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Jammu News: पाकिस्तान से लौटे स्थानीय आतंकियों की मदद से हमले कर रहे विदेशी आतंकी
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- कठुआ बार्डर से घुसपैठ से लेकर किश्तवाड़ तक पहुंचने के पुराने रूट की सटीक जानकारी
- रूट पर छिपने के ठिकानों से लेकर रिहायाशी इलाकों और सेना की गैर मौजूदगी वाले क्षेत्रों की भी जानकारी
- कठुआ से किश्तवाड़ तक 16 दहशतगर्द सक्रिय, छह से 10 के ग्रुप में बंटे, हर ग्रुप के साथ दो स्थानीय आतंकी
अजय मीनिया
जम्मू। आतंकियों के घात लगाकर हमला करने के पीछे एक बड़ी रणनीति काम कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कठुआ से किश्तवाड़ तक सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों ने अपने साथ कुछेक स्थानीय आतंकवादियों को रखा हुआ है। ये आतंकी लंबे समय के बाद पाकिस्तान में रहकर वापस लौटे हैं, जिन्हें सीमा पार से घुसपैठ करने से लेकर किश्तवाड़ रामबन तक पहुंचने के पुराने रूट की सटीक जानकारी है। इन आतंकियों को पता है कि पुराने रूट पर कहां-कहां रिहायशी इलाके हैं। कहां छिपने की जगह है। यह भी पता है कि 12 हजार किलोमीटर वर्ग जंगल में कहां-कहां सेना की मौजूदगी नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर हमला कर रहे हैं। कठुआ से किश्तवाड़ के जंगल तक 16 आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी खुफिया एजेंसियों के पास है। ये 16 आतंकी छह से 10 की संख्या में दो ग्रुप में बंटे हुए हैं। हर एक ग्रुप के साथ एक से दो ऐसे आतंकी हैं, जो कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़ के रहने वाले हैं।
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दिन में रेकी करने वाले गाइड का इस्तेमाल
सैन्य सूत्रों का कहना है कि इन आतंकियों ने अपने साथ ऐसे गाइड जोड़े हैं, जो दिन में रेकी करते हैं। सैन्य वाहनों, पर्यटकों और धार्मिक स्थलों पर आने-जाने वाले वाहनों की जानकारी जुटाते हैं। आम लोगों के बीच रहकर उनकी दिनचर्या की जानकारी लेते हैं। फिर आतंकियों से इसे साझा कर देते हैं। इसी के हिसाब से आतंकी घात लगाते हैं। हमला करने का समय दोपहर 3 से शाम 6 बजे के बीच चुनते हैं, ताकि गाइड इन्हें चुनी गई जगह पर समय से पहुंचाएं। हमला करने के बाद समय पर भागने में सफल हो जाए। यह सब दिन के समय होता है, ताकि हमले के बाद पकड़े न जाएं। रात होने से पहले अपने ठिकाने तक पहुंच जाएं।
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सात से आठ घंटे की विंडो
सूत्रों का कहना है कि घात लगाकर हमला करने के लिए आतंकी सात से आठ घंटे की विंडो एक्टीवेट करते हैं। इस विंडो का मतलब होता है कि किसी एक क्षेत्र में सात से आठ घंटे तक बैठे रहना। पता होता है कि उस जगह पर कोई नहीं आएगा। हमले के लिए यह जगह सबसे मुफीद होती है। आतंकियों को पांच से छह गाइड पल-पल जानकारी दे रहे होते हैं। बताया जाता है कि उनका टारगेट कहां पर पहुंचा। जानकारी इतनी सटीक रहती है कि हमला करने के लिए 15 से 20 मिनट ही लेते हैं।
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हमला कहीं भी, रणनीति एक जैसी
बताते चलें कि पुंछ में सैन्य वाहन पर हमले, सुरनकोट के पास वायुसेना के हमले, रियासी में बस पर हमला और अब कठुआ में हमला एक ही तरीके से किया गया। आतंकी सबसे पहले बस या अन्य वाहन के सामने आते हैं। चालक को गोली मारते हैं। इसके बाद चारों ओर से गोलियां बरसाते हैं।
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- रूट पर छिपने के ठिकानों से लेकर रिहायाशी इलाकों और सेना की गैर मौजूदगी वाले क्षेत्रों की भी जानकारी
- कठुआ से किश्तवाड़ तक 16 दहशतगर्द सक्रिय, छह से 10 के ग्रुप में बंटे, हर ग्रुप के साथ दो स्थानीय आतंकी
अजय मीनिया
जम्मू। आतंकियों के घात लगाकर हमला करने के पीछे एक बड़ी रणनीति काम कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कठुआ से किश्तवाड़ तक सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों ने अपने साथ कुछेक स्थानीय आतंकवादियों को रखा हुआ है। ये आतंकी लंबे समय के बाद पाकिस्तान में रहकर वापस लौटे हैं, जिन्हें सीमा पार से घुसपैठ करने से लेकर किश्तवाड़ रामबन तक पहुंचने के पुराने रूट की सटीक जानकारी है। इन आतंकियों को पता है कि पुराने रूट पर कहां-कहां रिहायशी इलाके हैं। कहां छिपने की जगह है। यह भी पता है कि 12 हजार किलोमीटर वर्ग जंगल में कहां-कहां सेना की मौजूदगी नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर हमला कर रहे हैं। कठुआ से किश्तवाड़ के जंगल तक 16 आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी खुफिया एजेंसियों के पास है। ये 16 आतंकी छह से 10 की संख्या में दो ग्रुप में बंटे हुए हैं। हर एक ग्रुप के साथ एक से दो ऐसे आतंकी हैं, जो कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़ के रहने वाले हैं।
दिन में रेकी करने वाले गाइड का इस्तेमाल
सैन्य सूत्रों का कहना है कि इन आतंकियों ने अपने साथ ऐसे गाइड जोड़े हैं, जो दिन में रेकी करते हैं। सैन्य वाहनों, पर्यटकों और धार्मिक स्थलों पर आने-जाने वाले वाहनों की जानकारी जुटाते हैं। आम लोगों के बीच रहकर उनकी दिनचर्या की जानकारी लेते हैं। फिर आतंकियों से इसे साझा कर देते हैं। इसी के हिसाब से आतंकी घात लगाते हैं। हमला करने का समय दोपहर 3 से शाम 6 बजे के बीच चुनते हैं, ताकि गाइड इन्हें चुनी गई जगह पर समय से पहुंचाएं। हमला करने के बाद समय पर भागने में सफल हो जाए। यह सब दिन के समय होता है, ताकि हमले के बाद पकड़े न जाएं। रात होने से पहले अपने ठिकाने तक पहुंच जाएं।
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सात से आठ घंटे की विंडो
सूत्रों का कहना है कि घात लगाकर हमला करने के लिए आतंकी सात से आठ घंटे की विंडो एक्टीवेट करते हैं। इस विंडो का मतलब होता है कि किसी एक क्षेत्र में सात से आठ घंटे तक बैठे रहना। पता होता है कि उस जगह पर कोई नहीं आएगा। हमले के लिए यह जगह सबसे मुफीद होती है। आतंकियों को पांच से छह गाइड पल-पल जानकारी दे रहे होते हैं। बताया जाता है कि उनका टारगेट कहां पर पहुंचा। जानकारी इतनी सटीक रहती है कि हमला करने के लिए 15 से 20 मिनट ही लेते हैं।
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हमला कहीं भी, रणनीति एक जैसी
बताते चलें कि पुंछ में सैन्य वाहन पर हमले, सुरनकोट के पास वायुसेना के हमले, रियासी में बस पर हमला और अब कठुआ में हमला एक ही तरीके से किया गया। आतंकी सबसे पहले बस या अन्य वाहन के सामने आते हैं। चालक को गोली मारते हैं। इसके बाद चारों ओर से गोलियां बरसाते हैं।