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यौम-ए-मीरास: सोपोर में स्व. अतीका बानो को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
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सोपोर। सोपोर में रविवार को सैकड़ों लोग यौम-ए-मीरास के अवसर पर एकत्र हुए। इस दौरान मीरास महल संग्रहालय की दूरदर्शी संस्थापक स्वर्गीय अतीका बानो को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
यह स्मरणोत्सव कार्यक्रम मजलिसुन निसा जम्मू-कश्मीर सोपोर और अदबी मार्कज कमरज जम्मू-कश्मीर के सहयोग से आयोजित किया गया जिसमें विद्वानों, शिक्षाविदों, अधिकारियों और संस्कृति प्रेमियों की प्रभावशाली भागीदारी देखी गई। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की जिनमें विधायक सोपोर इरशाद रसूल कार और विरासत विशेषज्ञ सलीम बेग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। महानिदेशक जीएन इत्तू सम्मानित अतिथि थे। अपने संबोधन में जीएन इत्तू ने स्वर्गीय अतीका बानो के असाधारण योगदान की सराहना की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत युवा दिमाग को आकार देने में विरासत आधारित शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि एनईपी स्पष्ट रूप से कहती है कि विरासत आधारित शिक्षा को शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए। छात्रों को मीरास महल जैसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऐसे अनुभव पाठ्यपुस्तकों से कहीं अधिक गहरा प्रभाव डालते हैं जो बच्चों को उनकी इतिहास और पहचान से जोड़ने में मदद करते हैं।
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मीरास महल को कश्मीरी विरासत का खजाना बताते हुए इत्तू ने उल्लेख किया कि यह संग्रहालय अपनी विशाल कलाकृतियों, पांडुलिपियों और पारंपरिक घरेलू वस्तुओं के संग्रह के माध्यम से कश्मीर की सामूहिक स्मृति को संरक्षित करता है। उन्होंने कहा कि यहां हर वस्तु एक कहानी कहती है और हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं को यह सीखना होगा कि अतीका बानो ने हमारे लिए क्या संरक्षित किया। नागरिक समाज और स्थानीय स्वयंसेवकों को इस मिशन को मजबूत करने के लिए आगे आना चाहिए। संवाद
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यह स्मरणोत्सव कार्यक्रम मजलिसुन निसा जम्मू-कश्मीर सोपोर और अदबी मार्कज कमरज जम्मू-कश्मीर के सहयोग से आयोजित किया गया जिसमें विद्वानों, शिक्षाविदों, अधिकारियों और संस्कृति प्रेमियों की प्रभावशाली भागीदारी देखी गई। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की जिनमें विधायक सोपोर इरशाद रसूल कार और विरासत विशेषज्ञ सलीम बेग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। महानिदेशक जीएन इत्तू सम्मानित अतिथि थे। अपने संबोधन में जीएन इत्तू ने स्वर्गीय अतीका बानो के असाधारण योगदान की सराहना की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत युवा दिमाग को आकार देने में विरासत आधारित शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया।
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उन्होंने कहा कि एनईपी स्पष्ट रूप से कहती है कि विरासत आधारित शिक्षा को शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए। छात्रों को मीरास महल जैसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऐसे अनुभव पाठ्यपुस्तकों से कहीं अधिक गहरा प्रभाव डालते हैं जो बच्चों को उनकी इतिहास और पहचान से जोड़ने में मदद करते हैं।
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मीरास महल को कश्मीरी विरासत का खजाना बताते हुए इत्तू ने उल्लेख किया कि यह संग्रहालय अपनी विशाल कलाकृतियों, पांडुलिपियों और पारंपरिक घरेलू वस्तुओं के संग्रह के माध्यम से कश्मीर की सामूहिक स्मृति को संरक्षित करता है। उन्होंने कहा कि यहां हर वस्तु एक कहानी कहती है और हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं को यह सीखना होगा कि अतीका बानो ने हमारे लिए क्या संरक्षित किया। नागरिक समाज और स्थानीय स्वयंसेवकों को इस मिशन को मजबूत करने के लिए आगे आना चाहिए। संवाद