बड़े धमाके की साजिश नाकाम: किश्तवाड़ में आतंकी ठिकाना ध्वस्त, एक किलो आरडीएक्स के साथ हथियारों का जखीरा बरामद
किश्तवाड़ के सिग्दी भाट्टा इलाके में सुरक्षाबलों ने कार्रवाई कर एक आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया और भारी मात्रा में हथियार व विस्फोटक बरामद किए।
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जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले के सिग्दी भाट्टा इलाके में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आतंकी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया है। मौके से एक कार्बाइन, एक किलो आरडीएक्स, पिस्टल और बड़ी मात्रा में कारतूस मिले हैं। तलाशी अभियान में हथियारों का जखीरा मिलने से यह साफ है कि आतंकी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में थे।
रक्षा सूत्रों के अनुसार पुख्ता इनपुट के आधार पर शुक्रवार को राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सिग्दी भाट्टा के जंगल में संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। इसमें एक संदिग्ध आतंकी ठिकाने का पता चला।
आतंकी ठिकाने से एक कार्बाइन राइफल, एक किलोग्राम विस्फोटक, पिस्टल और मैगजीन सहित नाै एमएम के 97, 7.62 एमएम के 18 और 51 एमएम यूबीजीएल कारतूस, चार डेटोनेटर तथा एक वॉकी-टॉकी मिला है। हथियारों का यह जखीरा आतंकियों ने एक गुप्त ठिकाने पर छिपाकर रखा था। इसका इस्तेमाल लॉजिस्टिक सपोर्ट या किसी बड़े हमले को अंजाम देने के लिए किया जाना था।
आतंकी ठिकाना ध्वस्त करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के जवान इलाके की घेराबंदी कर दहशतगर्दों की तलाश में चप्पा-चप्पा खंगाल रहे हैं। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में तलाशी अभियान जारी है और पूरे नेटवर्क को खत्म करने के प्रयास जारी हैं।
फरवरी में छात्रू में हुई मुठभेड़ से जोड़कर देखी जा रही बरामद विस्फोटक सामग्री
सूत्रों के अनुसार यह बरामदगी इसी साल चार फरवरी को जिले के छात्रू इलाके में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ से जुड़ी हो सकती है। इसमें आतंकी नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इलाके में आतंकी गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करने की साजिश रची जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस ऑपरेशन को एक बड़ी कामयाबी बताया है। उनका कहना है कि समय रहते इस हथियारों के जखीरे को बरामद कर एक बड़ी आतंकी साजिश को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया है।
किश्तवाड़ के मुगल मैदान और छात्रू जैसे इलाके संवेदनशील :
बता दें कि किश्तवाड़ का मुगल मैदान, छात्रू और आसपास के दुर्गम वन क्षेत्र लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संपर्क व्यवस्था के कारण ये इलाके आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाने माने जाते रहे हैं। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों की ओर से लगातार चलाए जा रहे अभियानों से आतंकी नेटवर्क को लगातार कमजोर किया जा रहा है।