आतंकवाद को मात दे रहे कश्मीरी बच्चों के बुलंद हौसले
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बच्चों के बुलंद हौसले आतंकियों, उपद्रवियों और अलगाववादियों को मात दे रहे हैं। कश्मीर में तमाम विरोध के बावजूद दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में 99 फीसदी उपस्थिति से यह साबित हो गया है कि शिक्षा क्षेत्र में अंधकार फैलाने की साजिश कभी सफल नहीं हो सकेगी।
उपद्रव और हिंसा के दौर में भी तालीम हासिल करने के बच्चों के जज्बे को कुचला नहीं जा सका। स्कूल जलाए गए। उपद्रवियों ने प्रायोजित विरोध प्रदर्शन किया लेकिन र्कोई भी साजिश बच्चों के स्कूल की ओर बढ़ते कदमों को रोक नहीं पाई।
कश्मीर में स्कूलों को खोलने और परीक्षाएं आयोजित करने की जिद के कारण आतंकियों की हिट लिस्ट में आए जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर कहते हैं कि कश्मीर की अवाम ने तमाम महकमों को यह संदेश दे दिया है कि वे बच्चों की तालीम के मसले पर किसी से कोई समझौता नहीं करने वाले हैं। शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि बार्डर और एलओसी पर लगातार सीजफायर उल्लंघन से जम्मू संभाग के बच्चों को भी नुकसान उठाना पड़ा है।
'हिंसा के दौर में 1,60,000 से अधिक बच्चों ने कोचिंग से कोर्स पूरा किया'
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकी हमले के बाद भी स्कूल बंद हुए। हर बार हिंसा और उपद्रव का खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ता है।रियासत सरकार ने बच्चों और अभिभावकों को इस परेशानी को बड़ी शिद्दत से महसूस किया है।
बार्डर और एलओसी के स्कूलों में विशेष कक्षाएं आयोजित कर इस भरपाई की जाएगी। कश्मीर में उपद्रवियों द्वारा 28 से अधिक स्कूलों को जलाए जाने के मसले पर अख्तर ने कहा कि फिर से भवन बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में आने वाली लागत के बारे में आकलन किया जा रहा है। केंद्र सरकार भी इसमें मदद करेगी।
फिलहाल पढ़ाई जारी रखने के लिए जले स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में एडजस्ट किया गया है। इससे पहले बाढ़ के वक्त भी सात महीनों तक स्कूल बंद रहे थे। तब बच्चों ने छुट्टियां रद्द कर पढ़ाई की। इस बार हिंसा के दौर में 1,60,000 से अधिक बच्चों ने कोचिंग से कोर्स पूरा किया। अभिभावकों के सहयोग के बगैर यह संभव नहीं था।
जल्द होंगी ढ़ाई हजार शिक्षकों को भर्तियां
शिक्षा मंत्री ने कहा कि रियासत में ढाई हजार शिक्षकों की भर्तियां जल्द होंगी। भर्ती प्रक्रिया चल रही है। जम्मू और श्रीनगर शहरों में शिक्षकों की संख्या जरूरत से ज्यादा है और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है।
इसलिए नई भर्तियों में ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।