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Jammu News: माईसुमा में जमीन का मालिक घोषित करने की याचिका 16 साल बाद खारिज
Sat, 02 Mar 2024 02:49 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 02 Mar 2024 02:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। स्थानीय अदालत ने माईसुमा श्रीनगर में 3 मरला से अधिक की भूमि का मालिक/आवंटित घोषित करने के निर्देश देने की 16 साल बाद खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता एम. बख्शी का तर्क था कि जमीन उनके पिता को 8 अक्टूबर, 1952 को आवंटित की गई थी और वह वर्षों से इस पर कब्जा था। लेकिन छह लोगों ने बिना किसी अधिकार के जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया।
उक्त छह व्यक्तियों के खिलाफ बख्शी ने 2008 में मुकदमा दायर किया था। इसमें लिखित बयान में कहा कि जमीन उनकी है और इसका एक हिस्सा जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सड़क और भवन विभाग के माध्यम से अधिग्रहित किया गया था। 2002 में दस्तावेजों की उचित जांच और मौके पर सत्यापन के बाद सड़क चौड़ीकरण किया गया। उन्होंने कहा कि भूमि के शेष हिस्से पर, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उचित अनुमति के बाद निर्माण किया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता (बख्शी) ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और उन्हें परेशान करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया।
प्रथम सिविल अधीनस्थ न्यायाधीश नगर मजिस्ट्रेट श्रीनगर द्वारा यह रेखांकित करते हुए कि याचिकाकर्ता यह स्थापित करने में विफल रहा कि इन छह व्यक्तियों ने उसकी जमीन हड़प ली और उस पर निर्माण कर लिया। अदालत ने कहा कि वह यह स्थापित करने में विफल रहा है कि प्रतिवादी 6 से 11 द्वारा किया गया निर्माण अवैध है और यह स्थापित करने में विफल रहा है कि अनुमति दो अप्रैल, 2008 को अवैध रूप से और गलत बयानी द्वारा जारी की गई थी और याचिका खारिज कर दी।
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श्रीनगर। स्थानीय अदालत ने माईसुमा श्रीनगर में 3 मरला से अधिक की भूमि का मालिक/आवंटित घोषित करने के निर्देश देने की 16 साल बाद खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता एम. बख्शी का तर्क था कि जमीन उनके पिता को 8 अक्टूबर, 1952 को आवंटित की गई थी और वह वर्षों से इस पर कब्जा था। लेकिन छह लोगों ने बिना किसी अधिकार के जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया।
उक्त छह व्यक्तियों के खिलाफ बख्शी ने 2008 में मुकदमा दायर किया था। इसमें लिखित बयान में कहा कि जमीन उनकी है और इसका एक हिस्सा जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सड़क और भवन विभाग के माध्यम से अधिग्रहित किया गया था। 2002 में दस्तावेजों की उचित जांच और मौके पर सत्यापन के बाद सड़क चौड़ीकरण किया गया। उन्होंने कहा कि भूमि के शेष हिस्से पर, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उचित अनुमति के बाद निर्माण किया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता (बख्शी) ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और उन्हें परेशान करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया।
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प्रथम सिविल अधीनस्थ न्यायाधीश नगर मजिस्ट्रेट श्रीनगर द्वारा यह रेखांकित करते हुए कि याचिकाकर्ता यह स्थापित करने में विफल रहा कि इन छह व्यक्तियों ने उसकी जमीन हड़प ली और उस पर निर्माण कर लिया। अदालत ने कहा कि वह यह स्थापित करने में विफल रहा है कि प्रतिवादी 6 से 11 द्वारा किया गया निर्माण अवैध है और यह स्थापित करने में विफल रहा है कि अनुमति दो अप्रैल, 2008 को अवैध रूप से और गलत बयानी द्वारा जारी की गई थी और याचिका खारिज कर दी।
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