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कश्मीर की आजादी का राग अलापने वाले गिलानी ने तहरीक ए हुर्रियत से दिया इस्तीफा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जम्मू
Updated Mon, 19 Mar 2018 09:55 PM IST
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Syed Ali Gilani
- फोटो : FILE PHOTO
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तहरीक ए हुर्रियत के चेयरमैन पद पर सैयद अली शाह गिलानी की जगह मोहम्मद अशरफ सरई को नियुक्त किया गया है। गिलानी 2003 में हुर्रियत में फूट के बाद से लगभग 15 वर्षों से इस पद पर थे। गिलानी के पद छोड़ने के फैसले के बाद हुर्रियत की कार्यकारिणी की हुई बैठक में सरई को चेयरमैन पद के लिए चुना गया।
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सूत्रों के अनुसार गिलानी फिलहाल हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख बने रहेंगे, जिसका तहरीक ए हुर्रियत अंग है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरई भविष्य में हुर्रियत कांफ्रेंस प्रमुख का पद भी संभाल लेंगे। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी हुर्रियत के पहले अध्यक्ष थे।
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2001 में जब हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की स्थापना हुई तो गिलानी को उसका प्रमुख के रूप में चुना गया। तब से लेकर अब तक गिलानी ही उस पद पर काबिज थे। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर कश्मीर के युवाओं के बरगलाने के आरोप लगते रहे हैं।
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अक्सर आतंकियों के मारे जाने पर या सरकार के किसी ठोस कदम पर गिलानी बंद का ऐलान कर दिया करते हैं। जिसके बाद युवाओं द्वारा पत्थरबाजी की जाती है। गिलानी के इलाकों में भी पत्थरबाजी के ज्यादा घटनाएं सामने आती है। गिलानी अक्सर कश्मीर की आजादी का राग अलापते रहते हैं।
अरबों के हैं मालिक हैं गिलानी
जम्मू-कश्मीर की गरीबी और असमानता की वकालत करने वाले गिलानी खुद अरबों रूपए के मालिक हैं। एनआईए के ओर से गत वर्ष टेरर फंडिंग के केस की जांच में गिलानी का भी नाम आया था। सूत्रों के मुताबिक गिलानी के परिवार के कुल संपत्ति लगभग 150 करोड़ से ज्यादा की है। गिलानी के दो बेटे हैं जिसमें एक सर्जन तो दूसरा सरकारी कर्मचारी है।
आतंकियों के करीबी रहे गिलानी
घाटी को दहला कर दहशत का माहौल पैदा करने वाले आतंकियों के गिलानी अक्सर करीबी रहे हैं। हिजबुल के पोस्टर बॉय बुरहान के मारे जाने के बाद ही गिलानी ने उसे अपना करीबी बताते हुए कहा था कि बुरहान की वजह से कश्मीर एक बार फिर भारत के खिलाफ खड़ा हुआ है।
हाल ही में हकरा मुठभेड़ में मारे गए आतंकी ईसा फाजली को कश्मीर की आजादी की लड़ाई का एक वीर योद्धा बताया था। वहीं पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला भी अक्सर गिलानी पर आतंकवाद को बढ़ावा का आरोप लगाते रहे हैं।