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J&K: हकूरा मुठभेड़ में मारे गए आतंकी तौफीक का ISIS से था कनेक्शन
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय,अमर उजाला,जम्मू
Updated Sat, 17 Mar 2018 11:43 AM IST
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isis
- फोटो : डेमो फोटो
हकूरा मुठभेड़ में आतंकी मोहम्मद तौफीक उर्फ अबु जर्र अल हिंदी के मारे जाने के बाद अब घाटी में आईएसआईएस के मौजूदगी की आहट और तेज हो गई है। आतंकी तौफीक के तार अब आईएसआईएस से जुड़ते नजर आ रहे हैं। बारह मार्च को मारे जाने के बाद से ही उसकी पहचान संदिग्ध थी।
इसी बीच सुरक्षा एजेंसियों को पता चला की मारा गया तीसरा आतंकी तौफीक है और वो हैदराबाद से है। पुलिस ने इस मामले में जैसे ही जांच तेज की उसकी एक एक राज से पर्दा उठता गया। पुलिस के ओर से जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार तौफीक सोशल मीडिया के जरिए आईएसआईएस की विचार धारा से प्रेरित था।
इसके बाद वह कश्मीर घाटी में आकर के संपर्क में आया था। जिसके बाद उसने कश्मीर आकर आईएसआईएस की छुपपुट आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहने लगा। गौरतलब है कि बारह मार्च को दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के हकूरा मुठभेड़ तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया।
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इनमें दो स्थानीय आतंकी थे। इस एनकाउंटर में मारे गए दो आतंकियों का संबंध तहरीक उल मुजाहिदीन तथा हिजबुल मुजाहिदीन से था। जबकि तीसरे की पहचान नहीं हो सकी थी। हालांकि बाद में पुलिस की ओर से खुद इस बात को कबूल किया गया कि तीसरा आतंकी तौफीक घाटी में हैदराबाद से था।
वह घाटी में आईएसआईएस की गतिविधियों को शामिल था। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों पहले अमाक न्यूज एजेंसी ने मुताबिक श्रीनगर के बिलाल कालोनी में हुर्रियत नेता के घर पर हमला कर पुलिसकर्मी की हत्या के पीछे आईएसआईएस का हाथ बताया गया है।
आईएसआईएस इसके पहले जकुरा हमले के पीछे अपना हाथ बताया था। दोनों ही आतंकी घटनाओं में आईएस का हाथ होने की बात को राज्य पुलिस और गृह मंत्रालय की ओर से नकार दिया गया था।
हालांकि आईएस की मौजूदगी के सवालों पर राज्य पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद ने कहा था की घाटी में आईएस की मौजूदगी साफ तौर पर नहीं है। लेकिन घाटी के कई आतंकी आईएस से प्रभावित है। अब छिटपुट गतिविधियों को आतंकवाद के समीकरण में बड़े बदलाव का संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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इसी बीच सुरक्षा एजेंसियों को पता चला की मारा गया तीसरा आतंकी तौफीक है और वो हैदराबाद से है। पुलिस ने इस मामले में जैसे ही जांच तेज की उसकी एक एक राज से पर्दा उठता गया। पुलिस के ओर से जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार तौफीक सोशल मीडिया के जरिए आईएसआईएस की विचार धारा से प्रेरित था।
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इसके बाद वह कश्मीर घाटी में आकर के संपर्क में आया था। जिसके बाद उसने कश्मीर आकर आईएसआईएस की छुपपुट आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहने लगा। गौरतलब है कि बारह मार्च को दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के हकूरा मुठभेड़ तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया।
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इनमें दो स्थानीय आतंकी थे। इस एनकाउंटर में मारे गए दो आतंकियों का संबंध तहरीक उल मुजाहिदीन तथा हिजबुल मुजाहिदीन से था। जबकि तीसरे की पहचान नहीं हो सकी थी। हालांकि बाद में पुलिस की ओर से खुद इस बात को कबूल किया गया कि तीसरा आतंकी तौफीक घाटी में हैदराबाद से था।
वह घाटी में आईएसआईएस की गतिविधियों को शामिल था। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों पहले अमाक न्यूज एजेंसी ने मुताबिक श्रीनगर के बिलाल कालोनी में हुर्रियत नेता के घर पर हमला कर पुलिसकर्मी की हत्या के पीछे आईएसआईएस का हाथ बताया गया है।
आईएसआईएस इसके पहले जकुरा हमले के पीछे अपना हाथ बताया था। दोनों ही आतंकी घटनाओं में आईएस का हाथ होने की बात को राज्य पुलिस और गृह मंत्रालय की ओर से नकार दिया गया था।
हालांकि आईएस की मौजूदगी के सवालों पर राज्य पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद ने कहा था की घाटी में आईएस की मौजूदगी साफ तौर पर नहीं है। लेकिन घाटी के कई आतंकी आईएस से प्रभावित है। अब छिटपुट गतिविधियों को आतंकवाद के समीकरण में बड़े बदलाव का संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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घाटी में नजर आता है आईएस का झंडा
आतंकी के जनाजे में आईएस का झंडा
- फोटो : BASIT ZARGAR
घाटी में अक्सर हिंसक प्रदर्शन और पत्थरबाजी के दौरान आईएसआईएस का झंडा देखने को मिलता है। कई दफा आतंकियों के मारे जाने के बाद उन्हें खुले आम आईएस के झंडे में लपेट कर दफन किया जाता है।
सूत्रों की मानें तो घाटी में आईएस को एक नए ट्रेंड के तौर पर देखा जा रहा है। यहीं कारण है कि आतंकियों के मारे जाने के बाद उन्हें आईएस के झंडे में लपेट कर सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है।
वहीं राज्य पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि आईएस का झंडा केवल जवानों को खिझाने के लिए उपयोग किया जाता है। बता दें कि घाटी में पत्थरबाजी के दौरान अक्सर युवाओं के हाथों में पाकिस्तान के साथ आईएस का झंडा दिखाई दे जाता है। यहां तक की आतंकियों के जनाजे में खुल्ले तौर पर आईएस का झंडा इस्तेमाल किया जाता है।
सूत्रों की मानें तो घाटी में आईएस को एक नए ट्रेंड के तौर पर देखा जा रहा है। यहीं कारण है कि आतंकियों के मारे जाने के बाद उन्हें आईएस के झंडे में लपेट कर सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है।
वहीं राज्य पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि आईएस का झंडा केवल जवानों को खिझाने के लिए उपयोग किया जाता है। बता दें कि घाटी में पत्थरबाजी के दौरान अक्सर युवाओं के हाथों में पाकिस्तान के साथ आईएस का झंडा दिखाई दे जाता है। यहां तक की आतंकियों के जनाजे में खुल्ले तौर पर आईएस का झंडा इस्तेमाल किया जाता है।