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Jammu News: मानवीय मूल्यों के पतन पर कटाक्ष करता है नाटक गत्त
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श्रीनगर में एसकेआईसीसी के लॉन में डोगरी नाटक गत्त का मंचन किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संडे थियेटर सीरीज के तहत नटरंग ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) के लॉन में डोगरी नाटक गत्त का मंचन किया। कृष्ण चंदर की प्रसिद्ध उर्दू क्लासिक लघु कहानी खड्डा पर आधारित नाटक मानवीय मूल्यों के पतन पर करारा व्यंग्य है। नाटक में दिखाया कि सभी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हैं और काम दूसरों को सौंप देते हैं। गरीबों के उत्थान के नारे धूल भरी हवा के साथ फीके पड़ जाते हैं।
नाटक आम व्यक्ति की कहानी है जो गड्ढे में गिर जाता है। उसकी मदद के लिए लोग दावे तो करते हैं, लेकिन कोई आगे नहीं आता। हर कोई बहाने बनाता है। कहानी तब नया मोड़ लेती है जब लोग मंत्री से सड़क की खस्ताहाल स्थिति की शिकायत करते हैं। इस पर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी समस्या दूर करने के बजाय गड्ढे वाले स्थान पर मंत्री की जनसभा के लिए मंच तैयार करते हैं। मंत्री विरोधियों को कोसता है, लेकिन गड्ढे में गिरे व्यक्ति को कोई नहीं निकालता।
अंत में दर्शकों में से एक आदमी उस पीड़ित की मदद करने की अपील करता है। नाटक में नीरज कांत, शिवम सिंह, मोहम्मद यासीन, बृजेश सिंह अवतार, आदेश धर, कुशल भट, मीनाक्षी भगत, मिहिर गुजराल, महिक्षित सिंह, सुमित बंदराल, विशाल शर्मा और शेरयार सलारिया ने अभिनय किया। ब्यूरो
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जम्मू। संडे थियेटर सीरीज के तहत नटरंग ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) के लॉन में डोगरी नाटक गत्त का मंचन किया। कृष्ण चंदर की प्रसिद्ध उर्दू क्लासिक लघु कहानी खड्डा पर आधारित नाटक मानवीय मूल्यों के पतन पर करारा व्यंग्य है। नाटक में दिखाया कि सभी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हैं और काम दूसरों को सौंप देते हैं। गरीबों के उत्थान के नारे धूल भरी हवा के साथ फीके पड़ जाते हैं।
नाटक आम व्यक्ति की कहानी है जो गड्ढे में गिर जाता है। उसकी मदद के लिए लोग दावे तो करते हैं, लेकिन कोई आगे नहीं आता। हर कोई बहाने बनाता है। कहानी तब नया मोड़ लेती है जब लोग मंत्री से सड़क की खस्ताहाल स्थिति की शिकायत करते हैं। इस पर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी समस्या दूर करने के बजाय गड्ढे वाले स्थान पर मंत्री की जनसभा के लिए मंच तैयार करते हैं। मंत्री विरोधियों को कोसता है, लेकिन गड्ढे में गिरे व्यक्ति को कोई नहीं निकालता।
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अंत में दर्शकों में से एक आदमी उस पीड़ित की मदद करने की अपील करता है। नाटक में नीरज कांत, शिवम सिंह, मोहम्मद यासीन, बृजेश सिंह अवतार, आदेश धर, कुशल भट, मीनाक्षी भगत, मिहिर गुजराल, महिक्षित सिंह, सुमित बंदराल, विशाल शर्मा और शेरयार सलारिया ने अभिनय किया। ब्यूरो
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