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Jammu News: दो पशुओं से शुरू किया दूध का काम, अब चला रहे डेयरी
Wed, 19 Feb 2025 02:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Wed, 19 Feb 2025 02:00 AM IST
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सनूरा पंचायत के बड़याल गांव में डेयरी फार्म में पशुपालक जगदीश। संवाद
- फोटो : samba
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15 साल पहले शुरू की आटा चक्की, काम कम होने के बाद शुरू किया दूध का कारोबार
सांबा। जिले के सनूरा पंचायत के बड़ेयाल गांव के जगदीश राज ने अपने गांव में दो पशुओं के साथ दूध का कारोबार शुरू किया था जो अब एक आधुनिक डेयरी फार्म तक पहुंच गया है। जगदीश ने बताया कि 15 वर्ष पहले उन्होंने अपने गांव में आटा चक्की लगाई तो काम कम था। इसके बाद उन्होंने दो भैंस रख ली और दूध का कारोबार शुरू कर लिया।
आहिस्ता आहिस्ता पशुओं को बढ़ाना शुरू कर दिया। पशु पालन विभाग की ओर से उन्होंने एक योजना के तहत 23 लाख रुपये लिए, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली व हमने 25 पशु खरीदे, अब हमारे पास 30 पशु हैं। मशीन की सहायता से दूध निकाला जाता है। जगदीश ने बताया कि पहले डेयरी फार्म के लिए अधिक मेहनत रहती थी अब आधुनिक डेयरी हो गई है। पहले अपने गांव में डेयरी का काम शुरू किया अब मार्ग के किनारे पर डेयरी चला रहे हैं। संवाद
दो पशु खरीदने के लिए 80 हजार रुपये सब्सिडी दी जाती है। सरकार की ओर से देसी नस्ल पर ही जोर दिया जा रहा है। एचएडीपी योजना के तहत पशु पालक को शेड भी बनाकर दिया जाता है। पशु खरीदने के लिए 20 लाख रुपये दिए जाते हैं, जिसमें 10 लाख सब्सिडी दी जाती है।
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डॉ. राहुल देव, जिला मुख्य पशु अधिकारी सांबा।
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सांबा। जिले के सनूरा पंचायत के बड़ेयाल गांव के जगदीश राज ने अपने गांव में दो पशुओं के साथ दूध का कारोबार शुरू किया था जो अब एक आधुनिक डेयरी फार्म तक पहुंच गया है। जगदीश ने बताया कि 15 वर्ष पहले उन्होंने अपने गांव में आटा चक्की लगाई तो काम कम था। इसके बाद उन्होंने दो भैंस रख ली और दूध का कारोबार शुरू कर लिया।
आहिस्ता आहिस्ता पशुओं को बढ़ाना शुरू कर दिया। पशु पालन विभाग की ओर से उन्होंने एक योजना के तहत 23 लाख रुपये लिए, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली व हमने 25 पशु खरीदे, अब हमारे पास 30 पशु हैं। मशीन की सहायता से दूध निकाला जाता है। जगदीश ने बताया कि पहले डेयरी फार्म के लिए अधिक मेहनत रहती थी अब आधुनिक डेयरी हो गई है। पहले अपने गांव में डेयरी का काम शुरू किया अब मार्ग के किनारे पर डेयरी चला रहे हैं। संवाद
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दो पशु खरीदने के लिए 80 हजार रुपये सब्सिडी दी जाती है। सरकार की ओर से देसी नस्ल पर ही जोर दिया जा रहा है। एचएडीपी योजना के तहत पशु पालक को शेड भी बनाकर दिया जाता है। पशु खरीदने के लिए 20 लाख रुपये दिए जाते हैं, जिसमें 10 लाख सब्सिडी दी जाती है।
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डॉ. राहुल देव, जिला मुख्य पशु अधिकारी सांबा।