Kupwara Encounter: आतंकियों से बरामद हुई स्टेयर एयूजी राइफल, अफगानिस्तान में नाटो के सैनिक इसका करते थे प्रयोग
सूत्रों का दावा है कि घाटी में संभवत: ऑस्ट्रिया निर्मित राइफल की यह पहली बरामदगी है।अफगानिस्तान में नाटो देशों की सेनाएं इसका इस्तेमाल करती थीं। साथ ही मारे गए विदेशी आतंकियों के पास पाकिस्तानी पहचान पत्र मिला है।
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कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में गुरुवार को मारे गए दो विदेशी आतंकियों से ऑस्ट्रिया निर्मित बुलपप असॉल्ट राइफल, 'स्टेयर एयूजी' बरामद की गई है। इस तरह की राइफलों का प्रयोग अफगानिस्तान में नाटो देश की सेनाओं द्वारा किया जाता था। आधिकारिक सूत्रों ने इसे दुर्लभ बरामदगी बताया है।
लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर घुसपैठ की कोशिश करने वाले दहशतगर्दों से इन राइफलों के साथ युद्ध जैसा गोला-बारूद का जखीरे मिला है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया, संभवत: यह पहली बार है कि ऐसी राइफल बरामद की गई है। यह एक भारी हथियार है जिसे संभालना आसान नहीं है। इसलिए इससे पहले दिखी भी नहीं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अन्य बलों के अलावा, इस राइफल का इस्तेमाल अफगानिस्तान में नाटो बलों द्वारा किया गया है, इसलिए संभवत: यह वहां से पाकिस्तान पहुंची होगी।
सेना के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा, गुरुवार को केरन सेक्टर में एलओसी पार से आतंकी घुसपैठ की कोशिश को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया था। भीषण गोलीबारी में दो विदेशी आतंकी मारे गए थे। इनके पास से हथियारों के जखीरे के अलावा एक पाकिस्तानी पहचान पत्र भी बरामद हुआ था। कहा, पिछले कुछ हफ्तों में एलओसी पर यह तीसरा सफल घुसपैठ विरोधी अभियान था।
पाकिस्तानी सेना और दहशतगर्दों का गठजोड़ सामने आया
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्ट्रिया निर्मित बुलपप असॉल्ट राइफल, ''स्टेयर एयूजी'' का इस्तेमाल अफगानिस्तान में नाटो बलों द्वारा किया जाता था और जब 2021 में एक समझौते के तहत नाटो बल वहां से निकले तो कई हथियार तालिबानियों द्वारा लूट लिए गए अथवा वहीं छोड़ दिए गए। बाद में ऐसे हथियार अवैध रूप से बेच दिए गए। यह राइफल पाकिस्तान में एसएसजी द्वारा भी इस्तेमाल की जा रही है। इसलिए मारे गए आतंकियों से ऐसी राइफल का मिलना पाकिस्तानी सेना और दहशतगर्दों के बीच गठजोड़ को उजागर करता है।
इससे पहले भी वर्ष 2017 में अमेरिका निर्मित कई हथियार आतंकियों से बरामद किये गए थे, जिसमें एम-4 कार्बाइन पहली बार बरामद हुई थी। यह कार्बाइन राइफल 1962 में बनी एम16 का एडवांस वर्जन है। यह 1990 में बनी थी और इसे भी अफगानिस्तान में अमेरिकी व नाटो फोर्स इस्तेमाल कर रही थी।