्कूलों में सबसे ज्यादा काम शिक्षकों को मिड डे मील (स्विफ्ट एप) और पोषण एप करना पर रहा है। सुबह बच्चों का रिकाॅर्ड एप में अपलोड करना पड़ रहा है। इसमें करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। दोपहर को भोजन का मेन्यू अपलोड कर वर्ग बार छात्रों की संख्या भरनी पड़ रही है।
विज्ञापन


इसमें दो घंटे लग रहे हैं, जो समय बचा इसमें छात्रों की हाजिरी और खुद की हाजिरी को ऑनलाइन करना पड़ता है। कुल मिलाकर पांच से साढ़े पांच घंटे एक अध्यापक के खर्च हो रहे हैं। हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी इस एप में बच्चों की हाजिरी, संख्या सहित कई विवरण भरे जा रहे हैं। इन स्कूलों में भी एक से दो अध्यापक हर रोज इसी काम में व्यस्त रहते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में स्मार्ट जेके स्मार्ट अटेंडेंस एप के माध्यम से अध्यापकों को हाजिरी लगानी होती है। इसके बाद बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने के लिए जाना पड़ता है। फिर से अध्यापकों को रजिस्ट्रर में हाजिर लगाकर प्रिंसिपल को देना होता है। यह प्रक्रिया दो बार होती है। इसमें अध्यापकों के रोज 15 से 20 मिनट जाया जा रहे हैं। इसी तरह मासिक, माह और साल भर में एप भरने पर काम चलता है। 

ये काम भी रोज
इसमें अलग-अलग तरह के रिकाॅर्ड जैसे पैन नंबर, आधार कार्ड, एससी, एसटी छात्रों की जानकारी, स्काॅलरशिप के लिए दस्तावेज अपलोड करने में काम चलता है।

इतने अध्यापक रहते रोज व्यस्तमिडिल स्कूलों में एक से दो अध्यापक तो हायर सेकंडरी स्कूलों में तीन से चार अध्यापक हर रोज एप का काम निपटाते हैं। इससे कक्षाओं में पढ़ाने का काम रुक जाता है। बच्चों के लिए विकल्पित तौर पर दूसरे अध्यापकों की ड्यूटी लगानी पड़ती है।

ये एप चल रहे स्कूलों में एप   
एप     प्रयोग  काम
जेके पोषण   प्रतिदिन  बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की जानकारी
मिड डे मील प्रतिदिन  मिड डे मील रिकाॅर्ड
पैन एप प्रतिदिन  बच्चों के पैन, आधार कार्ड दर्ज करना
जेके स्मार्ट अटेंडेंस प्रतिदिन अध्यापकों की हाजिरी
समीक्षा माह   बच्चों की पढ़ाई का फीडबैक
ईपीएम माह   ध्यापकों को अपना रिकाॅर्ड भरना होता है 
आधारशिला  साल साल बच्चों की हाजिरी, दूसरे स्कूल में जाने का रिकाॅर्ड
पीएफ एमएस पोर्टल  साल पीएफ से संबंधित आवेदन 
नेशनल अवाॅर्ड पोर्टल साल अपनी उपलब्धियों के साथ अवाॅर्ड के लिए आवेदन करना
इंस्पायर एप साल साइंस संकाय के छात्रों की प्रतिभा निखारने के लिए
एनएमएमएस साल छात्रवृत्ति के लिए छात्र आवेदन करते
एससी, एसटी स्काॅलरशिप साल  छात्रवृत्ति के लिए आवेदन
स्काॅलरशिप एप साल छात्रवृत्ति के लिए आवेदन

स्टाफ कम, ऊपर से एप की जिम्मेदारीजम्मू-कश्मीर टीचर्स फोरम के चीफ पैट्रर्न गणेश खजुरिया ने कहा कि स्कूलों में पहले ही स्टाफ कम है। ऊपर से एप पर काम करने की जिम्मेदारी है। एप पर हर रोज रिकाॅर्ड अपडेट करना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

कई प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सिर्फ दो-दो अध्यापक हैं। एक अध्यापक रिकाॅर्ड मेन्टेन करने में लगा रहता है तो दूसरा अन्य कामों में। बच्चों को कब पढ़ाएंगे। ग्रामीण इलाकों के हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी स्टाफ की कमी है। एप लागू होने के बाद स्टाफ की संख्या बढ़ानी चाहिए, या इसके लिए क्लर्क नियुक्ति किए जाएं। तभी काम और पढ़ाई हो पाएगी।

फोरम के चेयरमैन मोहम्मद शफी राथर ने कहा कि पहले प्राइमरी स्कूलों में अध्यापकों की संख्या बढ़ाई जाए। अध्यापकों का सरकारी काम निपटाने में ही समय बीत जाता है।

सरकारी स्कूलों में एप को भरना जरूरी है। इस बारे में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए हैं। इनसे स्कूलों से संबंधित काम की जानकारी निदेशालय को मिलती है। मुश्ताक अहमद, डिप्टी डायरेक्टर, शिक्षा विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed