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जम्मू के पंपों पर मशीनें बंद: रसोई गैस के बाद अब पेट्रोल-डीजल के लिए मारामारी, कई पंप की क्रेडिट लिमिट खत्म

Sat, 28 Mar 2026 11:13 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sat, 28 Mar 2026 11:13 AM IST
सार

जम्मू में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई घटने और तेल कंपनियों द्वारा क्रेडिट सुविधा बंद करने से कई पंपों पर संकट गहरा गया है। इसका असर ट्रांसपोर्ट और निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है।

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The crisis of petrol and diesel has started deepening at many places from the city to the highway.
बिक्रम चौक के पास एक पेट्रोल पंप में सन्नाटा। - फोटो : संवाद

विस्तार

रसोई गैस की किल्लत से जूझ रही जनता के लिए अब एक और बुरी खबर है। शहर से लेकर हाईवे पर कई स्थानों पर पेट्रोल-डीजल का संकट गहराने लगा है। पेट्रोलियम कंपनियों ने पंप संचालकों की क्रेडिट लिमिट खत्म करके उधार तेल देने से मना कर दिया। इससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। हालत यह है कि डिमांड के मुकाबले आधी सप्लाई ही मिल पा रही है, जिससे कई पंपों पर नो स्टॉक के बोर्ड तो नहीं लगे, लेकिन मशीने बंद कर सेल्समैन को दूसरे काम में लगा दिया गया है।

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पेट्रोलियम कंपनियों ने पंप संचालकों की पुरानी क्रेडिट व्यवस्था पर रोक लगा दी है। डीलर्स का कहना है कि पहले तेल कंपनियां एक निश्चित समय के लिए उधार या क्रेडिट पर सप्लाई देती थीं, लेकिन अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। लिमिट समाप्त होने के कारण संचालकों को तुरंत भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे उनके सामने नकदी का संकट खड़ा हो गया है।
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जम्मू एंड कश्मीर पेट्रोलियम डीलर एसोसिशन का प्रतिनिधिमंडल डिवीजन कमिश्नर से मुलाकात करके समस्याओं से अवगत कराया। साथ ही इंडियन, भारत और हिंदुस्तान कपंनी के अधिकारियों से मुलाकात करके समस्या का समाधान कराने को कहा है। डिवीजन कमिश्नर से मुलाकात करने वाले पंप संचालकों में राहुल गुप्ता, चेतन कोहली, विकास भंडारी, वरुण सर्राफ सहित अन्य उपस्थित रहे। 

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24 घंटे में ही खत्म हो जा रहा पेट्रोल डीजल:
इन दिनों पेट्रोल-डीजल की खपत में भारी उछाल आया है। सप्लाई कम होने की वजह से पंपों का स्टॉक 24 घंटे भी नहीं टिक पा रहा है। ग्रामीण इलाकों के पंपों पर स्थिति और भी खराब है, जहां तेल खत्म होने के बाद अगले टैंकर के आने में दो से तीन दिन का समय लग रहा है। शहर के विक्रम चौक पर एक पंप पर तीन दिनों से क्रेडिट लिमिट समाप्त होने की वजह से आयल कंपनी ने सप्लाई रोक रखी है।

ये हैं तीन बड़े कारण
क्रेडिट लिमिट का समय कम होना:
कंपनियां पहले डीलर्स को 7 से 15 दिन की क्रेडिट लिमिट देती थीं। अब इसे बंद कर दिया गया है।

सप्लाई में भारी कटौती:
अगर किसी शहर की रोजाना खपत 50 हजार लीटर है, तो कंपनियों की ओर से मात्र 20 से 25 हजार लीटर ही भेजा जा रहा है। दो गाड़ी मांगो तो एक मिल रही है का फॉर्मूला लागू है।

कैश फ्लो का संकट:
अचानक नकद भुगतान की शर्त से छोटे पंप संचालक तेल नहीं उठा पा रहे हैं, जिससे उनके नोजल बंद हो गए हैं।

डीजल महंगा, कारोबारियों पर 150 करोड़ से ज्यादा का सालाना बोझ
कामर्शियल डीजल के दाम में 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का असर अब जम्मू-कश्मीर के कारोबार पर साफ नजर आने लगा है। प्रदेश में कुल डीजल खपत और राष्ट्रीय ट्रेंड के आधार पर अनुमान है कि कारोबारियों पर सालाना 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत काम करने वाली पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में डीजल की सालाना खपत करीब 9 लाख टन के आसपास बनी हुई है। कुल खपत का सीमित हिस्सा ही कमर्शियल या इंडस्ट्रियल उपयोग में आता है, जो पिछले कुछ वर्षों में 10 से 13 फीसदी के बीच रहा है। इसी आधार पर प्रदेश में करीब 80 से 90 हजार टन डीजल कमर्शियल गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। इस पर 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू होने से कारोबारियों की लागत में सालाना करीब 150 से 180 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

महंगाई पर भी पड़ेगा असर, आम आदमी भी होगा प्रभावित: अर्थशास्त्री फालेन्द्र सूदन का कहना है कि प्रदेश में इसका असर अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा होगा। जम्मू-कश्मीर अधिकांश जरूरी वस्तुओं के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर है और यहां बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, सब्जियां, सीमेंट और उपभोक्ता सामान बाहर से ही आता है। प्रदेश में माल ढुलाई की लागत पहले ही देश के कई हिस्सों की तुलना में अधिक है। डीजल महंगा होने का असर पूरी सप्लाई चेन पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो उसका असर थोक बाजार से लेकर खुदरा कीमतों तक दिखता है। आने वाले समय में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

सबसे पहले ट्रांसपोर्ट पर असर
डीजल महंगा होने का पहला असर माल ढुलाई पर दिख रहा है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक संचालन लागत बढ़ने से किराया बढ़ाना मजबूरी हो गया है। इससे बाजार में पहुंचने वाले सामान की कीमतों पर सीधा दबाव पड़ेगा। जम्मू के ट्रांसपोर्ट कारोबारी संजय गुप्ता कहते हैं कि डीजल के दाम बढ़ने से गाड़ियों का खर्च काफी बढ़ गया है। किराया बढ़ाना पड़ रहा है, नहीं तो घाटा उठाना पड़ेगा। इसका असर हर सामान की कीमत पर पड़ेगा। निर्माण क्षेत्र पर भी असर पड़ रहा है। 

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