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JK: पहाड़ी इलाकों में तैनात पुलिस निशाने पर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 08 Aug 2015 12:18 PM IST
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उधमपुर जिले के बसंतगढ़ की संग पुलिस पोस्ट पर आतंकी हमला राज्य पुलिस के लिए खतरे की घंटी है। पहले भी यह आशंका जताई जा चुकी है कि पहाड़ी इलाकों में तैनात पुलिस को आतंकी अपना निशाना बना सकते है।
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इसका सबसे बड़ा कारण इन क्षेत्रों में पुलिस का सुरक्षा तंत्र अधिक मजबूत न होना है। आतंकमुक्त इलाका माने जाने वाले उधमपुर और रियासी जिलों के पहाड़ी इलाकों पर 50 से अधिक पुलिस चौकियां ऐसी हैं, जो पूरी तरह से एसपीओ के सहारे चलती हैं।
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इन एसपीओ के पास न तो व्यापक हथियार हैं और न ही खुद को बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासी जिले में 25, उधमपुर में 35-40, रामबन में 20, कठुआ में 15-20 से अधिक पुलिस पोस्टों या फिर पुलिस के नाकों पर एसपीओ ही तैनात हैं।
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यहां पर एक कांस्टेबल तक तैनात नहीं। संग पुलिस पोस्ट पर भी पांच एसपीओ तैनात हैं, जबकि एक कांस्टेबल भी नहीं। इन क्षेत्रों में एक दशक से आतंकी हमले होने की घटनाएं बंद हैं।
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि पुलिस की इस कमजोर कार्यप्रणाली का लाभ उठाकर आतंकी पहाड़ों पर बनाई पुलिस पोस्ट और नाकों को निशाना बना सकते हैं।
संग पुलिस पोस्ट पर हुए हमले ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं। राज्य पुलिस इस पर मंथन करने में जुटी हुई है। पुलिस इन इलाकों में सुरक्षा को पुख्ता करने की रणनीति बनाने में जुट गई है।
पहाड़ी इलाकों में एसपीओ के सहारे चलने वाली पुलिस पोस्टों पर मजबूत सुरक्षा तंत्र उपलब्ध कराने पर विचार चल रहा है। सूत्रों की मानें तो अधिकतर एसपीओ के पास पुरानी 12 बोर की गन और अपर्याप्त बुलेट प्रूफ जैकेट हैं, जो सुरक्षा में बड़ी सेंध हैं। कुछेक स्थानों पर ही एके 47 हैं।