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जम्मू कश्मीर: LG मनोज सिन्हा बोले- प्रदेश में किसी की सिफारिश पर नौकरी देने की व्यवस्था अब समाप्त
Mon, 18 Sep 2023 03:55 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 18 Sep 2023 03:55 PM IST
सार
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब किसी की सिफारिश पर नौकरी देने की व्यवस्था समाप्त हो गई है। तीन सालों में तीस हजार लोगों को नौकरी दी गई है।
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LG Manoj Sinha
- फोटो : संवाद
विस्तार
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब किसी की सिफारिश पर नौकरी देने की व्यवस्था समाप्त हो गई है। तीन सालों में तीस हजार लोगों को नौकरी दी गई है। इसी के साथ ही अब योग्यता के आधार पर नौकरी दी जा रही है। यह बातें उन्होंने रविवार को श्रीनगर के एसकेआईसीसी में पीएम विश्वकर्मा योजना के शुभारंभ अवसर कहीं। इस मौके पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री कौशल किशोर भी मौजूद रहे।
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उपराज्यपाल ने कहा कि इस योजना से हाथों और औजारों से काम करने वाले जम्मू-कश्मीर के हजारों कारीगरों को सीधे लाभ होगा। इस मौके पर वर्चुअली रूप से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की, जिसके तहत पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को न्यूनतम ब्याज दर पर संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान किया जाएगा।
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पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और एक आईडी कार्ड के माध्यम से मान्यता प्राप्त करने के अलावा भट्ट और अन्य कारीगरों और शिल्पकारों को बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण सहित कौशल उन्नयन होगा।
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उपराज्यपाल ने कहा कि रचनात्मकता और कड़ी मेहनत से हमारे उत्कृष्ट कारीगरों ने न केवल अमूल्य विरासत, विविध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित किया है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास के पहियों को भी चालू रखा है। ये मेहनती हाथ प्रगतिशील समाज की ताकत हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना शिल्पकारों के पारंपरिक कौशल और उनकी अनुकरणीय प्रतिबद्धता और समर्पण का सम्मान करती है।
यह सुनिश्चित करेगा कि विश्वकर्माओं को वित्तीय सहायता और कौशल उन्नयन प्रदान किया जाए और वे राष्ट्रीय और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ एकीकृत हों। उपराज्यपाल ने कहा कि दुर्भाग्य से जम्मू-कश्मीर में दशकों से चली आ रही भेदभावपूर्ण व्यवस्था ने पारंपरिक कौशल में लगे समुदायों की आकांक्षाओं को ढर्रे से उतार दिया है।
प्रधान मंत्री के मार्गदर्शन में, हम समाज के गरीब, वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के दृष्टिकोण के साथ काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि पीएम विश्वकर्मा योजना हमारे विश्वकर्माओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री कौशल किशोर ने अधिक से अधिक पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को पीएम विश्वकर्मा योजना से जोड़ने का आह्वान किया। केंद्रीय राज्य मंत्री ने विभिन्न योजनाओं के तहत जम्मू कश्मीर द्वारा दर्ज की गई प्रगति की सराहना की और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में महिला लोगों को सभी समर्थन और सहायता का आश्वासन भी दिया।
पीएम विश्वकर्मा को 13,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित किया जाएगा। योजना के तहत, बायोमेट्रिक आधारित पीएम विश्वकर्मा पोर्टल का उपयोग करके सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से विश्वकर्माओं का निःशुल्क पंजीकरण किया जाएगा।
उन्हें पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाएगी, बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण से जुड़े कौशल उन्नयन, 15,000 रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन, 1 लाख रुपये तक संपार्श्विक-मुक्त क्रेडिट सहायता (पहली किश्त) और 2 लाख रुपये (दूसरी किश्त) प्रदान की जाएगी।
प्रधानमंत्री के सरंक्षण में प्रशासन कर गरीब और वंचितों को सशक्त बनाने का काम
उपराज्यपाल ने कहा कि प्रदेश प्रशासन प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में समाज के गरीब, वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए काम कर रहा है। विश्वास है कि पीएम विश्वकर्मा योजना हमारे विश्वकर्माओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। उपराज्यपाल ने पारंपरिक कौशल और हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों में लगे परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उनके प्रशासन द्वारा की गई प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा हथकरघा और हस्तशिल्प हमारी अर्थव्यवस्था के दो बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, सरकार ने 29 से अधिक अन्य शिल्पों को मान्यता दी है और उन्हें हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के दायरे में लाया है।
श्रीनगर के फैयाज को नई दिल्ली में मिला योजना के तहत पहचान पत्र
श्रीनगर के एक दर्जी फैयाज अहमद भट्ट उन लाभार्थियों में शामिल हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को शुरू की गई विश्वकर्मा योजना के तहत पहचान पत्र मिला है। ठंड से बचने के लिए कश्मीरियों द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक लबादा फेरन बनाने वाले विशेषज्ञ फैयाज अहमद भट्ट 40 वर्षों से काम कर रहे हैं। वह उन 30 लाख लाभार्थियों में से हैं, जिन्हें सरकार अगले पांच वर्षों में इस योजना के तहत लक्षित करना चाहती है।
शांति और विकास को बाधित करने वालों की पहचान करने का आह्वान
उप राज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से शांति और विकास को बाधित करने की कोशिश करने वाले तत्वों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने आम आदमी के जीवन में शांति और समृद्धि लाने के लिए तीन वर्षों में कई चुनौतियों पर काबू पाया है।